PPF और सुकन्या समृद्धि योजना सहित अन्य स्मॉल सेविंग स्कीम में मिलने वाले ब्याज में हो सकती है कटौती

  • PPF पर मिलने वाला ब्याज 7 फीसदी से भी नीचे आ सकता है
  • छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरें सरकारी बॉन्ड यील्ड से जुड़ी रहती हैं

दैनिक भास्कर

Jun 22, 2020, 11:46 AM IST

नई दिल्ली. सरकार एक बार फिर छोटी बचत योजनाओं पर मिलने वाली ब्याज दरों में कटौती हो सकती है। इसके तहत पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) में भी कटौती की जा सकती है। अगर ऐसा होता है तो PPF पर मिलने वाला ब्याज 7 फीसदी से भी नीचे जा सकता है, जो 46 साल में सबसे कम होगा। इससे पहले 1974 में PPF पर मिलने वाली ब्याज दर 7 फीसदी से कम हुई थी।

क्यों होगी कटौती?
छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरें सरकारी बॉन्ड यील्ड से कनेक्ट रहती हैं। बॉन्ड यील्ड में लगातार गिरावट का मतलब है कि छोटी बचत योजनाओं की दरों में कटौती हो सकती हैं। यदि दरों में उम्मीद के अनुसार कटौती की जाती है, तो 1974 के बाद यह पहली बार होगा कि PPF दर 7 फीसदी से नीचे आ जाएगी। छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दर उसी समय की सरकारी बॉन्ड यील्ड की दर से जुड़ी होती हैं। PPF दर 10 साल की सरकारी बॉन्ड यील्ड से जुड़ी है।

पिछली तिमाही में औसत बॉन्ड यील्ड के प्रदर्शन के आधार पर प्रत्येक तिमाही की शुरुआत में छोटी बचत योजनाओं पर मिलने वाली ब्याज दर घोषित की जाती हैं। चालू अप्रैल-जून तिमाही के लिए ब्याज दर मार्च के अंत में 7.1 फीसदी दर पर तय की गई थी जब जनवरी-मार्च तिमाही में 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड दर 6.42 फीसदी थी।

सरकारी बॉन्ड यील्ड में आई गिरावट?
1 अप्रैल के बाद से 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड का औसत 6.07 फीसदी रहा है और वर्तमान में ये दर 5.85 फीसदी है। इसका मतलब है कि छोटी बचत योजनाओं के लिए दर में कटौती होने वाली है। ऐसे में PPF, सुकन्या योजना और सीनियर सिटीजन सेविंग स्कीम जैसी योजनाओं पर मिलने वाले ब्याज में कटौती हो सकती है। 

क्‍या है बॉन्‍ड यील्‍ड?
हर बॉन्‍ड की एक फेस वैल्‍यू होती है। यह वह रकम होती है जिसके लिए बॉन्‍ड जारी किया जाता है और जो बॉन्‍ड की मेच्योरिटी के बाद धारक को वापस मिलती है। हर बॉन्‍ड का एक कूपन होता है, यह उस बॉन्‍ड पर मिलने वाला ब्‍याज होता है। किसी भी बॉन्‍ड को खरीदने से पहले उसकी यील्‍ड से यह पता लगाया जाता है कि मेच्योरिटी के बाद कितना पैसा मिलेगा। बॉन्‍ड के भाव बढ़ने और घटने का असर उसकी यील्‍ड पर पड़ता है। अगर किसी बॉन्‍ड का भाव बढ़ता है तो उसकी यील्‍ड घट जाती है और अगर किसी बॉन्‍ड का भाव घटता है तो उसकी यील्‍ड बढ़ जाती है। 

इसे उदाहरण से समझें
जैसे भारत सरकार ने अगर तीन साल पहले कोई बॉन्‍ड जारी किया था, जिसका फेस वैल्‍यू 100 रुपए थी और उसका कूपन या ब्‍याज दर 7 फीसदी थी और उसकी मेच्योरिटी 30 साल थी। वहीं तीन साल बाद सरकार एक और बॉन्‍ड बेचती है जिसका फेस वैल्‍यू भी 100 रुपए है। लेकिन उसका कूपन या ब्‍याज दर 6 फीसदी है। ऐसे में कोई भी व्‍यक्ति ज्‍यादा रिटर्न के लिए तीन साल पुराना बॉन्‍ड खरीदना चाहेगा। ऐसे में 100 रुपए के फेस वैल्‍यू वाला बॉन्‍ड का भाव बढ़ेगा और वह 100 रुपयए से ज्‍यादा का हो जाएगा। यह 120 रुपए या फिर 110 रुपए का भी हो सकता है। ऐसे में उसका कूपन या ब्‍याज दर 7 फीसदी ही होगा।

मतलब इस बॉन्‍ड के धारक को 7 रुपए सालाना ब्‍याज मिलेगा। ऐसे में अगर धारक ने 100 रुपए फेस वैल्‍यू वाले पुराने बॉन्‍ड को 120 रुपए में खरीदा है तो ब्‍याज 7 फीसदी सालाना मिलेगा, लेकिन वह फेस वैल्‍यू का 7 फीसदी होगा। मतलब 100 रुपये का 7 फीसदी, नाकि 120 रुपए का 7 फीसदी। ऐसे में लागत बढ़ जाने से मुनाफा घट जाएगा।

इससे पिछली तिमाही में भी हुई थी ब्याज दरों में कटौती

स्कीम

वर्तमान दर(%)

पुरानी दर(%)
1-3 साल की एफडी 5.5 6.9
5 साल की एफडी 6.7 7.7
आरडी (5 साल) 5.8 7.2
सीनियर सिटीजन स्कीम (5 साल) 7.4 8.6
मंथली इनकम अकाउंट (एमआईए) 6.6 7.6
राष्ट्रीय बचत पत्र (एनएससी) 6.8 7.9
पब्लिक प्रोविडेंट फंड (पीपीएफ) 7.1 7.9
किसान विकास पत्र 6.9 7.6
सुकन्या समृद्धि 7.6 8.4