8 सालों के निचले स्तर पर पहुंच गई ईपीएफ की ब्याज दर, 2012-13 में 8.5 प्रतिशत थी और अब भी इसी स्तर पर है

  • ईपीएफओ को यस बैंक, डीएचएफएल एवं एडीएजी ग्रुप के बांड्स की वजह से भारी नुकसान
  • ईपीएफओ ब्याज दर को बनाए रखने के लिए आगे चलकर रिजर्व में कमी कर सकता है

दैनिक भास्कर

Jun 27, 2020, 04:55 PM IST

मुंबई. हाल में ईपीएफ की ब्याज दरों में कमी की आशंका जताई गई है। ऐसा इसलिए क्योंकि तमाम इंस्ट्रूमेंट पर ब्याज दरें घट रही हैं। फिलहाल ईपीएफओ की ब्याज दर 8 सालों के निचले स्तर पर पहुंच गई है। 2012-13 में यह ब्याज दर 8.5 प्रतिशत थी और 8 साल बाद भी यह इसी स्तर पर है। इस तरह से अगर आपका पैसा ईपीएफओ में है तो आपको 8 साल पहले जो ब्याज दर मिल रही थी, वही अब भी मिल रही है।

ऐसे में आपको घाटा होना तय है। अब इसमें और कटौती की उम्मीद है। हालांकि इसी अवधि में शेयर बाजार ने बेहतर रिटर्न दिया है।

पूरे साल के लिए और भी घट सकती हैं ब्याज दरें 

यदि आप कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) द्वारा वित्त वर्ष 2019-20 के लिए घोषित 8.5 प्रतिशत की ब्याज दर से निराश हैं तो आपको और निराश होने के लिए तैयार रहना होगा। 8.5 प्रतिशत की ब्याज दर ईपीएफ द्वारा पूरे साल के रिटर्न पर आधारित थी। सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टी (सीबीटी) सदस्यों ने 6 मार्च को मीटिंग में यह बात कही थी कि डेट निवेश 8.15 प्रतिशत की दर से ब्याज दे सकता है, जबकि बाकी का 0.35 प्रतिशत इक्विटी के निवेश से लाभ के रूप में लिया जा सकता है।

इक्विटी निवेश पर हुआ ईपीएफओ को घाटा

हालांकि मार्च में शेयर बाजार काफी गिरा और ईपीएफओ के इक्विटी निवेश के मूल्य में 27,000 करोड़ रुपए की कमी आई। यह स्पष्ट नहीं है कि ईपीएफओ फंड मैनेजर ने बाजार की गिरावट से पहले निवेश को बेचा था। हालांकि ईपीएफओ के कॉर्पस का 6 प्रतिशत से भी कम हिस्सा ईपीएफओ इक्विटी बाजार में निवेश करता है। मार्च में बाजार में 30 प्रतिशत की गिरावट आई थी। इसकी वजह से ईपीएफओ का पूरा रिटर्न खतम हो गया था। अनुमान है कि ईपीएफओ 2019-20 में 7 प्रतिशत से ज्यादा का रिटर्न नहीं दे पाएगा।

इक्विटी में कम निवेश करता है ईपीएफओ

वैसे ईपीएफओ का इक्विटी निवेश काफी कम रहता है। आंकड़े बताते हैं कि 2012-13 से लेकर 2014-15 तक इक्विटी में निवेश शून्य था। 2016 में कुल कॉर्पस का 0.6 प्रतिशत इक्विटी में ईपीएफओ ने निवेश किया था। 2016-17 में यह 1.08 प्रतिशत हुआ जबकि 2017-18 में यह दोगुना बढ़कर 3.6 प्रतिशत हो गया। इसी तरह 2018-19 में यह आंकड़ा 5.1 प्रतिशत हो गया और 2019-20 में यह घटकर 4.4 प्रतिशत हो गया।

2015 में इक्विटी में निवेश करना शुरू किया

ईपीएफओ ने इक्विटीज में 2015 में निवेश करना शुरू किया था। इसका लोगों ने स्वागत भी किया था। क्योंकि 2014 में बाजार में तेजी का दौर था। ईपीएफओ ने पूरे कॉर्पस का 5 प्रतिशत हिस्सा निफ्टी ईटीएफ में निवेश किया था। इसे 2017 तक बढ़ाकर 10 प्रतिशत कर दिया गया था और 2018 में यह 15 प्रतिशत हो गया। विश्लेषकों का कहना है कि ईपीएफओ के पास लंबे समय तक के लिए पैसा आता है, इसलिए उसे इक्विटीज बाजार में निवेश करना चाहिए ताकि बेहतर रिटर्न मिल सके।

बाजार, म्यूचुअल फंड आदि के निवेश पर मिला है कम रिटर्न

जिस तरह म्यूचुअल फंड और एनपीएस निवेश करते हैं, ईपीएफओ उस तरह से निवेश नहीं करता है। म्यूचुअल फंड और एनपीएस इक्विटी में निवेश करते हैं। रिटायरमेंट बॉडीज ईपीएफओ हमेशा बांड्स और अन्य फिक्स्ड इनकम सिक्योरिटीज में निवेश करता है और इस निवेश पर जो ब्याज उसे मिलता है, उसी आधार पर वह ब्याज दरों की घोषणा करता है। रिटर्न में 150 बेसिस प्वाइंट की कटौती हालांकि कोई प्रलयकारी नहीं है। खासकर ऐसे समय में जब शेयर बाजार 30 प्रतिशत गिरा हो, म्यूचुअल फंड में रिटर्न 10-20 प्रतिशत कम हुआ हो, और ब्याज दरों में 70-80 प्रतिशत की गिरावट देखी गई हो।

पीएफ सदस्य बाजार से जुड़े रिटर्न का उपयोग नहीं करते हैं। उनके लिए 15 बीपीएस की कटौती भी बड़ी चिंता बन जाती है।

ईपीएफओ अभी दे रहा है 8.5 प्रतिशत ब्याज

ईपीएफओ ने 8.5 प्रतिशत की दर से ब्याज देने की घोषणा की है। विश्लेषक कहते हैं कि असेट्स को बेचकर ज्यादा रिटर्न देना भी एक सवाल पैदा करता है। क्योंकि स्कीम के लंबी अवधि में यह खतरनाक हो सकता है। केवल पोंजी स्कीम ही ज्यादा रिटर्न दे सकती हैं। क्योंकि उनका निवेश इतना रिटर्न पैदा कर सकता है। ईपीएफओ से हालांकि आप पैसा तभी निकाल सकते हैं जब आपको पैसे की बहुत ज्यादा दिक्कत हो। खासकर लॉकडाउन में यह सुविधा मिली है।

आगे चलकर ब्याज दरों में और गिरावट हो सकती है

यदि ईपीएफ 2019-20 में 7 प्रतिशत की ब्याज दर पाता है लेकिन 8.5 प्रतिशत देता है तो जिन लोगों ने पहले पैसा निकाला था, उनको  उससे अब ज्यादा मिलेगा। हालांकि कोविड के अलावा भी कुछ लोग रिटायरमेंट के लिए पैसे निकाल रहे हैं। लेकिन उन सदस्यों का क्या होगा, जो लोग अभी भी निवेश करते जा रहे हैं? यह स्पष्ट है कि ईपीएफओ इमर्जेंसी के लिए फंड रखता है। पर यह स्पष्ट नहीं है कि वर्तमान में वह रिजर्व में कितना फंड रखा है। इसने 2017-18 में इक्विटी निवेश पर लाभ कमाया था। इसमें ईटीएफ को बेचा था और करीबन 1,000 करोड़ रुपए का लाभ कमाया था।

हर साल इक्विटी में निवेश बढ़ाता गया ईपीएफओ

हालांकि ईपीएफओ इस तरह का कोई आंकड़ा जारी नहीं करता है। पर पिछले पांच सालों के उसके निवेश और रिटर्न के आंकड़ों का अनुमान लगाएं तो जो आंकड़े आ रहे हैं वे चौंकाने वाले हैं। 2015 -16 में ईपीएफओ ने इक्विटीज में 5,166 करोड़ रुपए जबकि डेट में 1,49,834 करोड़ रुपए का निवेश किया। कुल निवेश एक लाख 55 हजार करोड़ रुपए रहा। 2016-17 में कुल निवेश एक लाख 62 हजार 750 करोड़ रुपए रहा तो अगले साल में यह एक लाख 70 हजार 888 करोड़ रुपए हो गया।

2019-20 में कुल निवेश इक्विटी में 28 हजार 261 करोड़ रुपए रहा

2018-19 में यह निवेश एक लाख 79 हजार 432 करोड़ रुपए हुआ तो 2019-20 में यह एक लाख 88 हजार 403 करोड़ रुपए हो गया। इस दौरान हर साल इक्विटी में निवेश बढ़ता गया। 2019-20 में इक्विटी में कुल निवेश 28,261 करोड़ रुपए रहा था। यही नहीं, ईपीएफओ ने मासिक आधार पर इक्विटी में निवेश बढ़ाया। 2015-16 में मासिक इक्विटी निवेश 646 करोड़ रुपए था जो 2019-20 में तीन गुना से ज्यादा बढ़कर 2,355 करोड़ रुपए हो गया।

तीन स्कीम्स का कुल कॉर्पस 6 लाख 33 हजार 713 करोड़ रुपए

ईपीएफओ की सालाना रिपोर्ट 2014-15 के अनुसार उसकी तीन स्कीमों का कुल कॉर्पस 6 लाख 33 हजार 713 करोड़ रुपए रहा है। यह बांड में निवेश किया गया जिस पर 8.3 प्रतिशत का रिटर्न मिलता रहा। ईपीएफओ के पास जो अभी पैसा आ रहा है, उसे डेट में निवेश किया जा रहा है। यहां पर ईपीएफओ को मार्केट के हिसाब से रिटर्न मिल रहा है जो लघु बचत योजनाओं द्वारा मिलता है। फिलहाल इक्विटी पोर्टफोलियो में 9,200 करोड़ रुपए का नुकसान है। हालांकि यह क्युमुलेटिव (बढ़ता हुआ नुकसान) है। सही नुकसान 27,000 करोड़ रुपए का है।

7 प्रतिशत के आस- पास रह सकता है ईपीएफ पर रिटर्न

माना जा रहा है कि इसका इक्विटी पोर्टफोलियो इस साल फरवरी में एक लाख 12 हजार करोड़ रुपए का था जो मार्च में घटकर 85 हजार 500 करोड़ रुपए हो गया। अगर ईपीएफओ के निवेश से ब्याज दर उसके अनुमान से कम होती है तो ईपीएफओ ब्याज दर को बनाए रखने के लिए रिजर्व में कमी कर सकता है। हालांकि इक्विटी से इसका नुकसान ज्यादा है। यदि इस आधार पर देखा जाए तो 2019-20 में इसका रिटर्न 7 प्रतिशत के आस पास रह सकता है।

यही नहीं, ईपीएफओ को यस बैंक, डीएचएफएल, आईएलएंडएफएस और एडीएजी ग्रुप के बांड्स की वजह से भी भारी नुकसान हुआ है।