8 करोड़ मजदूरों के लिए 3,500 करोड़ रुपए, राशन कार्ड की पोर्टबिलिटी और शहरों में सस्ते किराए पर मिलेगा आवास

  • अब असंगिठत क्षेत्र के कामगारों को भी मिलेगा नियुक्ति पत्र
  • राशन में 5 किलो गेहूं या चावल और एक किलो चना मिलेगा

दैनिक भास्कर

May 14, 2020, 10:37 PM IST

मुंबई.  वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने 20 लाख करोड़ रुपए के पैकेज के दूसरे दिन प्रवासी कामगारों के साथ अन्य मुद्दों पर फोकस किया। प्रवासी कामगारों को अगले दो महीनों तक राशन, राशन कार्ड की पोर्टबिलिटी और शहरी इलाकों में सस्ते किराये पर आवास मुहैया कराए जाएंगे।  
आज के ऐलान में किसे मिलेगा?
आज के ऐलान में वित्तमंत्री ने प्रवासी कामगारों पर फोकस किया है। उन्हें तीन तरीके से फायदा देने की बात कही गई है।

क्या मिलेगा?

इन तीन प्रमुख घोषणाओं में प्रवासी कामगारों को दो महीने तक राशन मुफ्त मिलेगा। इसके बाद उन्हें अब शहरों में सस्ते किराए पर आवास मिलेगा। तीसरा, उन्हें राशन कार्ड की पोर्टबिलिटी की सुविधा मिलेगी। प्रवासी कामगारों के रहने और खाने की सुविधा पर पूरी तरह से फोकस किया गया है।

कब मिलेगा और कैसे मिलेगा?

इस ऐलान के तहत प्रवासी कामगारों को अगले दो महीने तक राशन मिलेगा। इसे राज्य सरकारें पीडीएस प्रणाली के तहत कामगारों को दे सकती हैं। राशन में 5 किलो गेहूं या चावल और एक किलो चना मिलेगा। यह राशन दुकानों से लिया जा सकता है। जहां तक सस्ते किराये के घर का मामला है, उसके बारे में अभी दिशा निर्देश आएगा और सभी लोगों से बात करके आगे इसे अंजाम दिया जाएगा। पोर्टबिलिटी के लिए भी अभी दिशा निर्देश का इंतजार किया जाएगा 

8 करोड़ प्रवासी कामगारों पर 3,500 करोड़ रुपए खर्च होगा

वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि प्रवासी मजदूरों को दो महीने के लिए मुफ्त में राशन दिया जाएगा। इसमें चाहे किसी के पास राशन कार्ड हो या ना हो, सभी को 5 किलो चावल या गेहूं, एक किलो चना दिया जाएगा। इस योजना का लाभ 8 करोड़ प्रवासी कामगारों को होगा। इस पर सरकार 3,500 करोड़ रुपए खर्च करेगी। इसे लागू करने की जिम्मेदारी राज्य सरकारों की है। इसी तरह अब मोबाइल नंबर की तरह राशन कार्ड की पोर्टबिलिटी देश में कहीं भी हो सकती है। यानी आप दूसरे राज्य से जाकर दूसरे राज्य में राशन कार्ड को ट्रांसफर करा सकते हैं और इसका लाभ वहां की किसी भी राशन दुकानों से ले सकते हैं। यह वन नेशन वन राशन कार्ड योजना के तहत होगा।

23 राज्यों में 83 प्रतिशत आबादी पीडीएस के तहत कवर

वित्तमंत्री ने कहा कि अभी तक 23 राज्यों में 83 प्रतिशत आबादी पीडीएस के तहत कवर हो चुकी है और अगले साल मार्च तक यह 100 प्रतिशत कवर हो जाएगा।इसी तरह किसी दूसरे शहर में अगर कोई प्रवासी कामगार काम करने जाता है तो वहां पर उसे सस्ते किराये में आवास मिलेगा। यानी सरकार स्थानीय सरकार, संस्थाओं, उद्योगपतियों के साथ मिलकर पीपीपी मॉडल पर इस तरह के आवासों का निर्माण करेगी। यह प्रोजेक्ट अफोर्डेबल रेंटल हाउसिंग कांपलेक्स (एआरएचसी) के रूप में जाना जाएगा।

अगर इस समय कोई सरकारी आवास किराए पर है तो उसे उपयोग में लाया जा सकता है

अगर इस समय भी कहीं सरकार के कोई आवास हैं तो उसका लाभ अभी से लिया जा सकता है। यह योजना पीएम आवास योजना के तहत चलेगी। यह योजना शहरी गरीबों और प्रवासी कामगारों दोनों के लिए होगी। केंद्र सरकार इसके लिए घरों का निर्माण करनेवालों को इंसेंटिव देगी। उदयोगपति चाहे तो अपनी जमीन पर भी इसका निर्माण कर सकता है। इसके लिए जल्द ही दिशा निर्देश जारी किए जाएंगे। ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए काफी कदम उठाए गए हैं।

25 लाख किसानों को क्रेडिट कार्ड जारी 

वित्त मंत्री ने कहा कि हमने 25 लाख किसानों को क्रेडिट कार्ड प्रदान किए हैं। बेशक लॉक डाउन तो जारी है लेकिन हमारी सरकार दिन-रात जी तोड़ मेहनत कर रही है। राज्यों ने किसानों को 6700 करोड रुपए की मदद दी। कृषि उत्पादों के जरिए राज्यों ने किसानों की मदद की। फसल कर्ज की अदायगी की समय सीमा भी हमने बढ़ाई है। वित्त मंत्री ने कहा कि 30 अप्रैल तक कृषि के क्षेत्र में 63 करोड़ लोगों को लोन दिया गया है जो 86,600 करोड़ रुपए रहा है।

बेरोजगारों को तीन समय का भोजन दिया जा रहा है

वित्तमंत्री ने कहा कि बेगर लोगों को फिलहाल 3 समय का खाना दिया जा रहा है। राज्यों को प्रवासी मजदूरों को काम देने को कहा गया है और अब तक 2.33 करोड मजदूरों को उनके ही पंचायत क्षेत्र में काम दिया गया है। 11000 करोड़ आपदा राहत फंड के माध्यम से केंद्र सरकार ने राज्यों को दिया है ताकि उनका इस्तेमाल किया जा सके। न्यूनतम वेतन का लाभ 30 प्रतिशत ही मजदूर पाते हैं। न्यूनतम वेतन अब पूरे देश में एक समान होगा। क्षेत्रीय असमानता को खत्म किया जाएगा वेतन के संदर्भ में नेशनल फ्लोर वेज तय किए जाएंगे। न्यूनतम वेतन का सरलीकरण किया जाएगा।

मनरेगा के तहत अब मजदूरी 202 रुपए

राज्यों को कहा गया है कि वह अपने राज्यों में लौटे मजदूरों का ख्याल करें और उन्हें काम दें। मजदूरों की दिहाड़ी 182 रुपए से बढ़ाकर अब 202 रुपए कर दी गई है। मजदूरों को सालाना हेल्थ चेकअप के लिए बाध्य किया जाएगा। उनकी भर्ती किसी एजेंसी के कांट्रैक्ट के जरिए नहीं होगी। अब उनकी भर्ती सीधे की जाएगी। जो प्रवासी मजदूर राज्य में पहुंचे हैं उन मजदूरों की सूची बनाई गई है। साथ ही मजदूरों के एनरोलमेंट में काफी तेजी आई है। अगर मई 2019 में यह 100 मजदूरों की संख्या थी तो अब यह 140-150 हो गई है।

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