45 लाख एमएसएमई के लिए 3 लाख करोड़ रुपए के पैकेज का ऐलान: जानिये इसका फायदा किसे, कितना, कब और कैसे मिलेगा?

  • बैंक आरबीआई के नोटिफिकेशन के बाद लोन देंगे
  • अब एमएसएमई के लोन पर गारंटी केंद्र सरकार देगी
  • 18 लाख करोड़ रुपए है एमएसएमई का लोन बुक

दैनिक भास्कर

May 14, 2020, 12:13 AM IST

मुंबई. केंद्र सरकार ने देश के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों (एमएसएमई) के लिए 3 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का पैकेज घोषित कर दिया है। यह पैकेज कैसे दिया जाएगा, कब दिया जाएगा, किसे दिया जाएगा, हम इसे समझने की कोशिश करते हैं। इस बारे में हमने देश के दो बड़े बैंकों एसबीआई और बैंक ऑफ बड़ौदा के चीफ इकोनॉमिस्ट से बात की। फिलहाल एमएसएमई को दिए जानेवाले कुल लोन बुक का साइज 18 लाख करोड़ रुपए की है।

इन दोनों बैंकों के पास एमएसएमई के सबसे ज्यादा कस्टमर हैं। हालांकि, एमएसएमई को पैकेज जारी करने के लिए अब मामला आरबीआई के पाले में है। जब तक आरबीआई नोटिफिकेशन जारी नहीं करेगा, तब तक एमएसएमई को लोन मिलना मुश्किल है।

यह लोन किसके लिए है ?

यह लोन एमएसएमई सेक्टर की कंपनियों के लिए है। उन कंपनियों के लिए जो सर्विस सेक्टर में हैं या मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में। हर तरह की एमएसएमई ये लोन हासिल कर सकती हैं। कंपनी छोटी होगी तो भी उसे लोन में कोई दिक्कत नहीं होगी।

कब लोन मिलेगा और कैसे?

लोन पाने के लिए कंपनियों को बैंकों के पास अप्लाई करना होगा। कंपनियां चाहें तो इस समय लॉकडाइन में ही अप्लाई कर सकती हैं। बैंकों के पास इस समय ज्यादा लिक्विडिटी है। अप्लाई करने के बाद उन्हें लोन मिलेगा। हालांकि इससे पहले आरबीआई के नोटिफिकेशन का इंतजार होगा।

यह स्कीम कब तक रहेगी और क्या फायदा होगा?

यह स्कीम फिलहाल 31 अक्टूबर तक रहेगी। जिन कंपनियों को लोन लेना है, वे इस स्कीम के तहत 31 अक्टूबर से पहले आवेदन कर सकती हैं। फायदे की बात करें तो एमएसएमई को दिए जाने वाले सभी लोन की गारंटी अब केंद्र सरकार ने ली है। इसलिए बैंक अब दिल खोलकर लोन देंगे।

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किस रूप में मिलेगा यह लोन?

यह लोन एमएसएमई को वर्किंग कैपिटल के रूप में मिलेगा। साथ ही एक्सट्रा  कैपिटल की जरूरत होगी तो भी उन्हें लोन मिलेगा। चूंकि परिभाषा बदल दी गई है, इसलिए इस लोन से और राहत इन कंपनियों को मिलेगी।

कंपनियों की बकाया राशि का क्या होगा?

सरकार ने साफ कर दिया है कि एमएसएमई के जो भी पेमेंट बकाया हैं, वह 45 दिनों के अंदर मिलेंगे। यानी अगले 45 दिनों में अगर यह पेमेंट आ जाता है तो इन कंपनियों को दोहरा फायदा होगा। क्योंकि ज्यादा दिक्कत पेमेंट साइकल को लेकर इन कंपनियों को होती है।  

एमएसएमई को इस समय लोन की जरूरत है?

हां, इस समय एमएसएमई को लोन की जरूरत है। क्योंकि महिंद्रा और मारुति जैसी कंपनियों ने अपने प्रोडक्शन शुरू कर दिए हैं। चौथे लॉकडाउन में काफी राहत दिए जाने की संभावना है। ऐसे में अर्थव्यवस्था को चलाने और कंपनियों को कारोबार करने के लिए पूंजी की जरूरत होगी। अगर यह दोनों साथ चलते हैं तो सरकार को आनेवाले दिनों में टैक्स और अन्य फायदे मिल सकते हैं।

कंपनियों के शुरू होने के साथ ही मांग बढ़ेगी

बैंक ऑफ बड़ौदा के चीफ इकोनॉमिस्ट समीर नारंग कहते हैं कि एमएसएमई को दिया गया पैकेज बहुत बेहतर पैकेज है। इससे देश में 45 लाख एमएसएमई को फायदा मिलेगा। यानी करीबन 3 लाख एमएसएमई हमारे ग्राहक हैं उन्हें भी सीधे फायदा मिलेगा। वे कहते हैं कि बैंक चाहेंगे कि आसानी से एमएसएमई को लोन मिले, इसलिए यह बहुत अच्छा कदम बैंकों के लिए भी है। उन्होंने कहा कि चूंकि महिंद्रा और मारुति जैसी कंपनियों ने उत्पादन शुरू किया है, इसलिए एसएमई का काम शुरू हो जाएगा। एक कंपनी के शुरू होने से 2,500 एमएसएमई को फायदा होता है। क्योंकि इसमें ढेर सारे काम होते हैं।

आरबीआई के नोटिफिकेशन के बाद मिलेगा लोन

नारंग ने कहा कि चूंकि गाइडलाइंस आई हैं और वित्तमंत्री ने घोषणा की है। पर अंतिम नोटिफिकेशन आरबीआई से बैंकों को आएगा। यह नोटिफिकेशन हो सकता है कि इसी हफ्ते आ जाए या फिर जून में मौद्रिक नीति के दौरान आरबीआई जारी करे। इसका नोटिफिकेशन जल्दी जारी करना होगा। क्योंकि यह स्कीम केवल 31 अक्टूबर तक ही है। उन्होंने कहा कि चूंकि सिक्योरिटीज का एक फिक्स्ड कॉस्ट है, इसलिए इस घोषणा से एसएमई को आनेवाले दिनों में अच्छा लाभ मिलेगा।

यह विन-विन सिचुएशन है- एसबीआई के मुख्य अर्थशास्त्री

एसबीआई के मुख्य अर्थशास्त्री सौम्याकांति घोष ने कहा कि आज जो पैकेज जारी हुआ है, उसका सपोर्ट कल आएगा। लेकिन यह पैकेज बहुत ही बेहतर है। जिस तरह से एमएसएमई की परिभाषा को बदला गया है, यह विन विन सिचुएशन है। यह मामला संसद में लंबित लेकिन अब यह पास हो चुका है। अब बैंक अपने स्तर पर एमएसएमई की पहचान कर उन्हें आसानी से कर्ज दे सकेंगे।

वेल टार्गेटेड पैकेज है यह

घोष ने कहा कि यह पूरी तरह से वेल टार्गेटेड पैकेज है। इसका इंपैक्ट बहुत अच्छा दिखेगा। चूंकि एमएसएमई को दिए जानेवाले लोन की गारंटी सरकार ने ली है, इसलिए बैंकों को लोन देने में अब कोई दिक्कत नहीं है। प्रोडक्शन पर सरकार ने ज्यादा ध्यान दिया है। उनका कहना है कि 3 लाख करोड़ रुपए के लोन पर अगर यह मान लिया जाए कि 30 हजार करोड़ रुपए की गारंटी होती है तो यह सरकार को देनी है। बैंक अभी तक इसलिए लोन देने में थोड़ा हिचकते थे। उनके मुताबिक इस कदम से फाइनेंशियल बाजार को मजबूती मिलेगी।

वर्किंग कैपिटल की समस्या खत्म होगी

एमएसएमई के लिए मर्चेंट बैंकर का काम करनेवाले पैंटोमैथ कैपिटल एडवाइजर्स के एमडी महावीर लुनावत कहते हैं कि इससे वर्किंग कैपिटल को मजबूती मिलेगी। एमएसएमई को वर्किंग कैपिटल की बहुत जरूरत होती है। इसलिए यह पैकेज बहुत ही अच्छा और राहत भरा पैकेज है। यह काफी समय से लंबित था और इस समय मिलना और भी अच्छा है।

राहत पैकेज के प्रमुख अंश-

एमएसएमई, कुटीर व गृह उद्योग के लिए 3 लाख करोड़ रुपए का कोलैटरल मुक्त ऑटोमैटिक लोन की सुविधा। 45 लाख छोटी कारोबारी गतिविधियों को इसका लाभ मिलेगा और इससे कर्मचारियों को रोजगार की सुरक्षा मिलेगी। 25 करोड़ रुपए तक बकाए और 100 करोड़ रुपए तक के टर्नओवर वाली इकाइयों को ये लोन मिलेंगे। कारोबारी इकाई पर 29 फरवरी 2020 तक जितना बकाया था, उसका अधिकतम 20 फीसदी सरल लोन के रूप में इन इकाइयों को बैंक और एनबीएफसी से मिलेगा। लोन का भुगतान 4 साल में करना होगा।बेहतर काम कर रहे एमएसएमई में निवेश के लिए फंड ऑफ फंड बनेगा। एमएमसएमई में 50 हजार करोड़ रुपए की इक्विटी का होगा निवेश। 10 हजार करोड़ रुपए के साथ बनेगा कोष।

परिभाषा बदलने से होगा ज्यादा कंपनियों को फायदा

एमएसएमई की परिभाषा एममएसएमई के हित में बदली। ताकि आकार बढ़ने के बाद भी एमएसएमई को लाभ मिलता रहे। इसलिए एमएसएमई में निवेश सीमा बढ़ी। मैन्यूफैक्चरिंग और सेवा क्षेत्र के एमएसएमई में अंतर को समाप्त कर दिया गया। पहले 25 लाख के निवेश को माइक्रो यूनिट कहा जाता था। अब 1 करोड़ तक के निवेश के बाद भी माइक्रो यूनिट बने रहेंगे। सेवा में भी माइक्रो यूनिट के लिए निवेश सीमा को बढ़ाकर 1 करोड़ कर दिया गया। 5 करोड़ रुपए के टर्नओवर के बाद भी माइक्रो यूनिट बने रहेंगे।स्मॉल के लिए निवेश की सीमा 10 करोड़ रुपए और टर्नओवर की सीमा बढ़ाकर 50 करोड़ रुपए कर दी गई। मीडियम एंटरप्राइज के लिए निवेश की समी बढ़ाकर 20 करोड़ रुपए और टर्नओवर की सीमा बढ़ाकर 100 करोड़ रुपए कर दी गई।

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