25 फीसदी कर्मचारियों की शेयरचैट करेगी छंटनी, प्रभावित कर्मचारियों के पास 2 महीने का गार्डन लीव या चार महीने के लिए आधा वेतन लेने का विकल्प होगा

  • प्रभावित कर्मचारियों को शेयरचैट साल के अंत तक स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी भी प्रदान करता रहेगा
  • कोविड-19 महामारी चलते आर्थिक मंदी ने विज्ञापन बाजार को गंभीर रूप से चोट पहुंचाई है

दैनिक भास्कर

May 20, 2020, 03:08 PM IST

नई दिल्ली. भारत के लोकप्रिय सोशल मीडिया एप्लीकेशन शेयरचैट अपने वर्कफोर्स के 25 फीसदी कर्मचारियों की छंटनी करने जा रही है। कंपनी ने यह फैसला कोविड-19 महामारी और स्थानीय बाजार की अनिश्चितताओं के कारण लिया है। ट्विटर-समर्थित फर्म ने बुधवार सुबह कर्मचारियों को एक ईमेल भेजा। इसमें उन्हें लागत में कटौती के विभिन्न उपायों के बारे में बताया है। बेंगलुरु आधारित कंपनी के पास इस समय करीब 60 मिलियन से ज्यादा मासिक एक्टिव यूजर्स हैं और इसका लक्ष्य साल’ 2020 दिसंबर तक यूजर्स की संख्या दोगुना करना है।

विज्ञापन का मार्केट अप्रत्याशित रहेगा

शेयरचैट के सीईओ अंकुश सचदेवा द्वारा कर्मचारियों को भेजे गए एक ईमेल के अनुसार, इस साल विज्ञापन का मार्केट अप्रत्याशित रहेगा। सचदेवा ने कहा, ‘ऐसे में हमें अपने कोर प्रोडक्ट्स पर ज्यादा ध्यान देना होगा। साथ ही कंपनी को ग्रोथ को लेकर नई रणनीति के तहत काम करना होगा। सचदेवा ने अपने मेल में कर्मचारियों से माफी मांगते हुए कहा, ‘मौजूदा संकट के कारण हमें यह फैसला लेना पड़ रहा है। कृपया मेरी क्षमायाचना स्वीकार करें, क्योंकि हम यह सुनिश्चित नहीं कर पाए कि आपमें से हर कोई इस यात्रा को जारी रखें।’

कर्मचारियों को दिए गए दो विकल्प

कंपनी के बयान के मुताबिक, कंपनी करीब 101 कर्मचारियों की छंटनी कर रही है। छंटनी से प्रभावित कर्मचारियों के पास 2 महीने का-गार्डन लीव या चार महीने के लिए आधी सैलरी लेने का विकल्प होगा। इसके अलावा शेयरचैट साल के अंत तक स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी भी प्रदान करता रहेगा। बता दें कि गार्डन लीव का मतलब है कि या तो कर्मचारी खुद रिजाइन कर दे या कंपनी उसे टर्मिनेट कर देगी।

कंपनी को हुआ था 414.7 करोड़ रुपए का नुकसान

कोविड-19 महामारी चलते आर्थिक मंदी ने विज्ञापन बाजार को गंभीर रूप से चोट पहुंचाई है। शेयरचैट को वित्त वर्ष 2018-19 में 414.7 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ था। हालांकि, वित्त वर्ष  2019-20 में शेयरचैट का राजस्व कई गुना बढ़कर 25.8 करोड़ रुपए पर पहुंच गया है जो इससे पिछले वित्त वर्ष में 1.7 करोड़ रुपए था।

अन्य कंपनियां भी कर रही है छंटनी

शेयरचैट के अलावा फूड-टेक की बड़ी कंपनियों स्विगी ने 1100 कर्मचारियों की छंटनी की है वहीं जौमेटो ने 500 से अधिक कर्मचारियों को निकालने का फैसला लिया है। जबकि ट्रीबो, फैब, मेकमायट्रिप, ट्रैवेलटंगल जैसी हॉस्पिटैलिटी फर्मों ने अपने कार्यबल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा निकाल दिया। Livspace ने हाल ही में अपने कुल हेडकाउंट का 15% निकाल दिया। विशेषज्ञों का मानना ​​है कि लॉकअप के चौथे चरण के समाप्त होने पर कई कंपनियां छंटनी जैसी लागत में कटौती की घोषणा करेंगी।