20 लाख करोड़ के भारी-भरकम पैकेज में भी खाली हाथ रहा टेलीकॉम सेक्टर, सीओएआई ने जताई नाराजगी

  • लाइसेंस फीस और स्पेक्ट्रम यूसेज फीस को तर्कसंगत बनाने की मांग कर रही टेलीकॉम इंडस्ट्री
  • सीओएआई को उम्मीद- सरकार इंडस्ट्री की मांगों पर भविष्य में जरूर गौर करेगी

दैनिक भास्कर

May 17, 2020, 04:30 PM IST

नई दिल्ली. केंद्र सरकार ने कोरोना आपदा से निपटने के लिए 20 लाख करोड़ रुपए से अधिक के भारी-भरकम राहत पैकेज का ऐलान कर दिया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस मेगा राहत पैकेज की विस्तार से जानकारी दे दी है। रविवार को इस पैकेज की अंतिम किस्त की जानकारी दी गई, जिसमें कुल 8 घोषणाएं की गईं। इसमें मनरेगा, स्वास्थ्य, कारोबार, कंपनी एक्ट, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइजेज और राज्य सरकारों से जुड़ी घोषणाए शामिल थीं।

टेलीकॉम सेक्टर के लिए कुछ नहीं

केंद्र सरकार की ओर से घोषित किए गए मेगा राहत पैकेज में डिफेंस, कोल, पावर, हेल्थ, ऐजुकेशन, फार्मा समेत अधिकांश सेक्टरों के लिए हजारों-लाखों करोड़ रुपए की घोषणाएं की गई हैं। सबसे ज्यादा फोकस माइक्रो, स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज (एमएसएमई) सेक्टर पर फोकस किया गया है। इस सेक्टर को 3 लाख करोड़ रुपए की लोन क्रेडिट गारंटी के अलावा कई अन्य उपायों की घोषणा की गई है। लेकिन कर्ज के बोझ तले दबे टेलीकॉम सेक्टर के लिए इस मेगा राहत पैकेज में कोई घोषणा नहीं की गई है। टेलीकॉम सेक्टर के लिए इस पैकेज में कोई प्रावधान नहीं किया गया है।

सीओएआई ने जताई नाराजगी

सेल्यूलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीओएआई) ने इस मेगा राहत पैकेज में टेलीकॉम सेक्टर के लिए कुछ भी प्रावधान नहीं करने पर नाराजगी जताई है। सीओएआई ने कहा कि टेलीकॉम इंडस्ट्री लंबे समय से लाइसेंस फीस और अन्य लेवी में कटौती की मांग करती आ रही है लेकिन वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस सेक्टर के लिए किसी भी उपाय की घोषणा नहीं की है।

हमारी मांगों पर गौर करेगी सरकार: राजन

सीओएआई के डायरेक्टर जनरल राजन मैथ्यूज ने कहा कि हम इस सेक्टर के लिए कुछ राहत की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन सरकार ने हमें निराश किया है। राजन ने कहा कि हमें अभी भी विश्वास है कि सरकार हमारी मांगों पर विचार करेगी।

टेलीकॉम सेक्टर की प्रमुख मांगें

1- लाइसेंस फीस और स्पेक्ट्रम यूसेज चार्ज को तर्कसंगत बनाना।

2- सांविधिक लेवी में कटौती।

3- 35 हजार करोड़ रुपए के जीएसटी इनपुट टैक्स क्रेडिट का भुगतान।