2 साल में सोने की कीमतें 68000 रुपए के पार जाने का अनुमान, एक्सपर्ट बोले- इसमें निवेश फायदे का सौदा

  • बुधवार को गोल्ड फ्यूचर की कीमतें 48,589 रुपए प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड हाई उच्च स्तर पर पहुंच गई थीं
  • सोने की कीमतें अगले एक से दो महीने में 50 से 51 हजार रुपए के स्तर को छू सकती हैं

दैनिक भास्कर

Jun 25, 2020, 04:37 PM IST

मुंबई. सोने की कीमतों में पिछले कुछ दिनों से उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। हालांकि, एनालिस्ट का कहना है कि आने वाले दिनों में सोने की कीमतों में बढ़त देखन को मिलेगी। अगले 2 साल में सोने की कीमतें 68,000 रुपए तक जा सकती हैं।

बुधवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर अगस्त गोल्ड फ्यूचर की कीमतें 48,589 रुपए प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड हाई उच्च स्तर पर पहुंच गई थीं। व्यापारियों को लाभ देने के साथ ये 48,232 रुपए पर बंद हुआ था।

ग्लोबल मार्केट में हाजिर सोना 0.3 प्रतिशतक बढ़कर 1,772.43 डॉलर प्रति औंस हो गया था। इससे पहले अक्टूबर 2012 में सोने की कीमतें 1,779.06 डॉलर प्रति औंस तक पहुंची थीं।

सोने की कीमतों पर एक्सपर्ट की राय
एंजेल ब्रोकिंग के अनुज गुप्ता का कहना है कि गोल्ड में आने वाले दिनों में अच्छी तेजी दिख सकती है। ट्रेंड पॉजिटिव बना हुआ है। दुनियाभर में जियोपॉलिटिकल टेंशन बना हुआ है जिससे गोल्ड की कीमतें अभी और ऊपर जाने की उम्मीद है। उनके मुताबिक सोने की कीमतें अगले एक से दो महीने में 50 से 51 हजार रुपए के स्तर को छू सकती हैं।

मोतीलाल ओसवाल कमोडिटी एक्सपर्ट किशोर नारणे ने बताया कि अगले 18-24 महीने में गोल्ड की कीमतें 65-68,000 को पार कर सकती हैं, लेकिन उनका मानना है कि ये रुपया बनाम डॉलर पर भी निर्भर करेगा। सोने में निवेश फायदे का सौदा हो सकता है।

गोल्ड निवेश में होगा फायदा
जब भी शेयर बाजार या दूसरे निवेश में मंदी आती है तो गोल्ड में तेजी देखने को मिलती है। यही वजह है कि गोल्ड को सुरक्षित निवेश के रूप में देखा जाता है। डर की वजह से निवेशक सोन में निवेश करना शुरू कर देते हैं जिससे सोने की कीमतों में बढ़त आ जाती है। मांग बढ़ने से सोने की कीमत तेजी से बढ़ती हैं। कोविड-19 महामरी के वजह से दुनियाभर के बाजारों में अस्थिरता बनी हुई है।

आईएमएफ का पूर्वानुमान

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने बुधवार को भारतीय अर्थव्यवस्था में 4.5 फीसदी तेजी के साथ गिरावट का अनुमान लगाया है। कोविड-19 महामारी की वजह से इस ऐतिहासिक गिरावट का अनुमान लगाया गया है। हालांकि, आईएमएफ ने साल 2021 में अर्थव्यवस्था के फिर से पटरी पर लौटने की उम्मीद जताई है, इसमें विकास दर के 6 फीसदी रहने का अनुमान है।

आईएमएफ ने 2020 में वैश्विक विकास दर को निगेटिव 4.9% बताया है। अप्रैल 2020 में विश्व आर्थिक आउटलुक (WEO) का पूर्वानुमान 1.9 प्रतिशत अंक कम होने का अनुमान लगाया है।