2 माह में मॉल्स को 90 हजार करोड़ रुपए का हुआ नुकसान, 500 से अधिक शॉपिंग सेंटर्स हो सकते हैं बंद, एससीएआई ने मांगी राहत

  • अधिकांश मॉल एसएमई या स्टैंडअलोन डेवलपर्स का हिस्सा हैं
  • पिछले दो माह से लाॅकडाउन के कारण देशभर के माॅल्स बंद हैं

दैनिक भास्कर

May 26, 2020, 04:18 PM IST

नई दिल्ली. कोविड-19 महामारी को रोकने के लिए पिछले 61 दिनों से लागू देशव्यापी लाॅकडाउन में सभी माॅल्स बंद हैं। इस बीच शॉपिंग सेंटर उद्योग को काफी नुकसान हुआ है। माॅल बंद होने के कारण इस इंडस्ट्री को पिछले दो माह में करीब 90 हजार करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। इसकी जानकारी शॉपिंग सेंटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एससीएआई) ने दी है। एससीएआई ने कहा कि इस सेक्टर को रेपो रेट कटौती और आरबीआई द्वारा विस्तारित ऋण स्थगन से अधिक की जरूरत है। उद्योग मंडल ने एक बयान में कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा किए गए राहत उपाय उद्योग की लिक्विडिटी की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।

सिर्फ बड़े शहरों में ही नहीं है मॉल्स

एससीएआई के अनुसार, ‘एक आम गलतफहमी है कि शॉपिंग सेंटर का उद्योग केवल बड़े डेवलपर्स, निजी इक्विटी खिलाड़ियों और विदेशी निवेशकों के निवेश के साथ महानगरों और बड़े शहरों के आसपास ही केंद्रित है।’ हालांकि, अधिकांश मॉल एसएमई या स्टैंडअलोन डेवलपर्स का हिस्सा हैं। यानी 550 से अधिक एकल स्टैंडअलोन डेवलपर्स के स्वामित्व वाले हैं, जो देश भर में 650-संगठित शॉपिंग सेंटरों से बाहर हैं और छोटे शहरों में ऐसे 1,000 से अधिक छोटे केंद्र हैं।

कई मॉल डेवलपर्स की दुकानें बंद हो सकती हैं

एससीएआई के अध्यक्ष अमिताभ तनेजा ने कहा कि संगठित खुदरा उद्योग संकट में है और लॉकडाउन के बाद से कुछ भी कमाई नहीं हुई है। ऐसे में उनका अस्तित्व दांव पर लगा हुआ है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र को पुनर्जीवित करने के लिए सरकार की लंबे समय तक के लिए लाभकारी योजना की बहुत ज्यादा आवश्यकता है। तनेजा ने कहा है कि लाॅकडाउन में छूट होने के बाद भी मॉल्स को खोलने की अनुमति नहीं दी गई है, जिससे कई लोगों की नौकरी छूट जाएगी और बहुत सारे मॉल डेवलपर्स की दुकानें बंद हो सकती हैं।

500 से अधिक शॉपिंग सेंटर्स बंद होने की कगार पर

केंद्र और भारतीय रिजर्व बैंक को दिए गए अपने आवेदन में संघ ने यह भी बताया है कि आरबीआई से वित्तीय पैकेज और प्रोत्साहन के अभाव में 500 से अधिक शॉपिंग सेंटर्स बंद हो सकते हैं, जिससे बैंकिंग उद्योग का 25,000 करोड़ रुपए एनपीए हो सकता है।