13 तिमाहियों के बाद प्रॉफिट में आने पर आरबीआई के पीसीए के दायरे से बाहर निकल सकता है आईडीबीआई बैंक

  • आरबीआई के तीन पैमानों में से दो पर आईडीबीआई इस समय फिट है
  • बैंक ने एनपीए में किसी भी बढ़ोतरी के खिलाफ खुद को मजबूत किया है

दैनिक भास्कर

Jun 01, 2020, 03:58 PM IST

मुंबई. 13 तिमाहियों में पहली बार लाभ में आने के बाद आईडीबीआई बैंक भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के प्रतिबंधात्मक त्वरित कार्रवाई (पीसीए) ढांचे से बाहर निकलने के करीब पहुंच गया है। हालांकि बैंक को इसलिए लाभ हुआ क्योंकि प्रोविजन का राइट ऑफ किया। बैंक का कहना है कि इसका वित्तीय अनुपात काफी हद तक अच्छा है। इसलिए पीसीए से बाहर जल्द ही आने का हकदार है।

हाल में कई बैंकों को पीसीए से बाहर किया गया है 

बता दें कि हाल के समय में मुनाफा नहीं कमाने के बावजूद कुछ अन्य बैंकों को पीसीए से बाहर लाया गया। आईडीबीआई बैंक के डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर सुरेश खटानहार ने कहा कि अब हमने सभी मापदंडों पर अच्छा प्रदर्शन किया है और लाभ की स्थिति में आ गए हैं। अब केवल परिसंपत्तियों के रिटर्न (आरओए) में हमें सुधार करना होगा। उन्होंने कहा कि हम आरबीआई को पत्र लिखकर पीसीए प्रतिबंधों से बाहर आने के लिए अपील करेंगे।

आईडीबीआई मई 2017 से पीसीए में है

किसी भी बैंक का पीसीए तब शुरू होता है जब बैंक का पूंजी पर्याप्तता अनुपात (capital adequacy ratio ) 10.25 प्रतिशत से नीचे, शुद्ध एनपीए 6 प्रतिशत से ऊपर और आरओए लगातार दो साल से नकारात्मक होता है। पीसीए के तहत बैंकों को पूंजी संरक्षण और लाभांश भुगतान, शाखा विस्तार, प्रबंधन मुआवजा और क्रेडिट ग्रोथ पर प्रतिबंध का सामना करना पड़ता है। आईडीबीआई मई 2017 के बाद से पीसीए के अधीन है।

मार्च तिमाही में 135 करोड़ का मुनाफा कमाया

शनिवार को जारी वित्तीय परिणाम से पता चलता है कि 13.31 प्रतिशत की पूंजी पर्याप्तता (capital adequacy) और 4.19 प्रतिशत के शुद्ध एनपीए के साथ बैंक ने पीसीए से बाहर निकलने के लिए तीन मापदंडों में से दो को पूरा किया है। इस बैंक ने एक साल पहले 4,918 करोड़ रुपए के नुकसान से मार्च 2020 को समाप्त तिमाही में 135 करोड़ रुपए का मुनाफा कमाया है। एलआईसी के स्वामित्व वाला निजी निजी बैंक आरओए पर खरा नहीं उतरता है।

बैंक का आरओए अभी भी निगेटिव है

मार्च 2020 के अंत में बैंक का आरओए -4.26 प्रतिशत था जो कि एक साल पहले -4.68 प्रतिशत था। जिसका अर्थ है कि इसमें अभी भी नकारात्मक आरओए के लगातार दो साल बाकी है। हालांकि आईडीबीआई बैंक के अधिकारियों का तर्क है कि आरओए एक वार्षिक गणना है और आरबीआई को अपनी स्थिति में बदलाव में देरी करने से नहीं रोकना चाहिए। उन्होंने कहा कि अन्य बैंकों की हालत बदतर रही है। फिर भी हमने अच्छा काम किया है।

बैंक ने प्रावधान में राइट बैक किया

खतनहार ने कहा कि सरकार द्वारा पूंजी देने के बाद पिछले साल बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स, इलाहाबाद बैंक और कॉरपोरेशन बैंक पीसीए से बाहर आ गए थे। मार्च में समाप्त तिमाही में, आईडीबीआई बैंक एनपीए प्रावधानों में 1,511 करोड़ रुपए के राइट बैक के कारण मुनाफे में आया है। हालांकि नेट इंटरेस्ट मार्जिन 46 प्रतिशत बढ़ा, जबकि एक साल पहले यह मार्जिन 2.26 प्रतिशत से 3.80 प्रतिशत तक बढ़ गया था।

प्रोविजन कवरेज रेशियो 93 प्रतिशत है

राइट बैक, रिकवरी और अपग्रेड ने पिछली 12 तिमाहियों में घाटा कम करने में मदद की है। हमारा प्रावधान कवरेज अनुपात 93 प्रतिशत है। इसका अर्थ है कि हमने लगभग सभी पुरानी परिस्थितियों के लिए प्रावधान किया है। आईडीबीआई बैंक के सीएफओ अजय शर्मा ने कहा, 47,272 करोड़ रुपए के सकल एनपीए में से हमने 41,833 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है जो हमें अच्छी स्थिति में रखता है। हालांकि विश्लेषकों ने कहा कि बैंक की रिकवरी प्रक्रिया अभी भी चल रही है।

बैंक का रिटेल लोन बुक 56 प्रतिशत है

एक विश्लेषक ने कहा कि कोविड-19 संकट के बाद डिफॉल्ट के जोखिम बढ़ गए हैं और इस बैंक में एनपीए का इतिहास रहा है। हालांकि इसमें से ज्यादातर के लिए 27 प्रतिशत सकल एनपीए का प्रावधान किया गया है, पर इस स्तर पर इतने बड़े बदलाव के बारे में विश्वास करना बहुत मुश्किल है। खतनहार ने माना कि कोविड-19 प्रकोप के कारण जोखिम हैं, लेकिन रिटेल बुक्स के 56 प्रतिशत के साथ, जिनमें से अधिकांश वेतनभोगी ग्राहकों के लिए होम लोन है। बैंक ने एनपीए में किसी भी बढ़ोतरी के खिलाफ खुद को मजबूत किया है।