हिंदुस्तान यूनिलीवर सहित 90 कंपनियों ने सोशल मीडिया पर विज्ञापन को बंद किया, फेसबुक को सबसे ज्यादा रेवेन्यू का नुकसान

  • विज्ञापन रोकने की खबर से फेसबुक का शेयर 8.3 प्रतिशत गिरा
  • ट्वीटर पहले से ही फैक्ट चेक करने वाले लेबल का ले रहा है सहारा

दैनिक भास्कर

Jun 27, 2020, 06:32 PM IST

मुंबई. अमेरिका में श्वेत श्याम (ब्लैक एंड व्हाइट) का मुद्दा पूरी दुनिया में छाया है। अब सोशल मीडिया का रेवेन्यू इसकी चपेट में है। करीबन 90 कंपनियों ने सोशल मीडिया पर अपने एडवर्टाइज बंद कर दी हैं। इसमें सबसे ज्यादा नुकसान फेसबुक को हुआ है। सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक के आलोचक हमेशा निंदा करते रहते हैं कि यह घृणास्पद माहौल को टालने में विफल रहा है।

इंस्टाग्राम, ट्वीटर, फेसबुक सभी पर विज्ञापन की रोक

शुक्रवार को एक जबरदस्त समर्थन उन्हें मिला। दुनिया के सबसे बड़े एडवर्टाइजर्स एचयूएल ने कहा कि अब फेसबुक की प्रॉपर्टीज पर विज्ञापन देना वह बंद कर रहा है। पिछले कुछ हफ्तों में 90 कंपनियों ने फेसबुक, इंस्टाग्राम और ट्विटर पर अपने विज्ञापनों को रोक दिया है। इससे सोशल मीडिया कंपनियों को विज्ञापन रोकने से भारी-भरकम रेवेन्यू का घाटा हुआ है। विज्ञापन रोकनेवाली कंपनियों में वेरिजॉन, लेंडिंग क्लब, नाथ फेस और खासकर एचयूएल आदि का समावेश है।  

विज्ञापन रोकने की खबर से फेसबुक के मार्केट वैल्यू में 56 अरब डॉलर की कमी

डव साबुन और हेलमन मेयोनेज़ जैसे प्रमुख कंज्यूमर निर्माता द्वारा फ़ेसबुक पर विज्ञापन का बहिष्कार करने के फैसले का अन्य ब्रांड भी पालन करने को आगे आए हैं। इसे लेकर फेसबुक के निवेशकों की प्रतिक्रिया भी देखने को मिली है। यह खबर फैलते ही इसका शेयर 8.3 प्रतिशत गिर गया। इसके मार्केट वैल्यू में 56 अरब डॉलर का नुकसान हुआ। यूनिलीवर के इस कदम ने अन्य बड़ी कंपनियों पर तत्काल दबाव बनाया और फेसबुक के कारोबार के समक्ष चुनौती पेश कर दिया है।

कोकाकोला ने भी सोशल मीडिया पर रोका विज्ञापन

उधर शुक्रवार को ही कोका कोला ने कहा कि यह अब सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अगले 30 दिन तक कोई विज्ञापन नहीं देगी। इसके अलावा होंडा मोटर कंपनी और कई अन्य छोटे ब्रांड्स ने भी इस तरह के बहिष्कार का समर्थन किया है। फेसबुक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मार्क जुकरबर्ग ने शुक्रवार को कर्मचारियों के साथ लाइव सवाल-जवाब सत्र में विज्ञापनदाताओं की चिंताओं को दूर करने का प्रयास किया। उन्होंने कंपनी की विज्ञापन और सामग्री नीतियों में कुछ बदलावों की घोषणा की। लेकिन उनका यह कदम शिकायत करनेवालों के गुस्से को शांत नहीं कर पाया।

ट्वीटर से कम एक्शन लेता है फेसबुक

विज्ञापन बहिष्कार का आयोजन करने वाले सिविल राइट्स समूहों ने बयान जारी कर कहा कि हम फेसबुक को पहले से ही जानते हैं। पहले भी इसने ऐसी कई बार क्षमा याचनाएं की है। हालांकि ठोस कार्रवाई करने में यह बुरी तरह विफल रहा है। अब वह वक्त आ गया है जब इस पर लगाम लगना चाहिए। यह सोशल नेटवर्किंग साइट ट्विटर से कम आक्रामक रहा है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी कई बार भड़काने वाले ट्वीट करते रहते हैं। वह काफी वायरल भी होता रहता है।

इन कंपनियों में से फेसबुक भी रिस्क में है। पहले से ही न्याय विभाग और फेडरल ट्रेड कमीशन से एंटी ट्रस्ट की जांच का सामना कर रहा है।

फेसबुक पर रेगुलटर की कार्रवाई का खतरा

विज्ञापन देने वालों की चिंता की तुलना में फेसबुक पर अब रेगुलेटरी कार्रवाई का खतरा ज्यादा मंडरा रहा है। EMarketer के अनुसार  पूरे अमेरिका के डिजिटल एडवर्टाइजिंग का 30 प्रतिशत हिस्सा फेसबुक को जाता है। इसके तीन अरब से अधिक यूजर्स हैं। फेसबुक के लिए ऐसे विवाद कोई नए नहीं है परंतु फिर भी यह सभी को दरकिनार कर लगातार आगे बढ़ता रहा है। अकाउंट डिलीट करने और बॉयकॉट की धमकियों के बावजूद इसके विज्ञापन रेवेन्यू में 2019 में 27 प्रतिशत से अधिक वृध्दि हुई और इसने 69.7 बिलियन डॉलर का रेवेन्यू प्राप्त किया। 

अब जबकि अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव महज 4 महीने दूर हैं ऐसे में फेसबुक अपने आप को कल्चरल युद्ध के केंद्र में पाता है।

फेसबुक को कोरोना से एडवर्टाइजिंग रेवेन्यू के नुकसान की आशंका थी

फेसबुक ने पहले ही चेतावनी दी थी कि विज्ञापनदाता कोरोनावायरस महामारी के परिणामस्वरूप कम खर्च कर रहे हैं। अब लागत में कटौती और समाज में नस्लीय अन्याय के बारे में जनता की चिंताओं का दबाव है। सिविल राइट्स ग्रुप ने फेसबुक को बेहतर तरीके से हेट स्पीच से निपटने के लिए विज्ञापन बहिष्कार का आयोजन किया। इस पर कंपनियों ने समर्थन भी किया।

मार्क जुकरबर्ग कर रहे थे लापरवाही

एनएएसीपी के अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी डेरिक जॉनसन ने एक बयान में कहा कि यह स्पष्ट है कि फेसबुक और उसके सीईओ मार्क जुकरबर्ग लापरवाही कर रहे थे। अब वे हमारे लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाने के बावजूद गलत सूचनाओं के प्रसार से संतुष्ट हैं। फेसबुक ने परदे के पीछे बहिष्कार को दबाने की कोशिश की है। विज्ञापनदाताओं तक पहुंच कर उसने संकेत दिया है कि उसे नफरत और गलत सूचना से लड़ने की परवाह नहीं है। 

हेट स्पीच को पहचनाने वाले सॉफ्टवेयर में हो रहा है सुधार

अपने एडवर्टाइजिंग पार्टनर को एक ईमेल कर फेसबुक ने कहा है कि इसका वह सॉफ्टवेयर जिसके जरिए हेट स्पीच को डिटेक्ट किया जाता है उसमें सालों साल से सुधार आ रहा है। इसके जरिए आने वाले चुनावी दिनों में सिर्फ सही सूचनाएं ही प्रसारित की जा सकेंगी। कर्मचारियों के साथ सवाल जवाब के दौरान जुकरबर्ग एक कदम आगे निकल गए। उन्होंने कहा कि कंपनी मतदान से संबंधित सभी पदों पर वोटिंग हब का लिंक डाल देगी।

न्यूज जैसी सामग्री है तभी पोस्ट होगी

फेसबुक के नियमों का उल्लंघन करने वाले पोस्ट की पहचान करना भी शुरू कर देगा। अगर वे न्यूज योग्य हैं तो पोस्ट बना रहेगा। वे नियम कंटेंट पर निर्णय लिए बिना कार्रवाई करने के लिए फेसबुक कवर देते हैं। कई हफ्ते पहले जब ट्रम्प ने ट्वीट किया था कि मेल-इन वोटिंग से फ्रॉड होगा, तो ट्विटर ने इस पोस्ट को फैक्ट-चेक करने के लिए लेबल किया था। जुकरबर्ग ने इसी पोस्ट को फेसबुक पर अकेला छोड़ दिया था। लेकिन अब अगर सभी मतदान से संबंधित कंटेंट पर एक लिंक है तो सीईओ को अपने सही होने के बारे में विवादास्पद निर्णय नहीं करना होगा।

फेसबुक पहले से ही भेदभाव वाले विज्ञापन पर प्रतिबंध लगाता रहा है

फेसबुक पहले से ही भेदभाव वाले विज्ञापन पर प्रतिबंध लगाता है। शुक्रवार को इसने अपनी नीतियों को और सख्त बताते हुए कहा कि अगर कोई विज्ञापन किसी दूसरे धर्म जाति या कम्युनिटी को नीचा दिखाने की कोशिश करेगा तो उसे नहीं दिखाया जाएगा। जुकरबर्ग ने कहा कि आज यहां मैं जिन नीतियों की घोषणा कर रहा हूं उनमें से किसी में भी राजनेताओं के लिए कोई अपवाद नहीं हैं।

शुक्रवार को देर रात फेसबुक ने दी जानकारी

शुक्रवार देर रात विज्ञापनदाताओं को दूसरे ईमेल में, ग्लोबल मार्केटिंग सॉल्यूशन्स की उपाध्यक्ष कैरोलिन एवरसन ने जुकरबर्ग द्वारा की गई घोषणाओं का सारांश दिया। कंपनी द्वारा पहले से ही नफरत फैलाने वाले भाषण को खोजने और हटाने के लिए उठाए गए कई कदमों को बताया। एवरसन ने कहा कि फेसबुक अपनी तिमाही रिपोर्ट के लिए ऑडिट की मांग करेगा जिसमें यह है कि वह अपने कम्युनिटी स्टैंडर्ड को कैसे लागू करता है।