हर रोज हो रहा 8 लाख पीपीई किट का निर्माण, सरकार से निर्यात पर लगी रोक हटाने की मांग

  • वैश्विक बाजार में घरेलू कंपनियों के लिए निर्यात के भारी अवसर
  • कई देशों ने पीपीई किट के निर्यात से प्रतिबंध हटाया: शक्तिवेल

दैनिक भास्कर

Jun 21, 2020, 06:11 PM IST

नई दिल्ली. इंडियन अपैरल एक्सपोर्ट इंडस्ट्री संगठन एईपीसी ने रविवार को कहा कि देश में अब रोजाना आठ लाख पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट (पीपीई) किट का निर्माण हो रहा है। संगठन ने सरकार से पीपीई किट के निर्यात पर लगी रोक को हटाने का आग्रह किया है। 

घरेलू निर्यातक वैश्विक बाजार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए तैयार

अपैरल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (एईपीसी) के अध्यक्ष ए शक्तिवेल ने कहा कि वैश्विक पीपीई किट बाजार में घरेलू कंपनियों के लिए निर्यात के भारी अवसर मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि घरेलू निर्यातक पीपीई के लिए वैश्विक बाजार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं। पीपीई के वैश्विक निर्यात बाजार के अगले पांच वर्षों में 60 अरब डॉलर से अधिक हो जाने का अनुमान है। एईपीसी ने सरकार से पीपीई किट के निर्यात पर लगी रोक हटाने का अनुरोध किया है।

कोरोनावायरस महामारी के कारण उद्योग को भारी नुकसान

उन्होंने कहा कि कोरोनावायरस महामारी के कारण उद्योग को भारी नुकसान हुआ है। उद्योग जगत ने देश भर में अपनी उत्पादन सुविधाओं को फिर से तैयार करके पीपीई का निर्माण करने के लिए बड़ी उत्पादन सुविधाओं को शुरू किया है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश, इंडोनेशिया, पाकिस्तान और अन्य देशों ने पीपीई निर्यात पर प्रतिबंध हटा दिया है और उन्हें भारी ऑर्डर मिल रहे हैं। शक्तिवेल ने कहा कि हमें प्रतिस्पर्धी देशों से निर्यात बाजार खोने की आशंका है। पीपीई का उत्पादन देश की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त से अधिक है और इसे अब निर्यात के लिए खोला जा सकता है।

अमेरिका और यूरोप बड़े संभावित खरीदार

शक्तिवेल ने कहा कि इसके लिए अमेरिका और यूरोप सबसे बड़े संभावित खरीदार हैं। उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान को पिछले सप्ताह 10 करोड़ डॉलर के निर्यात के ऑर्डर मिले हैं, जो बढ़कर 50 करोड़ डॉलर तक पहुंच सकता है। इसी तरह, बांग्लादेश ने भी वैश्विक व्यापार में अपने काम को आक्रामक रूप से संरक्षित किया है। उन्होंने कहा कि हमें एक आकर्षक वैश्विक व्यापार के अवसर को नहीं खोना चाहिए और पीपीई निर्यात शुरू करना समय की आवश्यकता है।