स्विस बैंक में भारत से जमा होनेवाले पैसों में आई 6 प्रतिशत की गिरावट, 2019 में घटकर कुल 6,625 करोड़ रुपए रह गए

  • 2019 में भारतीय टैक्स अधिकारियों को पहली बार दी गई थी टैक्स के बारे में जानकारी
  • 2018 के बाद से स्विस के वित्तीय संस्थानों में खाते रखनेवालों की जानकारी देना अनिवार्य हुआ था

दैनिक भास्कर

Jun 25, 2020, 09:37 PM IST

मुंबई. स्विस बैंकों और उसकी भारतीय शाखाओं में भारतीय लोगों और कंपनियों की ओर से जमा राशि में 6 प्रतिशत की गिरावट आई है। 2019 में भारत से 6,625 करोड़ रुपए स्विस बैंक में भेजे गए हैं। गुरुवार को यह आंकड़े जारी किए गए। केंद्रीय बैंक ने बताया कि स्विस की मुद्रा में यह राशि 89.9 मिलियन स्विस फ्रैंक रही है। 2019 के अंत तक स्विटजरलैंड में कुल 246 बैंक थे।

लगातार दूसरे साल आई है गिरावट

स्विस बैंकों में भारत से जमा होनेवाली कुल राशि लगातार दूसरे साल गिरी है। जब से स्विस नेशनल बैंक (एसएनबी) ने आंकड़ों को कंपाइल करना शुरू किया है, तब से पिछले तीन दशकों में यह तीसरी बार सबसे निचले स्तर पर है। बैंक ने 1987 से आंकड़ों का संकलन या कंपाइल शुरू किया है। 2019 के अंत में भारतीय ग्राहकों से एसएनबी को मिली कुल 899.46 मिलियन की राशि में 550 मिलियन (4,000 करोड़ रुपए से अधिक) कस्टमर डिपॉजिट था।

88 मिलियन (650 करोड़ रुपए) बैंकों के माध्यम से आया था। ट्रस्ट के माध्यम से 7.4 मिलियन (50 करोड़ रुपए) भेजा गया था। सिक्योरिटीज और विभिन्न वित्तीय साधनों से 254 मिलियन डॉलर (1,900 करोड़ रुपए) बैंक को मिले थे।

काले धन के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई

उपरोक्त आंकड़े बैंकों द्वारा एसएनबी को दिए गए आधिकारिक आंकड़े हैं। हालांकि यह नहीं बताया गया है कि स्विट्जरलैंड में भारतीयों द्वारा जमा किया गया बहुचर्चित काला धन कितना है। इन आंकड़ों में तीसरे देश की संस्थाओं के नाम से स्विस बैंकों में भारतीयों, एनआरआई या अन्य लोगों के पास जो पैसा हो सकता है वह भी शामिल नहीं है। एसएनबी के अनुसार, भारतीय ग्राहकों के प्रति स्विस बैंकों की ‘कुल देनदारियों’ को ध्यान में रखा जाता है। इसमें व्यक्तियों, बैंकों और कंपनियों से जमा पैसे शामिल हैं। इसमें भारत में स्विस बैंकों की शाखाओं के आंकड़े, साथ ही नॉन डिपॉजिट देनदारियां भी शामिल हैं।

बांगलादेश के नागरिकों और कंपनियों की जमा में आई गिरावट

उधर आंकड़ों के अनुसार स्विटजरलैंड के बैंकों में पाकिस्तान, बांगलादेश के नागरिकों, कंपनियों की जमा राशि में भी गिरावट आई है। अमेरिका और ब्रिटेन से जमा होनेवाले धन में वृद्धि हुई है। एसएनबी के पास 1987 से उपलब्ध आंकड़े के अनुसार स्विस बैंकों में भारतीयों की सबसे कम राशि 1995 में देखी गई जो 72.3 करोड़ स्विस फ्रैंक थी। उसके बाद 2016 में यह 67.6 करोड़ स्विस फ्रैंक रही। वहीं 2006 में यह सर्वाधिक 6.5 अरब स्विस फ्रैंक पर पहुंच गई। उसके बाद इसमें लगातार पांच साल गिरावट आयी।

2011, 2013 और 2017 में बढ़ी राशि

रिकार्ड स्तर के बाद यह केवल 2011 (12 प्रतिशत), 2013 (43 प्रतिशत) और उसके बाद 2017 में बढ़ी।आंकड़ों के अनुसार पिछले साल स्विटजरलैंड के बैंकों में पाकिस्तान और बांग्लादेश के नागरिकों और कंपनियों की जमा राशि भी घटी है। वहीं अमेरिका और ब्रिटेन के लोगों की स्विस बैंकों में जमा राशि बढ़ी है। स्विस बैंक में पाकिस्तानियों की राशि करीब 45 प्रतिशत घटकर 41 करोड़ स्विस फ्रैंक (करीब 3,000 करोड़ रुपए) रह गया। वहीं बांग्लादेश का पैसा 2 प्रतिशत घटकर 60.5 करोड़ स्विस फ्रैंक (करीब 4,500 करोड़ रुपए) रहा। 

2018 में 11 प्रतिशत की गिरावट आई थी

भारतीय और स्विस अधिकारी पहले ही कह चुके हैं कि स्विस बैंकों में भारतीयों के लिए एक अधिक विश्वसनीय उपाय किया गया है। इन आंकड़ों में 2018 में 11 प्रतिशत और 2017 में 44 प्रतिशत की गिरावट देखी गई थी। 2007 के अंत में यह आंकड़ा 2.3 अरब डॉलर (9,000 करोड़ रुपए से अधिक) से भी ज्यादा था। स्विस अधिकारियों ने हमेशा कहा है कि स्विट्जरलैंड में भारतीयों के जमा पैसों को ‘काला धन’ नहीं माना जा सकता है। वे टैक्स, धोखाधड़ी और चोरी के खिलाफ लड़ाई में भारत का सक्रिय रूप से समर्थन करते हैं।

2018 से दी जा रही हैं सूचनाएं

स्विट्जरलैंड और भारत के बीच टैक्स मामलों में सूचनाओं का आदान-प्रदान 2018 से लागू है। 2018 के बाद से स्विस के वित्तीय संस्थानों में खाते रखने वाले सभी भारतीयों के बारे में वित्तीय जानकारी सितंबर 2019 में टैक्स अधिकारियों को पहली बार दी गई थी। इसका पालन हर साल किया जाता है। एसएनबी के अनुसार स्विस बैंकों की भारतीय ग्राहकों को लेकर देनदारी में सभी प्रकार के खातों को लिया गया है। इसमें व्यक्तिगत रूप से बैंकों और कंपनियों की जमा राशि शामिल हैं। इसमें स्विस बैंकों में भारत में स्थित शाखाओं के आंकड़े भी शामिल हैं।