सोने की एफडी करवाकर आप भी कर सकते हैं कमाई, एसबीआई की रिवैम्प्ड गोल्ड डिपॉजिट स्कीम में करें निवेश

  • स्कीम के तहत ग्राहक को कम से कम 30 ग्राम गोल्ड जमा करना होता है
  • इस स्कीम में निवेश करने पर कुछ साल का लॉक-इन पीरियड रहता है

दैनिक भास्कर

Jun 23, 2020, 04:42 PM IST

नई दिल्ली. हमारे देश में सोने में निवेश को सुरक्षित माना जाता है। लेकिन घर में सोना रखना सुरक्षित नहीं है और अगर आप बैंक में लॉकर लेते हैं तो आपको इसका शुल्क देना होता है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) की रिवैम्प्ड गोल्ड डिपॉजिट स्कीम के तहत अपने सोने या सोने के गहने की बैंक में एफडी कर सकता है। इससे सोना भी सुरक्षित रहता है और उस पर ब्याज भी मिलता है। हम आपको इस स्कीम के बारे में बता रहे हैं।

इसमें होती हैं 3 कैटेगिरी
इस स्कीम के तहत एसबीआई ने तीन प्रकार की कैटेगरी बनाई है। पहली कैटेगरी में 1-3 साल के लिए सोना जमा किया जाता है। इसे शॉर्ट टर्म बैंक डिपॉजिट (STBD) कहा जाता हैं। दूसरी कैटेगरी को मीडियम टर्म गवर्नमेंट डिपॉजिट (MTGD) कहा जाता है, जिसका मैच्योरिटी पीरियड 5-7 है। वहीं लॉन्ग टर्म गवर्नमेंट डिपॉजिट (LTGD) कैटेगरी के तहत 12-15 साल के लिए गोल्ड फिक्स्ड किया जा सकता है।

कितना मिलता है ब्याज?
शॉर्ट टर्म बैंक डिपॉजिट  (STBD) कैटेगरी के तहत एक साल के लिए एफडी करने पर 0.50 फीसदी ब्याज दिया जाता है। जबकि, दो साल और तीन साल वाली एफडी के लिए क्रमश: 0.55 फीसदी और 0.60 फीसदी ब्याज दिया जा रहा है। इसके अलावा मीडियम टर्म गवर्नमेंट डिपॉजिट (MTGD) कैटेगरी के तहत 2.25 फीसदी की दर से सालाना ब्याज दिया जाता है। जबकि, लॉन्ग टर्म गवर्नमेंट डिपॉजिट (LTGD) कैटेगरी के तहत गोल्ड की एफडी करने पर 2.50 फीसदी सालाना की दर से ब्याज दिया जाएगा।

कम से कम 30 ग्रान सोना रखना जरूरी
रिवैम्प्ड गोल्ड डिपॉजिट स्कीम के तहत ग्राहक को कम से कम 30 ग्राम गोल्ड जमा करना होता है। हालांकि, सोना जमा करने की कोई अधिकतम सीमा नहीं तय की गई है। मतलब आप कितना भी गोल्ड जमा करके उस पर ब्याज पा सकते हैं।

सोने में भी ले सकते हैं ब्याज
एफडी की मैच्योरिटी पीरियड खत्म होने के बाद ग्राहक के पास ब्याज सहित अपने सोने को लेने के दो ऑप्शन मिलते हैं। या तो वह उसे सोने के रूप में वापस ले सकता है या फिर सोने की तत्कालिक कीमत के बराबर कैश ले सकता है। हालांकि, सोने के रूप में वापस लेने पर 0.20 फीसदी की दर से एडमिनिस्ट्रेटिव चार्ज उससे वसूला जाएगा।

रहता है लॉक-इन पीरियड 
STBD कैटेगरी के तहत एक साल का लॉक-इन पीरियड होता है। इस समयावधि के बाद तय समय से पहले पैसा निकालने पर ब्याज दर में पेनाल्टी लगाई जाएगी। वहीं, MTGD कैटेगरी के तहत निवेशक 3 साल के बाद कभी भी स्कीम से बाहर हो सकते हैं। हालांकि, मैच्योरिटी पीरियड से पहले स्कीम ब्रेक करने पर ब्याज दर में पेनाल्टी लगाई जाएगी। इसके अलावा LTGD कैटेगरी के तहत 5 साल के बाद गोल्ड निकला जा सकता हैं। इसमें भी ब्याज दर पर पेनाल्टी लगाई जाएगी।

मिलता है टैक्स छूट का लाभ
इस स्कीम के तहत एफडी किए गए सोने पर आपको संपत्ति कर (प्रॉपर्टी टैक्स) भी नहीं देना होता। वहीं, जरूरत पड़ने पर इस एफडी के आधार पर लोन भी लिया जा सकता है।

कौन कर सकता है निवेश?
भारतीय इंडिविजुअल्स, प्रोपराइटरशिप और पार्टनरशिप फर्म, हिन्दू अविभाजित परिवार (एचयूएफ), सेबी के साथ रजिस्टर्ड म्यूचुअल फंड / एक्सचेंज ट्रेडेड फंड जैसे ट्रस्ट और कंपनियां इस स्कीम के तहत निवेश कर सकती हैं।इस स्कीम के तहत फिलहाल स्टेट बैंक की कुछ चुनिंदा शाखाओं में ही सोने की फिक्स्ड डिपॉजिट की जा सकती है। इन शाखाओं में पीबी ब्रांच नई दिल्ली, एसएमई ब्रांच चांदनी चौक दिल्ली, कोयम्बटूर ब्रांच, हैदराबाद मेन ब्रांच, त्यागराया नगर ब्रांच चेन्नई, बुलियन ब्रांच मुम्बई और बैंगलूरू मेन ब्रांच शामिल हैं। अधिक जानकारी के लिए यहां क्लिक करें