सरकार MSME सेक्टर की तत्काल सहायता करे, नहीं तो कई यूनिट्स बिजनेस से बाहर हो जाएंगी

  • ये सेक्टर मुख्य रूप से नकदी से संचालित होता है, लेकिन इन दिनों ये वित्तीय संकट से गुजर रहा है
  • बैंक मौजूदा आर्थिक स्थिति को देखते हुए इन सेक्टर को हाई रिस्क पर लोन देने को तैयार नहीं हैं

दैनिक भास्कर

May 12, 2020, 05:07 PM IST

नई दिल्ली. क्रेडिट रेटिंग एजेंसी केयर (CARE) रेटिंग्स की रिपोर्ट के मुताबिक सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) सेक्टर को तत्काल सहायता की आवश्यकता है, जिसमें कार्यशील पूंजी की सीमा में वृद्धि और टैक्स रिफंड की रिहाई शामिल हो। नहीं तो कई यूनिट्स बिजनेस से बाहर जा सकती हैं।

एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि ये सेक्टर मुख्य रूप से नकदी से संचालित होता है, लेकिन इन दिनों ये वित्तीय संकट से गुजर रहा है। दरअसल, लॉकडाउन के चलते इसके परिचालन रूका हुआ है, लेकिन भी भी ओवरहेड लागत कंपनियों द्वारा वहन की जा रही है।

डर की वजह से बैंक नहीं दे रहे लोन
रिपोर्ट के मुताबिक बिना इनकम के ये सेक्टर खर्चों को कवर नहीं कर पाएगा और कई कंपनियां बंद हो जाएंगी। कुछ तो बंद होने की कगार पर हैं। ऐसे में ज्यादातर छोटे व्यवसाय सरकार के समर्थन के बिना ये लंबे समय तक नहीं टिक पाएंगे। सरकार एमएसएमई सेक्टर को ऋण दिलाने के लिए बैंकों को खाली कर रही है। हालांकि, बैंक मौजूदा आर्थिक स्थिति को देखते हुए इन सेक्टर को हाई रिस्क पर लोन देने को तैयार नहीं हैं।

केयर रेटिंग्स में इंडस्ट्री रिसर्च की डिप्टी मैनेजर रश्मि रावत और भाग्यश्री सी भाटी ने कहा, “सरकार की क्रेडिट गारंटी स्कीम के तहत सरकार को छोटे कारोबारियों को 100 फीसदी गारंटी देना चाहिए। इससे बैंकों के डर को कम करेगा।”

बिजली बिल माफ करने की सिफारिश
रिपोर्ट में इस बात का जोर दिया गया है कि एमएसएमई को कार्यशील पूंजी की सीमा बढ़ाने की आवश्यकता है, क्योंकि लॉकडाउन के कारण उन्हें कोई रेवेन्यू नहीं मिल रहा है। इसके बाद भी उन्हें अपने नियमित खर्च को पूरा करने के लिए फाइनेंस की आवश्यकता होती है। इसके अलावा, पब्लिक सेक्टर यूनिट और बिजली वितरण कंपनियों द्वारा छोटे व्यवसायों को सभी बकाया राशि को क्लियर करने की मंजूरी भी दी जानी चाहिए। उन्होंने सरकार द्वारा जीएसटी (गुड्स एंड सर्विस टैक्स) और टैक्स रिफंड्स की तत्काल माफ करने की मांग की।

राज्य सरकारों को एमएसएमई की फिक्स्ड इलेक्ट्रिसिटी चार्ज की डिमांड और मार्च-अप्रैल के बिजली बिल को माफी करने पर विचार करना चाहिए, क्योंकि लॉकडाउन से उनका प्रोडक्शन प्रभावित हुआ है।

3 करोड़ श्रमिकों पर बना तनाव
रिपोर्ट में कहा गया है कि लॉकडाउन के दूसरे और तीसरे फेज में मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स आराम मिल गया, लेकिन अब इन्हें फिर से संचालित करने के लिए जिला प्रशासकों की तरफ से औपचारिक मंजूरी मिलने में देरी हो रही है। मिल्स अभी भी सामान्य परिचालन दरों से नीचे काम शुरू कर रहे हैं। लॉकडाउन की वजह से इनकी मांग और आपूर्ति की गतिविधियों पर असर हुआ है। साथ ही, काम करने वाले श्रमिकों पर भी दबाव बना है। एमएसएमई निर्माण इकाइयों में शामिल लगभग 2.75 से 3 करोड़ श्रमिक तनाव में हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में 6.3 करोड़ से ज्यादा असिंचित गैर-कृषि एमएसएमई (निर्माण को छोड़कर) विभिन्न आर्थिक गतिविधियों में लगे हुए हैं। यह सेक्टर 11.1 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार प्रदान करता है। एमएसएमई सेक्टर में विनिर्माण, व्यापार और सर्विस प्रोवाइडर शामिल हैं। बड़ी संख्या में एमएसएमई बड़े उद्योगों की जरूरतों को पूरा करने वाली सपोर्टिंग यूनिट हैं।