सरकार ने डिस्कॉम को 90 हजार करोड़ रुपए का पैकेज दिया, लेकिन इनका बिजली कंपनियों पर पहले से ही 94 हजार करोड़ का बकाया

  • इससे डिस्कॉम यानी पावर जनरेटिंग कंपनियों को फायदा मिलेगा, काम की गारंटी भी मिलेगी
  • 90 हजार करोड़ रुपए राज्यों की सरकारी कंपनियों पीएफसी, आरईसी के माध्यम से दिया जाएगा
  • राज्य सरकारों द्वारा संचालित पीएफसी और आरईसी के पास छह लाख करोड़ रुपए की संपत्ति है

दैनिक भास्कर

May 13, 2020, 11:03 PM IST

नई दिल्ली. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मुश्किल हालातों से गुजर रहीं राज्यों की पावर जनरेटिंग कंपनियों को बढ़ावा देने के लिए 90,000 करोड़ रुपए देने का ऐलान किया। लेकिन इस पैकेज को कैसे दिया जाएगा? कब दिया जाएगा? किसे दिया जाएगा? हम इसे समझने की कोशिश करते हैं।

  • क्या मिलेगा? 

पैकेज के बावजूद डिस्कॉम करीब चार हजार करोड़ रुपए के घाटे में रहेंगी
पिछले कुछ समय में पावर डिस्ट्रिब्यूशन कंपनियां यानी डिस्कॉम के रेवेन्यू में काफी कमी आई है। सरकार के 90 हजार करोड़ रुपए के आर्थिक पैकेज से डिस्कॉम को फायदा मिलेगा। लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बिजली कंपनियां पहले से बहुत ज्यादा गहरे संकट में हैं। बिजली कंपनियों का डिस्कॉम पर 94,000 करोड़ रुपए का बकाया है। यानी इस पैकेज के बावजूद डिस्कॉम करीब चार हजार करोड़ रुपए के घाटे में रहेंगी।

  • किसे मिलेगा?

पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन और रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन डिस्कॉम को फायदा होगा
पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन और रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन कॉर्पोरेशन डिस्कॉम कंपनियों को यह मदद मिलेगी। दरअसल, पिछले दोनों लॉकडाउन, कोरोनावायरस आदि के चलते बिजली वितरण कंपनियों की आय में भारी कमी आई है। इसके चलते बिजली उत्पादन और वितरण करने वाली कंपनियों के लिए यह प्रावधान किया गया है।
90 हजार करोड़ रुपए सरकारी कंपनियों पीएफसी, आरईसी के माध्यम से दिया जाएगा। इससे राज्य सरकारें इन कंपनियों को काम की गारंटी भी दे सकेंगी। कॉन्ट्रैक्टर को 6 महीने की राहत बिना किसी शर्त के दी जाएगी। सीतारमण ने कहा कि डिस्कॉम अभी आसाधारण कैश फ्लो के प्रवाह से गुजर रही हैं। ऐसे में इन्हें मदद की जरूरत है। हम चाहते हैं कि यह फायदे कंज्यूमर्स तक सीधे पहुंचे।

  • क्यों मिलेगा?

पॉवर जेनरेशन कंपनियों, ट्रांसमिशन कंपनियों, निजी कंपनियां को पेमेंट किया जा सके

अभी डिस्ट्रिब्यूशन कंपनियों को पावर जनरेशन कंपनियों और ट्रांसमिशन कंपनियों को 94 हजार करोड़ रुपए चुकाने हैं, लेकिन उनके पास पैसे की कमी है। इस एक बार के लिक्विडिटी इन्फ्यूजन से सेंट्रल पब्लिक सेक्टर की पॉवर जेनरेशन कंपनियों, ट्रांसमिशन कंपनियों, निजी कंपनियां और रिन्यूवल एनर्जी जेनरेटर्स को पेमेंट किया जा सकेगा। राज्य सरकारों द्वारा संचालित पीएफसी और आरईसी के पास छह लाख करोड़ रुपए की संपत्ति है। ये पॉवर सेक्टर की सबसे बड़ी कर्ज देने वाली कंपनियां हैं।

बिजली वितरण कंपनियों को इतने बड़े पैकेज की जरूरत नहीं थी

अर्थशास्त्री, विद्युत जोशी कहते हैं कि सरकार ने आज रु 90 हजार करोड़ के पैकेज की घोषणा की गई है। यह थोड़ा ज्यादा है। यह कहा जाता है कि निजी और सरकारी कंपनियां विभिन्न कारणों से नुकसान कर रही हैं। लेकिन इनमें से ज्यादातर सरकारी कंपनियां हैं और निजी कंपनियां भी बड़ी हैं, इसलिए वे थोड़े समय के लिए ये बोझ सह सकती हैं। आज की गई घोषणाएं अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देंगी।  

  • क्यों किया गया?

10 राज्यों ने करीब एक तिहाई पॉवर सप्लाई अपने उपभोक्ताओं के वितरण में गंवाई है

केंद्र सरकार के राहत पैकेज का आइडिया संबंधित राज्य सरकारों द्वारा गारंटीकृत रियायती ऋणों के साथ बैकलॉग भुगतान को मंजूरी देने के लिए भी है। दरअसल, ऊर्जा की खपत, खास तौर पर बिजली और रिफाइनरी उत्पाद आमतौर पर अर्थव्यवस्था में डिमांड जुड़े होते हैं। 10 राज्यों ने करीब एक तिहाई पॉवर सप्लाई अपने उपभोक्ताओं के वितरण में गंवाई है। इसके चलते कंपनियों के ऊपर बकाया बढ़ गया है। इसके साथ उन कंपनियों को लोन देने वाली बैंकिंग सेक्टर पर भी असर पड़ा है। 

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