शहरी गरीबों के लिए होनी चाहिए मनरेगा जैसी योजना, सरकार ला सकती है और प्रोत्साहन पैकेज: आशिमा गोयल

  • पीएचडी-सीसीआई के वेबिनार में बोलीं पीएम की आर्थिक सलाहकार काउंसिल की अंशकालिक सदस्य
  • कहा- मनरेगा जैसी योजना से शहरी गरीबों को रोजगार दिया जा सकता है, प्राइमरी हेल्थकेयर पर हो ज्यादा खर्च

दैनिक भास्कर

Jun 14, 2020, 10:35 AM IST

नई दिल्ली. प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार काउंसिल की अंशकालिक सदस्य आशिम गोयल ने कहा है कि कोरोना आपदा से निपटने के लिए सरकार और प्रोत्साहन पैकेज ला सकती है। शनिवार को पीएचडी-सीआईआई की वेबिनार में बोलते हुए गोयल ने सुझाव देते हुए कहा कि शहरी गरीबों के लिए भी मनरेगा जैसी योजना होनी चाहिए। 

लॉकडाउन के बाद आ सकती है नई योजना

आशिमा गोयल ने कहा कि लॉकडाउन के बाद मांग को प्रोत्साहित करने के लिए नई योजनाएं आ सकती हैं। इसमें डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर (डीबीटी) और इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च जैसी योजना शामिल हो सकती हैं। हालांकि, गोयल ने स्पष्ट किया कि वे उनके निजी विचार हैं और इनका पीएम की आर्थिक सलाहकार काउंसिल से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा कि शहरी गरीबों के लिए मनरेगा जैसी योजना की गुजाइंश के उनके अपने विचार हैं। इस योजना के तहत शहरी गरीबों को रोजगार दिया जा सकता है।

प्राइमरी हेल्थकेयर पर ज्यादा खर्च की वकालत

आशिमा गोयल ने प्राइमरी हेल्थकेयर पर ज्यादा खर्च करने की वकालत की है। गोयल ने कहा कि प्राइमरी हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने में सबसे बेहतर कार्य केरल ने किया है। उन्होंने इंडस्ट्री से कहा कि वे सुझावों के साथ आएं। सरकार उनकी बात सुनेगी। कोरोना संक्रमण से पहले मंदी का जिक्र करते हुए गोयल ने कहा कि नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनीज की वजह से आर्थिक मंदी का माहौल था। अब प्रोत्साहन पैकेज के जरिए इस मुद्दे को सुलझा लिया गया है। आशिमा मुंबई के इंदिरा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ डवलपमेंट रिसर्च में अर्थशास्त्र की प्रोफेसर भी हैं।

सरकार ने घोषित किया है 20.97 लाख करोड़ रुपए का प्रोत्साहन पैकेज

कोरोना आपदा से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने 20.97 लाख करोड़ रुपए के प्रोत्साहन पैकेज की घोषणा की है। इसमें 8.01 लाख करोड़ रुपए के आरबीआई के लिक्विडिटी उपाय भी शामिल हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पांच किस्तों में इस प्रोत्साहन पैकेज की घोषणा की थी। इसमें एमएसएमई को 3.70 लाख करोड़ रुपए, एनबीएफसी को 75 हजार करोड़ रुपए, बिजली वितरण कंपनियों को 90 हजार करोड़ रुपए का आवंटन किया गया है।