वित्त वर्ष 2020 में ईपीएफ सब्सक्राइबर की संख्या 17.8 लाख घट कर 94.7 लाख रही, एक साल पहले 1.12 करोड़ थी- एसबीआई रिपोर्ट

  • एनपीएस में नए सब्सक्राइबर की संख्या में 17,256 की कमी आई है
  • जॉब छोड़कर नए जॉब को पकड़नेवालों की संख्या 12.7 लाख बढ़ी है

दैनिक भास्कर

Jun 26, 2020, 02:58 PM IST

मुंबई. देश में नए ईपीएफ सब्सक्राइबर की संख्या में गिरावट आई है। वित्त वर्ष 2019 में कुल नए ईपीएफ सब्सक्राइबर की संख्या एक करोड़ 12 लाख 500 थी। 2020 में यह घट कर 94.7 लाख रह गई। यानी इसमें 17.8 लाख की गिरावट दर्ज की गई है। इसका मतलब यह हुआ कि रोजगार की संख्या में कमी आई है।

ईपीएफओ के आंकड़ों से नए रोजगार के बारे में पता चलता है

दरअसल ईपीएफओ के इन आंकड़ों से नए रोजगार के बार में पता चलता है। एसबीआई की ओर से जारी रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। रिपोर्ट कहती है कि हालांकि, आंकड़ों की यह सही तस्वीर नहीं है। क्योंकि इस तरह के डेटा में बाहर निकलने वाले सदस्यों की भी संख्या शामिल है। यह फिर से कहीं काम करते हैं और फिर से नए सब्सक्राइबर बन जाते हैं। एसबीआई की रिपोर्ट कहती है कि इस पेरोल का निर्माण मौजूदा और नए पेरोल को मिलाकर किया गया है।

सेकेंड जॉब के पेरोल में 12.7 लाख की वृद्धि

ईपीएफओ के आंकड़ों के अनुसार, देश में वित्त वर्ष 2020 में 28.9 लाख कम नए पेरोल बने हैं। रिपोर्ट कहती है कि वित्त वर्ष 2020 में दूसरी बार के पेरोल की संख्या में 12.7 लाख की वृद्धि हुई। एनपीएस कटेगरी में भी राज्य और केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2021 में 7.33 लाख के रोजगार का निर्माण किया। हालांकि, राज्य सरकारों ने वित्त वर्ष 2020 में 55,700 कम एनपीएस बनाए। रिपोर्ट कहती है कि अप्रैल-20 के पेरोल डेटा की तुलना अप्रैल-19 के साथ नहीं की जा सकती है। अप्रैल-19 की तुलना में अप्रैल-2020 में केवल 9% फर्स्ट जॉब का निर्माण किया गया।

2018 के बाद से जारी हो रहा है नियमित आंकड़ा

सरकार ने ईपीएफओ, एनपीएस और ईएसआईसी के रिकॉर्ड का पहला डाटा 2018 में जारी किया था। तब से ईपीएफओ हर महीने नियमित आधार पर आंकड़े प्रकाशित कर रहा है। हालांकि अब इसमें सुधार कर बाहर निकले सदस्यों को नए ईपीएफ ग्राहकों से बाहर है दिखाया जा रहा है। आंकड़ों के मुताबिक एनपीएस पेरोल (नए सब्सक्राइबर) के योगदान में गिरावट दिखी है। सितंबर 2017 से मार्च 2018 के बीच कुल 4 लाख 53 जरा 446 नए सब्सक्राइबर जुड़े। इसमें 76 हजार 185 केंद्र सरकार, 64 हजार 856 गैर सरकारी और 3 लाख 12 हजार 405 सब्सक्राइबर राज्य सरकार के थे।

वित्त वर्ष 2019 में कुल आंकड़ा 7 लाख 50 हजार 440 था जबकि वित्त वर्ष 2020 में यह घटकर 7 लाख 33 हजार 144 हो गया।

सही आंकड़ों के अनुसार 2020 में नए सब्सक्राइबर की संख्या 60.8 लाख

आंकड़े बताते हैं कि अगर सही नंबर देखें जाएं तो वित्त वर्ष 2020 में नए सब्सक्राइबर की संख्या 60.8 लाख थी। यह वित्त वर्ष 2019 की तुलना में 28.9 लाख कम है। 13 जनवरी को एसबीआई की रिपोर्ट में कहा गया था कि पेरोल की संख्या में 16 लाख की कमी आई है। जबकि यह हमारे अनुमान से दोगुना है। इसी तरह जो लोग जॉब छोड़ गए और फिर से नए जॉब पकड़े, ऐसी संख्या में 12.7 लाख की वृद्धि हुई है। इसका अर्थ यह हुआ कि लोग जॉब को शिफ्ट कर रहे हैं।

कम हो सकती है ईपीएफ पर ब्याज दर

एनपीएस के आंकड़े बताते हैं कि नए सब्सक्राइबर की संख्या में 17,256 की कमी आई है। गैर सरकारी पेरोल की संख्या हालांकि 32,336 बढ़ी है जबकि सरकारी पेरोल की संख्या में 55,700 की गिरावट आई है। उधर दूसरी ओर कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) वित्त वर्ष 2020 के लिए घोषित 8.5% ब्याज दर को कम कर सकता है। इससे 6 करोड़ सब्सक्राइबर्स की रिटायर की बचत पर चपत लग सकती है। ग्राहकों को पेमेंट चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में किया जाएगा।

मनरेगा में काम का दिन बढ़कर 184 करोड़ हुआ

लेकिन अच्छी बात यह है कि यदि हम अप्रैल-जून-2020 को एक साथ देखें, तो मनरेगा के माध्यम से 184 करोड़ दिन का लोगों को रोजगार दिया गया। जबकि अप्रैल-जून-2019 में 97 करोड़ दिन का रोजगार दिया गया था। 24 जून तक 99 करोड़ दिन का काम मिला था। मई में 71 करोड़ दिन का काम था। यही आंकड़ा अगर जून 2019 में देखें तो 32 करोड़ था। मई 2019 में 37 करोड़ था। मनरेगा में यह वृद्धि मुख्य रूप से कोरोना प्रकोप के कारण प्रवासी कामगारों को रोजगार प्रदान करने के लिए सरकार की पहल के कारण है।