वित्तीय संकट से जूझ रही टेलीकॉम कंपनी वोडाफोन आईडिया ने म्यूचुअल फंड्स को ब्याज का भुगतान किया

  • फ्रैंकलिन टेंपल्टन इंडिया की योजनाओं के साइड पॉकेट्स को 102.71 करोड़ रुपए का ब्याज मिला है
  • यूटीआई म्यूचुअल फंड और निप्पों इंडिया म्यूचुअल फंड को कुल 100 करोड़ रुपए का ब्याज मिला है

दैनिक भास्कर

Jun 14, 2020, 05:20 PM IST

नई दिल्ली. वोडाफोन आईडिया में अपने एक्सपोजर को साइड पॉकेट्स में डालने वाली म्यूचुअल फंड योजनाओं को 12 जून को वित्तीय संकट से जूझ रही टेलीकॉम कंपनी से ब्याज का भुगतान मिला है। लाइवमिंट की एक रिपोर्ट के मुताबिक फ्रैंकलिन टेंपल्टन इंडिया की बंद हो रही 6 योजनाओं के साइड पॉकेट्स को 102.71 करोड़ रुपए का ब्याज मिला है। यूटीआई म्यूचुअल फंड और निप्पों इंडिया म्यूचुअल फंड को कुल 100 करोड़ रुपए का ब्याज मिला है।

भारी वित्तीय संकट से गुजर रही है वोडाफोन आईडिया

वोडाफोन आईडिया भारी वित्तीय संकट से जूझ रही है। दूरसंचार विभाग ने एडजस्टेड ग्रॉस रिवेन्यू (एजीआर) के आधार पर वोडाफोन आईडिया की देनदारी करीब 53,000 करोड़ रुपए तय की है। एजीआर मुद्दे पर 11 जून को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान कंपनी ने कहा था कि उसके पास कर्मचारियों को वेतन देने के जरूरी पैसा भी नहीं है। एजीआर भुगतान के मुद्दे पर अदालत में अगली सुनवाई 18 जून को होनी है, जिसमें टेलीकॉम कंपनियों को बताना है कि वे एजीआर से जुड़ी बकाया राशि का भुगतान कैसे करेंगी।

फ्रैंकलिन टेंपल्टन की बंद हो रही 6 योजनाओं के निवेशकों को मिलेगा फायदा

बिजनेस स्टैंडर्ड की एक रिपोर्ट के मुताबिक वोडाफोन आईडिया द्वारा दिया गया ब्याज फ्रैंकलिन  टेंपल्टन एमएफ (एफटी एमएफ) को भी मिला। एफटी एमएफ की बंद हो रही 6 योजनाओं में वोडाफोन आईडिया के डेट पेपर का एक्सपोजर है। ब्याज की यह राशि उन निवेशकों को वितरित कर दी जाएगी, जिनका निवेश 24 जनवरी को छह योजनाओं में था। एफटी एमएफ के एक प्रवक्ता ने कहा कि 12 जून 2020 को 8.25 फीसदी की दर से ब्याज मिला है। सिग्रेटेड पोर्टफोलिया के प्लान में होल्डिंग के अनुपात में निवेशकों को ब्याज राशि वितरित की जाएगी। बांड 10 जुलाई 2020 को मैच्योर होना होगा। सिग्रिगेशन से पहले 31 दिसंबर 2019 को इन बांड में योजनाओं का एक्सपोजर 1,124.2 करोड़ रुपए का था। वोडाफोन आईडिया के कुछ अन्य बांड सितंबर 2023 को मैच्योर हो रहे हैं।

यूटीआई क्रेडिट रिस्क फंड को मिला 12.38 करोड़ रुपए का ब्याज

यूटीआई एमएफ ने एक बयान में कहा कि वोडाफोन आईडिया ने यूटीआई क्रेडिट रिस्क फंड में 12.38 करोड़ रुपए सालाना ब्याज का भुगतान किया है। इस फंड हाउस ने 17 फरवरी 2020 को 65 फीसदी घटे हुए मूल्य पर वोडाफोन आईडिया का अलग पोर्टफोलियो बनाया था। कुछ अन्य जानकार सूत्रों के मुताबिक पोर्टफोलिया सिग्रिगेशन से पहले 31 जनवरी 2020 को निप्पों इंडिया एमएफ के हाइब्रिड बांड फंड का वोडाफोन आईडिया के डेट पेपर्स में 39 करोड़ रुपए का एक्सपोजर था। निप्पों इंडिया एमएफ के स्ट्रैटेजिक डेट फंड और क्रेडिट रिस्क फंड का भी वोडाफोन आईडिया में एक्सपोजर है।

केयर रेटिंग ने फरवरी में वोडाफोन आईडिया की घटा दी थी रेटिंग

केयर रेटिंग ने 17 फरवरी 2020 को वोडाफोन आईडिया की रेटिंग बीबीबी- से घटाकर बीबी- कर दी थी। बीबी- निवेश ग्रेड से नीचे की रेटिंग है। डेट की रेटिंग जब घटकर निवेश ग्रेड से नीचे चली जाती है, तब म्यूचुअल फंड उसमें अपने एक्सपोजर को साइड पॉकेट कर सकते हैं।  यूटीआई और निप्पों इंडिया एमएफ ने वोडाफोन आईडिया में अपने-अपने एक्सपोजर को 17 फरवरी को साइड पॉकेट में डाल दिया था। फ्रैंकलिन ने क्रिसिल द्वारा रेटिंग घटाए जाने के बाद 24 जनवरी को ही वोडाफोन आईडिया में 6 डेट योजनाओं के एक्सपोजर को साइड पॉकेट में डाल दिया था। फंड हाउस ने 23 अप्रैल को इन 6 योजनाओं को बंद करने का फैसला किया था।

क्या है साइड पॉकेट?

आईएलएंडएफएस के डिफॉल्ट कर जाने के बाद म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री चाहती थी कि संकटग्रस्त कंपनियों के बॉन्डों में निवेश कर चुकी स्कीमों को साइड पॉकेटिंग की इजाजत मिले। बाजार नियामक सेबी ने इसकी अनुमति दे दी। अब कुछ स्कीमों ने साइड पॉकेटिंग शुरू कर दी है। साइड पॉकेट विकल्प का इस्तेमाल डेट पोर्टफोलियो में जोखिम वाले एसेट को अन्य लिक्विड एसेट से अलग करने के लिए होता है। अकाउंटिंग के इस तरीके को अपनाकर छोटे निवेशकों को उस वक्त बचाया जा सकता है जब अचानक बड़े निवेशक स्कीम से पैसा निकालना शुरू कर दें। साइड पॉकेटिंग नेट एसेट वैल्यू (NAV) में स्थिरता लाने में मदद करती है। इस प्रक्रिया में पोर्टफोलियो में डिफॉल्ट कैटेगरी में शामिल इंस्ट्रूमेंट को दूसरों से अलग करते हैं। इससे दो स्कीमें तैयार हो जाती है। एक में वे इंस्ट्रूमेंट या बॉन्ड होते हैं जिनमें लिक्विडिटी नहीं होती है और दूसरे में वे जिनमें अच्छी लिक्विडिटी होती है। ओरिजनल फंड के सभी निवेशकों को साइड पॉकेट किए गए फंडों की भी यूनिटें मिलती हैं। जब कभी प्रभावित कंपनी पैसे लौटाती है। निवेशक अपने पैसे पा जाते हैं।