वंदे भारत मिशन में शुरू हुई दिक्कतें, यात्रियों को ज्यादा कीमत और वेबसाइट पर समस्या का सामना करना पड़ता है

  • यात्रियों ने कहा कि रूट पर दोगुना किराया लिया जा रहा है
  • एअर इंडिया साइट को मई के पूरे महीने के लिए 48 लाख हिट्स मिले

दैनिक भास्कर

Jun 08, 2020, 09:00 PM IST

मुंबई. एअर इंडिया की स्पेशल अंतर्राष्ट्रीय सेवा वंदे भारत को लेकर अब कमियां सामने आने लगी हैं। विदेशों में फंसे भारतीयों को घर लाने का मिशन इसके जरिए पूरा किया जा रहा है। लोगों का कहना है कि एक तो इसके टिकट की कीमत बहुत ज्यादा है और दूसरे इसकी वेबसाइट पर काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

बहुत सारी कंपनियों को अनुमति दी गई है सेवा की 

कई पैसेंजर्स ने तो सरकार की इस बात की आलोचना की है कि उन्होंने बहुत सारी कंपनियों को इसके लिए अनुमति दी है। इसका किराया काफी ज्यादा है। वंदे भारत के तहत इकोनॉमी क्लास की फ्लाइट का टिकट मुंबई से ह्यूस्टन के लिए 1.03 लाख रुपए है जो कि आम दिनों की तुलना में दोगुना है। इसके अलावा दिल्ली से टोरंटो और दिल्ली से वेंकूवर के टिकट की कीमत 1.07 लाख रुपए है।

अमेरिका, ब्रिटेन के लिए 50 प्रतिशत ज्यादा किराया

अमेरिका और ब्रिटेन के लिए वंदे भारत की इकॉनमी उड़ानों का शुरूआती किराया सामान्य से कम 50 फीसद अधिक है और सीटें तेजी से फुल हो जाती हैं। लोगों के पास कोई दूसरा विकल्प नहीं है। भारत के सबसे बड़े ऑफलाइन ट्रैवल एजेंटों में से एक ने कहा, यह शुद्ध व्यवसाय है और कोई मिशन या महान सेवा कार्य नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि हमें एअर इंडिया की वेबसाइट की गड़बड़ियों पर हर रोज प्रश्न मिलते हैं। लेकिन समस्या यह है कि एअर इंडिया सभी इन्वेंट्री को नियंत्रित करती है और हम टिकट नहीं बेच सकते।

कई यात्रियों ने 9 गुना ज्यादा किराया की शिकायत की

कई मुश्किलों से परेशान ग्राहक अंकित श्रीवास्तव ने पिछले हफ्ते एक ट्वीट में कहा था कि संभावनाएं हैं कि हम नौ गुना किराया दें और एअर इंडिया को अमीर बनाएं। उन देशों के लिए कोई उड़ानें नहीं हैं जो अनुमति दे रहे हैं। एअर इंडिया की वेबसाइट पर ही करना है जिसमें पैसे कटने के बाद लगातार ट्रांजैक्शन फेल हो रहा है। ट्विटर हैंडल skipper से एज यूजर द्वारा शेयर किए गए स्क्रीनशॉट में 1.06 लाख रुपए की कीमत वाले टिकट के लिए 26,341 रुपए फ्यूल सरचार्ज दिखाया गया। ग्राहकों को रेंडम किराया बढ़ोतरी की भी शिकायत है।

टिकट कैंसल होता है और अगले दिन दोगुना हो जाता है किराया

एक जापानी ई-कॉमर्स कंपनी के साथ काम करने वाले एक इंजीनियर ने कहा कि वे दिल्ली से टोक्यो के लिए टिकट बुक करना चाहते थे। उनको टिकट के लिए 45,000 रुपए का भुगतान करने के बाद “cancelled” का संदेश मिला। अगले ही दिन उन्हें उसी टिकट के लिए दुगुना भुगतान करना पड़ा। 25 मार्च के बाद से जब सभी उड़ानों को राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन के चलते निलंबित कर दिया गया था, विमानन नियामक ने 640 ऐसी चार्टर्ड उड़ानों की अनुमति दी है जिन्होंने विदेशों से 138,000 यात्रियों को ढोया है।

6 मई से अब तक 65,000 यात्रियों को लाया गया

हाल में एविएशन मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने ट्वीट कर कहा था कि 6 मई से अब तक 65,000 भारतीयों को 350 वंदे भारत फ्लाइट से स्वदेश लाया गया है। कुछ लोग पुरी के तर्क से सहमत नहीं हैं। कतर एयरवेज ने पिछले महीने दोहा में भारतीयों को वापस घर लाने की पेशकश की थी। लेकिन नेशनल कैरियर एअर इंडिया एक्सप्रेस की सहायक कंपनी उस मार्ग पर उड़ानों का संचालन जारी रखे हुए है। कतर अमेरिका के लिए स्वदेश वापसी उड़ाने भर रहा है ।

एअर इंडिया के अलावा कई कंपनियों को मिली मंजूरी

कुछ हफ्ते पहले नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने अन्य निजी एयरलाइंस को वंदे भारत मिशन में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया था। इसने पहले इंडिगो, स्पाइसजेट, गोएयर और विस्तारा द्वारा दो सप्ताह में संचालित की जाने वाली 180 उड़ानों का आवंटन किया। बाद में इसमें कटौती कर इसे सिर्फ 43 कर दी। यह उड़ानें कुवैत, ओमान, सऊदी अरब, यूएई, मलेशिया और सिंगापुर से अहमदाबाद, श्रीनगर, भुवनेश्वर, रांची, नागपुर और जोधपुर जैसे कम डिमांड वाले शहरों में संचालित की जाएंगी।

दो घंटे में मिले 6 करोड़ हिट्स

इसके अलावा एअर इंडिया द्वारा पहले से लिए गए चार्ज के हिसाब से ही मंत्रालय द्वारा किराए का निर्णय लिया जाएगा। इस पर अंतिम फैसला होना बाकी है। शुक्रवार को एयर इंडिया ने दावा किया कि उसकी वेबसाइट को वंदे भारत फ्लाइट के टिकट के लिए शाम पांच बजे से दो घंटे में 6 करोड़ हिट्स मिले। एक प्रतिद्वंदी एयरलाइन के विश्लेषण से पता चला कि एअर इंडिया साइट को मई के पूरे महीने के लिए 48 लाख हिट्स मिले। इंडिगो को 75 लाख हिट्स मिले। स्पाइसजेट को 27 लाख हिट्स मिले।

ट्रैवल पोर्टल मेकमायट्रिप को 15.9 मिलियन विजिटर मिले। इसके अलावा कुछ अधिकारियों ने बताया कि अमेरिका, ब्रिटेन और संयुक्त राष्ट्र में एनआरआई की संख्या 90 लाख से अधिक नहीं है।