लॉकडाउन में छूट के बावजूद बेरोजगारी दर 24 फीसदी बढ़ी, अर्थव्यवस्था को सुधरने में लग सकता है काफी वक्त : CMIE

  • CMIE की रिपोर्ट में कहा गया है कि आने वाले दिन श्रमिकों के लिए मुश्किल भरे होंगे
  • कोरोना संकट के चलते भारत में लोगों के रोजगार में जबरदस्त कमी आई है

दैनिक भास्कर

May 20, 2020, 08:11 AM IST

नई दिल्ली. देशव्यापी लॉकडाउन में छूट के बावजूद भारत में बेरोजगारी दर बढ़ती ही जा रही है। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (CMIE) के अनुसार 17 मई को खत्म हफ्ते में बेरोजगारी की दर 24 फीसदी रही है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 17 मई को खत्म हफ्ते में बेरोजगारी की दर 24 फीसदी रही है, यह लगभग अप्रैल के जैसा ही है। यानी कि 20 अप्रैल से लॉकडाउन में ढील दिए जाने के बावजूद बेरोजगारी दर पर खास असर नहीं पड़ा है।

हालांकि इस ढील का श्रम भागीदारी दर पर जरूर थोड़ा असर हुआ है। इसमें बढ़त हुई है जो कि 26 अप्रैल के हफ्ते में अब तक के सबसे निचले स्तर 35.4 फीसदी तक पहुंच गई थी। 17 मई के हफ्ते में यह बढ़कर 38.8 फीसदी तक पहुंच गई है।

श्रमिकों के लिए रहेंगे मुश्किल भरे दिन

CMIE रिपोर्ट के मुताबिक, अर्थव्यवस्था को सुधरने में काफी समय लग सकता है और श्रमिकों के लिए अभी आने वाले दिन मुश्किल भरे ही रहेंगें। ट्रांसपोर्ट सेवाएं शुरू होने के बाद कुछ आर्थिक गतिविधियां बढ़ने को लेकर संभावना जताई जा रही है।

बेरोजगारी ने बनाया था रिकॉर्ड

कोरोना संकट और लॉकडाउन की वजह से भारत में लोगों के रोजगार में जबरदस्त कमी आ गई है। इसके पहले सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (CMIE) के अनुसार, 3 मई को खत्म हफ्ते में बेरोजगारी दर बढ़कर रिकॉर्ड 27.11 फीसदी तक पहुंच गई थी। यानी हर चार में से एक व्यक्ति बेरोजगार हो गया। यह देश में अब तक की सबसे ज्यादा बेरोजगारी की दर है।

84% से अधिक घरों में मासिक आमदनी में गिरावट

हाल में जारी सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी कि रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के 84 फीसदी से ज्यादा घरों की मासिक आमदनी में गिरावट दर्ज की गई है। देश में कामकाजी आबादी का 25% हिस्सा इस समय बेरोजगार हो चुका है।

2.70 करोड़ युवाओं की नौकरी गई

सीएमआईई की स्टडी के मुताबिक देश में बेरोजगारी के आंकड़े भी तेजी से बढ़े हैं। 21 मार्च को भारत में बेरोजगारी की दर 7.4 फीसदी थी, जो 5 मई को बढ़कर 25.5 फीसदी हो गई है। स्टडी के मुताबिक देश में 20 से 30 साल आयु वर्ग के 2 करोड़ 70 लाख युवाओं को अप्रैल में नौकरी से हाथ धोना पड़ा है।