लाइव शो में गंभीर ने प्रसाद से कहा- सिलेक्टर्स के कुछ फैसले हैरान करने वाले थे, उनका ज्यादा अनुभवी होना जरूरी

  • गौतम गंभीर ने शो में कहा- कप्तान और कोच को सिलेक्शन प्रक्रिया में वोटिंग का अधिकार मिलना चाहिए
  • अंबाती रायडू को वर्ल्ड कप में न जुने जाने पर भी गंभीर ने पूर्व चीफ सिलेक्टर एमएसके प्रसाद पर सवाल उठाए

दैनिक भास्कर

May 22, 2020, 04:27 PM IST

पूर्व क्रिकेटर युवराज सिंह, सुरेश रैना के बाद गौतम गंभीर ने भी सिलेक्शन प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं। गंभीर ने एक टीवी शो में पूर्व चीफ सिलेक्टर एमएसके प्रसाद और के. श्रीकांत से कहा कि सिलेक्टर्स को ज्यादा अनुभवी होना चाहिए। उनके इस बयान का प्रसाद ने विरोध किया और दोनों में इसे लेकर नोंकझोंक हुई।

प्रसाद ने अपने करियर में 17 वनडे और सिर्फ 6 टेस्ट ही खेले थे। गंभीर ने इस शो में कहा- अब समय आ गया है कि कप्तान और कोच को सिलेक्शन प्रक्रिया में वोटिंग का अधिकार मिलना चाहिए। समय आ गया है कि अब कप्तान भी सिलेक्टर बने। प्लेइंग-11 में सिलेक्टर्स का कोई दखल नहीं होगा चाहिए।

टीम चुनने का पूरा अधिकार कप्तान के पास होना चाहिए: गंभीर 

टीम चुनने का अधिकार पूरी तरह कप्तान के पास होना चाहिए। इस पर पूर्व चीफ सिलेक्टर ने कहा कि टीम सिलेक्शन में हमेशा कप्तान की सलाह ली जाती है। इसमें कोई दो राय नहीं है। लेकिन बीसीसीआई के नियमों के तहत उसके पास वोटिंग का अधिकार नहीं होता है। 

‘नंबर-4 के लिए सिलेक्टर बल्लेबाज नहीं ढूंढ पाए’

गंभीर ने इस दौरान नंबर-4 पर स्थायी बल्लेबाज ढूंढने में नाकाम रहने पर पूर्व चीफ सिलेक्टर एमएसके प्रसाद को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि नंबर-4 पर बल्लेबाज नहीं ढूंढ पाने का भारत को वर्ल्ड कप में खामियाजा उठाना पड़ा।

रायडू को न चुनना हैरान करने वाला फैसला: गंभीर
इस पूर्व बल्लेबाज ने कहा, ‘‘सिलेक्टर्स के कई फैसला चौंकाने वाले रहे। कम से कम अंबाती रायडू को वर्ल्ड कप के लिए न चुनना तो हैरान करने वाला था। इसके बाद देखिए कि रायडू के साथ क्या हुआ। आपने उसे दो साल के लिए टीम में रखा। इस दौरान उसने चार नंबर पर बल्लेबाजी की। लेकिन वर्ल्ड कप से ठीक पहले आपको थ्री-डी प्लेयर की जरूरत पड़ गई।

क्या सिलेक्शन कमेटी के चेयरमैन से ऐसे बयान की अपेक्षा की जाती है कि हमें थ्री-डी प्लेयर की जरूरत है। 
प्रसाद ने विजय शंकर को ‘थ्री-डी प्लेयर’ बताया था

इस पर प्रसाद ने सफाई देते हुए कहा कि टीम में ऊपरी क्रम में रोहित, विराट, शिखर यह सब बल्लेबाज थे। इनमें से कोई भी गेंदबाजी नहीं कर सकता था। ऐसे में इंग्लैंड के मौसम के हिसाब से हमें ऐसा खिलाड़ी चाहिए था, जो ऊपरी क्रम में बल्लेबाजी करने के अलावा गेंदबाजी भी कर पाए। इसलिए विजय शंकर को चुना गया। 

तब प्रसाद ने कहा था कि वे थ्री-डी क्रिकेटर हैं। क्योंकि बल्लेबाजी, गेंदबाजी के साथ वे अच्छी फील्डिंग भी कर सकते हैं। हालांकि, उनके इस बयान की रायडू के अलावा कई दिग्गजों ने आलोचना की थी। 

सिलेक्शन कमेटी के चेयरमैन का अनुभवी होना जरूरी
गंभीर ने प्रसाद और श्रीकांत से कहा, ‘‘सिलेक्शन कमेटी के चेयरमैन को अनुभवी क्रिकेटर होना चाहिए, जिसने काफी संख्या में अंतरराष्ट्रीय मैच खेले हों। साथ ही वह इंटरनेशनल क्रिकेट के उतार चढ़ाव को अच्छे से समझता हो।

‘आप जितना ज्यादा खेलते हैं, उतना बेहतर खिलाड़ियों को समझते हैं। श्रीकांत ने बहुत सारे मैच खेले हैं। उन्होंने भारत की कप्तानी भी की है। उन्हें यह अच्छे से पता है कि खिलाड़ी क्या महसूस करता है। खिलाड़ियों औऱ सिलेक्टर्स के बीच रिश्ता होना जरूरी है।’

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