रेटिंग डाउनग्रेड के बाद भी भारतीय बाजार ने किया अच्छा प्रदर्शन, इस साल अब तक 21 देशों की रेटिंग या तो डाउनग्रेड हुई या निगेटिव हुई

  • मंगलवार को सेंसेक्स 522 अंक बढ़कर बंद हुआ
  • डॉलर की तुलना में रुपया 19 बीपीएस कमजोर हुआ
  • जी-सेक यील्ड 2 बीपीेस गिरकर कारोबार किया

दैनिक भास्कर

Jun 02, 2020, 06:03 PM IST

मुंबई. मूडीज ने भारत की रेटिंग सोमवार को बीएए2 से घटाकर बीएए3 कर दी। हालांकि इस साल में अब तक 21 देशों की रेटिंग या तो डाउनग्रेड हुई या निगेटिव हो गई। मूडीज के डाउनग्रेड के बाद भारतीय बाजार ने मंगलवार को अच्छा प्रदर्शन किया है। सेंसेक्स ने 522 अंक की बढ़त हासिल की। हालांकि डॉलर की तुलना में रुपया 75.36 पर पहुंच गया। सोमवार को यह 75.55 पर था। यानी 19 बीपीएस कमजोर हुआ है। 10 साल की सरकारी प्रतिभूतियों (जी सेक) की दर 2 बीपीएस गिरकर 5.76 पर आ गई है।

एमर्जिंग अर्थव्यवस्था पर हमेशा डाउनग्रेड की आशंका बनी रहती है

एसबीआई की ओर से जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि यह कोई चौंकानेवाला फैसला नहीं है। क्योंकि विकसित देशों की तुलना में उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं में हमेशा डाउनग्रेड की आशंका बना रहती है। यहां तक कि किसी देश का अगर जीडीपी के अनुपात की तुलना में कम कर्ज है तो भी यह आशंका उस पर बनी रहती है। मूडीज ने सॉवरेन रेटिंग डाउनग्रेड करने के अलावा 11 भारतीय बैंकों की भी रेटिंग डाउनग्रेड की है।

डाउनग्रेड के बाद अपग्रेड भी होती है रेटिंग

वैसे रेटिंग एजेंसियां हमेशा ग्रोथ को लेकर अपना ध्यान केंद्रित करती हैं। यह देखा गया है कि जो देश पहले डाउनग्रेड हुए थे, वे बाद में अपग्रेड भी हुए क्योंकि उसमें सुधार देखा गया था। एसबीआई रिपोर्ट कहती है कि वर्तमान में हमारे देश का जो फॉरेक्स रिजर्व है वह डेट से निपटने के लिए काफी ज्यादा है। मूडीज के डाउनग्रेड का तुरंत कोई असर न तो बांड पर होगा न एक्सचेंज रेट पर होगा और न ही भारत के ऑफशोर बांड्स पर होगा।

करेंट अकाउंट बैलेंस पॉजिटिव है, फिर भी डाउनग्रेड

रिपोर्ट कहती है कि मूडीज के डाउनग्रेड करने के बाद भी मंगलवार को भारतीय शेयर बाजारों में अच्छी तेजी दिखी। सेंसेक्स 522 अंक बढ़कर बंद हुआ। एसबीआई रिपोर्ट कहती है कि अगर हाल का मामला देखा जाए तो हांगकांग, बोत्सवाना आदि का करेंट अकाउंट बैलेंस पॉजिटिव है। बोत्सवाना, जांबिया, इथोपिया के पास जीडीपी की तुलना में कम डेट है। बावजूद इसके मूडीज ने इसके आउटलुक को निगेटिव कर दिया या डाउनग्रेड कर दिया है।

अर्थव्यवस्था ध्वस्त हुई, फिर भी अपग्रेड हुई रेटिंग

ऐसा भी हुआ है कि कई बार अर्थव्यवस्था ध्वस्त हुई है, बावजूद इन देशों की रेटिंग अपग्रेड हुई है। उदाहरण के तौर पर 1999 में मलेशिया और 2003 में इंडोनेशिया के साथ ऐसा हुआ है। मूडीज ने कहा कि भारत का कुल डेट जीडीपी के अनुपात में 30 प्रतिशत ऊंचा है जो बीएए मीडियन से ऊपर है। अनुमान है कि यह इस साल 84 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। एसबीआई रिपोर्ट कहती है कि भारत का सॉवरेन एक्सटर्नल डेट कुल एक्सटर्नल डेट की तुलना में 20 प्रतिशत है।

बैंक ऑफ जापान के साथ 75 अरब डॉलर का स्वैप

यही नहीं, आरबीआई ने बैंक ऑफ जापान के साथ 75 अरब डॉलर का स्वैप किया है। इससे किसी भी अचानक आनेवाली घटनाओं से निपटा जा सकता है। चूंकि भारत का इंटरनल डेट में से ज्यादातर डेट घरेलू है इसलिए यह कोई दिक्कत वाला मामला नहीं है। अगर ऊच्च रेटिंग वाले सॉवरेन देशों से तुलना की जाए तो भारत का कर्ज जीडीपी की तुलना में काफी कम है। रिपोर्ट कहती है कि भारत से पहले 21 देशों की रेटिंग डाउनग्रेड या निगेटिव कर दी गई थी। इसलिए भारत के बारे में यह संभवाना थी। हालांकि इससे भारत पर कोई फर्क अभी नहीं पड़ा है।

1992 से अब तक कई बार डाउनग्रेड हुई है देश की रेटिंग

रिपोर्ट के अनुसार, 1992 से अब तक एक बार स्टैंडर्ड एंड पूअर्स ने, दो बार मूडीज ने एक बार फिच ने भारत की रेटिंग अपग्रेड की है। 1992 में भारत की रेटिंग एसएंडपी की ओर से बीबी प्लस थी। यह इस समय बीबीबी माइनस है। मूडीज की रेटिंग इसी अवधि में बीए2 से बीएए3 हो गई है। जबकि फिच ने साल 2000 में बीबी प्लस दी थी जो अब बीबीबी माइनस है। डीबीआरएस ने 2007 में बीबीबी दी थी जो अब तक बरकरार है।

इस साल जिन देशों की रेटिंग पर निगेटिव असर पड़ा है उसमें प्रमुख रूप से लेबनान, मालदीव, मारीशस, मैक्सको, नांबिया, ओमान, रोमानिया, दक्षिण अफ्रीका, सूरीनाम, जांबिया आदि हैं। इसमें से 6 देशों को छोड़ दें तो बाकी सबकी जीडीपी में वृद्धि रही है। कई देशों का जीडीपी की तुलना में कर्ज भी काफी कम है। बावजूद इसके इनकी रेटिंग डाउनग्रेड की गई है।