मन्नापुरम फाइनेंस के मामले में एंबिट कैपिटल पर 15.30 लाख का सेटलमेंट चार्ज लगा, सुराना कॉर्प सहित कई कंपनियों पर 90 लाख रुपए की सेबी ने लगाई पेनाल्टी

  • एंबिट कैपिटल ने मन्नापुरम की गुप्त जानकारियों को पब्लिश किया था
  • इसके आधार पर एंबिट कैपिटल के कुछ क्लाइंट मन्नापुरम के शेयरों को बेच दिए थे

दैनिक भास्कर

Jun 26, 2020, 08:54 PM IST

मुंबई. पूंजी बाजार नियामक सेबी ने अलग-अलग मामलों में शुक्रवार को कुल 1 करोड़ 15 लाख रुपए की पेनाल्टी और सेटलमेंट चार्ज लगाया। पहले मामले में सेबी ने जांच में पाया कि 19 मार्च 2013 को मन्नापुरम फाइनेंस लिमिटेड के शेयरों में 20 प्रतिशत की गिरावट आई। हालांकि बाद में बीएसई पर शेयरों की कीमतें बढ़ी।

ऐसा इसलिए क्योंकि कंपनी ने सूचना दी कि सोने की कीमतों में गिरावट से उसके लोन की रिकवरी हो सकती है। यह भी पाया गया कि कंपनी ने तिमाही वित्तीय परिणाम की कुछ जानकारियां एंबिट कैपिटल को भी दी।

मन्नापुरम फाइनेंस की सूचनाएं लीक की गईं

मन्नापुरम बोर्ड की मीटिंग 13 मार्च 2013 को हुई थी। यह संभावना थी कि कंपनी निगेटिव लाभ को पेश करेगी। 18 मार्च 2013 को एंबिट कैपिटल ने मीटिंग की और उसमें यूपीएसआई (संवेदनशील और गुप्त सूचनाओं) की बात सामने आई। इस मीटिंग के बाद एंबिट कैपटल ने मन्नापुरम के स्टॉक को खरीदने की रेटिंग से घटाकर रिव्यू की रेटिंग कर दी। इसे रिसर्च रिपोर्ट बनाकर पब्लिश कर दी। यह रिपोर्ट कुछ ग्राहकों को 19 मार्च को बाजार खुलने से पहले दे दी गई।

सूचनाओं को पाने पर ग्राहकों ने शेयरों को बेचा

एंबिट कैपिटल के जिन ग्राहकों को यह रिपोर्ट मिली उन्होंने शेयरों को बेच दिया। इसी बीच एंबिट कैपिटल की कंप्लायंस ऑफिसर प्रियंका जैन कोड ऑफ कंडक्ट को लागू करने में फेल हो गईँ। सेबी ने इसके बाद सेटलमेंट ऑर्डर जारी किया जिसमें 15 लाख 30 हजार रुपए सेटलमेंट चार्ज के रूप में देने का आदेश दिया।

सुराना मामले  में 50 लाख रुपए की पेनाल्टी

इसी तरह सुराना कॉर्पोरेशन के मामले में सेबी ने 50 लाख रुपए की पेनाल्टी लगाई है। इसमें कंपनी के एमडी विजयराज सुराना पर 25 लाख और कंपनी पर 25 लाख रुपए की पेनाल्टी लगाई गई है। इसके अलावा एक लाख रुपए की पेनाल्टी सीएस पृथ्वीराज जैन पर लगाई गई है। सेबी की जांच के मुताबिक रेवेन्यू डिपार्टमेंट (डीआरआई) की चेन्नई यूनिट ने कंपनी के शोरूम और फैक्टरी पर अक्टूबर 2014 में जांच की थी। इसमें डीआरआई ने स्टॉक डॉक्यूमेंट की खरीदी और बिक्री से संबंधित कागजात जब्त किए थे।

कंपनी ने आर्टिफिशियल कागजात तैयार किए

जांच में पता चला कि यह कागजात आर्टिफिशियल थे। इसी कागजात के आधार पर कंपनी ने बैंकों से कर्ज भी लिया था। कंपनी के एमडी विजयराज सुराना ने जो कागजात सौंपे थे वे सेबी की जांच में सही नहीं निकले। सेबी की नोटिस के बाद सुराना ने हालांकि 2015 नवंबर में एमडी के पद से इस्तीफा दे दिया था। पर इस इस्तीफे का कोई खास कारण कंपनी नहीं दे पाई। सेबी ने पाया कि बिक्री के जो आंकड़े थे वे गलत दिखाए गए थे। इसमें यह पता चला कि कंपनी के ही अधिकारी मिलकर 3 खातों को चला रहे थे। इसमें एक व्यक्ति सोने को बेचता था तो दूसरा उसे खरीदता था।

मिस्टिक इलेक्ट्रॉनिक्स मामले में 15 पर प्रतिबंध

एक अन्य मामले में सेबी ने मिस्टिक इलेक्ट्रॉनिक्स के केस में 15 लोगों और कंपनियों को बाजार में कारोबार करने पर प्रतिबंध लगा दिया है। इसमें फंक्शन फाइनेंशियल कंसलटेंट, टॉपवेल प्रॉपर्टीज, हेल्पफुल इनवेस्टमेंट, शिवकोरी कंसलटेंट, कंफोर्ट डीलकाम, मैनकाइंड आदि का समावेश है। यह कंपनी कंप्यूटर हार्डवेयर एंड सॉफ्टवेयर में ट्रेडिंग और प्रोक्यूरमेंट का काम करती थी। सेबी ने पाया कि इन लोगों ने मिस्टिक कंपनी के शेयरों में मेनिपुलेशन किया।

कंपनी के रेवेन्यू और शेयरों में दिखा अंतर

कंपनी का रेवेन्यू 2013 में 68.9 करोड़ रुपए जबकि शुद्ध लाभ 0.34 मिलियन रुपए था। 2015 मेंरेवेन्यू घटकर 16.94 मिलियन और लाभ बढ़कर 6.01 मिलियन हो गया। इससे सेबी को पता चला कि कंपनी की बैलेंसशीट और शेयर की कीमतों में बहुत ज्यादा अंतर है। शेयरों के स्पिलिट होने से इसके भाव में बहुत उतार-चढ़ाव देखा गया। एक दिन शेयर 5 रुपए पर खुला और यह 6.10 रुपए पर पहुंच गया। इसी तरह यह शेयर कुछ दिनों में 68 रुपए तक पहुंच गया।

शेयर बेचकर 33.99 करोड़ रुपए का फायदा कमाए

सेबी ने पाया कि जिन लोगों को शेयर स्पिलिट के समय अलॉट किए गए उन लोगों ने बाद में शेयर बेच दिए। इन शेयरों को 39.4 करोड़ रुपए में बेचा गया। इससे इन लोगों को 33.99 करोड़ रुपए का फायदा हुआ। इससे शेयरों की कीमतों में भारी गिरावट आई।

निटवर्थ एक्सपोर्ट पर 25 लाख की पेनाल्टी

एक अन्य मामले में सेबी ने 25 लाख रुपए की पेनाल्टी लगाई है। निटवर्थ एक्सपोर्ट के मामले में सेबी ने यह पेनाल्टी लगाई है। सेबी ने जांच में पाया कि इन लोगों ने जितना शेयर अधिग्रहण किया उस आधार पर इनको ओपन ऑफर लाना था। लेकिन इन लोगों ने ओपन ऑफर नहीं लाया। इसी मामले में यह पेनाल्टी लगाई गई है।

पांच लोगों पर पांच-पांच लाख की पेनाल्टी

एक अन्य मामले में सेबी ने पांच लोगों पर पांच-पांच लाख रुपए की पेनाल्टी लगाई है। इसमें देवांग पटेल, सोनल देवांग पटेल, मनिषाबेन पटेल, राजेश कुमार और किशोर शर्मा का समावेश है। सेबी के मुताबिक ये लोग ढेर सारी कंपनियों के जरिए क्यूपिड ट्रेड एंड फाइनेंस के शेयरों में खरीदी बिक्री कर रहे थे। सेबी ने पाया कि इस कंपनी के शेयर की कीमत 6 जनवरी 2010 को 33 रुपए पर खुली और नवंबर 2012 को यह 275 रुपए पर पहुंच गई।

हालांकि बाद में यह गिरकर 11 अप्रैल 2013 को 81.85 रुपए पर आ गई। सेबी ने पाया कि इसी दौरान इन लोगों ने शेयरों की आपस में खरीदी बिक्री कर लाभ कमाए।