भारत का चालू वित्त वर्ष में करेंट अकाउंट सरप्लस 20 अरब डॉलर रहने का अनुमान, 2006-07 के बाद पहली बार होगा- बार्कलेज

  • मार्च महीने में निर्यात 60 प्रतिशत तक गिरा
  • अप्रैल में आयात 59 प्रतिशत तक गिरा

दैनिक भास्कर

May 19, 2020, 09:42 PM IST

मुंबई. वैश्विक स्तर पर कोविड-19 के अवरोधों के कारण आयात में गिरावट जारी है। इसलिए भारत चालू वित्त वर्ष में करेंट अकाउंट सरप्लस के रूप में जीडीपी का लगभग 20 बिलियन डॉलर या 70 बीपीएस रख सकता है। हालांकि अभी तक देश लगातार भारी चालू खाते के घाटे से जूझ रहा है।

सस्ते क्रूड के कारण ऐसा हो सकता है

विदेशी ब्रोकरेज बार्कलेज ने कहा है कि फिर से सस्ते क्रूड के कारण ऐसा हो सकता है। इससे पहले देश में करेंट अकाउंट सरप्लस 2006-07 की पहली तिमाही में था।रिपोर्ट के अनुसार दरअसल, विकास की बिगड़ती रफ्तार के कारण एक्जिम ट्रेड 2019 के जरिए संतुलन बना रहा है। 25 मार्च से राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन के बाद दोनों निर्यात में और आयात अप्रैल में  भारी गिरावट आई है। बंदरगाहों के लगभग पूरी तरह से बंद को देखते हुए, निर्यात मार्च महीने में 60 प्रतिशत तक गिर गया, जबकि अप्रैल में आयात 59 प्रतिशत तक गिर गया। इससे चार वर्षों में सबसे छोटा मासिक व्यापार घाटा हुआ।

माल व्यापार घाटा कम होता रहेगा

रिपोर्ट में कहा गया है कि माल व्यापार घाटा कम होता रहेगा। वित्त वर्ष 2020-21 में जीीडीपी के सिर्फ 103 अरब डॉलर या 3.7 प्रतिशत की कमी का पूर्वानुमान लगाया गया है। धीमी हो रही अर्थव्यवस्था से करंट अकाउंट डेफिसिट वित्त वर्ष 2018 में जो 66 अरब डॉलर था, घटकर वित्त वर्ष 2019 में 27 अरब डॉलर हो गया है। यह काफी हद तक छोटे व्यापार घाटे से प्रेरित है।

पहले के अनुमान को बढ़ाया गया

करेंट अकाउंट ट्रैकर Q1 में 3 बिलियन अमरीकी डॉलर के छोटे चालू खाते के घाटे की ओर इशारा करता है। बार्कलेज ने कहा, इसे देखते हुए, हम अपने खाते के सरप्लस के पूर्वानुमान को वित्त वर्ष 21 के लिए 19.6 बिलियन डॉलर या सकल घरेलू उत्पाद के 0.7 प्रतिशत तक बढ़ाते हैं। यह पहले 10 अरब अमेरिकी डॉलर के पूर्वानुमान से ऊपर है।

चालू खाते के बैलेंस पर आयात की कम मांग का दिखेगा असर

सरप्लस की व्याख्या करते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि यह एक अनिष्ट विकास है। क्योंकि सरप्लस को लगभग पूरी तरह से अर्थव्यवस्था के लॉकडाउन से महामारी के प्रकोप को रोकने के लिए प्रेरित किया जाएगा। रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि जहां कच्चे तेल की कम कीमतें अर्थव्यवस्था के लिए टेलविंड के रूप में काम कर रही हैं, वहीं चालू खाते के बैलेंस पर बड़ा प्रभाव तेल और गैर-तेल आयात दोनों की कम मांग से आएगा।

कैपिटल आउट फ्लो लगातार बढ़ रहा है

रिपोर्ट में यह भी उम्मीद जताई गई है कि वित्त वर्ष 2021 की दूसरी तिमाही में रिकॉर्ड वृद्धि के बाद मार्च से capital outflow की बढ़त को देखा गया है, लेकिन इसके परिणामस्वरूप capital account surplus बहुत मामूली है। हम अभी भी वित्त वर्ष 21 में लगभग 38 अरब डॉलर के payments surplus के संपूर्ण संतुलन की उम्मीद करते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि विदेशी मुद्रा भंडार भी बढ़ रहा है। यह अब 486 अरब डॉलर से बढ़कर वित्त वर्ष के अंत तक 500 अरब डॉलर  तक पहुंच सकता है।

अप्रैल में तेल की खपत काफी कम हुई

आरबीआई ने सितंबर 2019 के अंत और अप्रैल 2020 के बीच बड़ी मात्रा में फ्लो को absorve कर लिया है और विदेशी मुद्रा भंडार में 51 अरब डॉलर जमा किए हैं। देश की वस्तुओं के व्यापार की स्थिति में 2019 के मध्य से सुधार हो रहा है। इससे अप्रैल 2020 में घाटा लगातार घटकर 6.8 अरब डॉलर हो गया। 2019 में निर्यात, आयात की तुलना में मामूली तेजी से बढ़ रही है जिसके परिणामस्वरूप वस्तुओं के व्यापार घाटे में गिरावट आई। मार्च में तेल की खपत कम हुईं और अप्रैल में ढह गई, जो पिछले साल के औसत का 55 प्रतिशत तक गिर गया। यह तेल रिफाइनरी की क्षमता को 50 प्रतिशत तक गिरा दिया।

सोने के आयात का बिल भी कम रहा

सोने की कीमत अधिक होने के बावजूद सोने का आयात बिल सिकुड़ गया है। अप्रैल में आयात गिरकर 1.2 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया। बार्कलेज ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि चालू वित्त वर्ष के आने वाले दिनों में भारत का मर्चेंडाइज ट्रेड डेफिसिट लगातार घटेगा और पूरे वित्त वर्ष के लिए यह 103 अरब डॉलर रहेगा जो जीडीपी का करीब 3.7 फीसदी होगा। वित्त वर्ष 2019-20 में यह जीडीपी का 5.3 फीसदी था।

क्या होता है करंट अकाउंट डेफिसिट?

जब किसी देश का निर्यात (गुड्स ऐंड सर्विस) आयात के मुकाबले ज्यादा होता है तो उसे करंट अकाउंट सरप्लस कहते हैं। जब निर्यात आयात के मुकाबले कम होता है तो उसे करंट अकाउंट डेफिसिट (चालू खाता घाटा) कहते हैं। भारत का हर साल का चालू खाता घाटा अरबों डॉलर का होता है। 2006-07 की पहली तिमाही के बाद यह पहला मौका होगा जब व्यापार घाटा की बजाय व्यापार लाभ होगा।