भारतीय स्टार्टअप्स के जरिए भी चीन को भेजा जा सकता है ग्राहकों का डेटा, कैट ने निवेश में जांच की मांग की

  • कैट ने कहा कि इस बात की जांच होनी चाहिए कि कहीं इन स्टार्टअप्स के जरिए भी तो कोई डाटा चीनी निवेशकों को उपलब्ध तो नहीं हो रहा है
  • कैट ने कहा कि भारत कई स्टार्टअप्स में चीनी कंपनियों का अच्छा-खासा निवेश है

दैनिक भास्कर

Jun 30, 2020, 10:00 PM IST

नई दिल्ली. व्यापारियों के संगठन कनफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने चीन की कंपनियों द्वारा भारतीय स्टार्टअप्स् में निवेश की जांच कराने की मांग की है। कैट ने कहा कि इस बात की जांच होनी चाहिए कि कहीं इन स्टार्टअप्स के जरिए भी तो कोई डाटा चीनी निवेशकों को उपलब्ध तो नहीं हो रहा है और उससे देश की सुरक्षा को कोई खतरा तो नहीं है। 

भारतीय स्टार्टअप्स में चीनी निवेश की जांच हो

कैट ने इस बारे में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्री रवि शंकर प्रसाद और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल को पत्र लिखकर कहा है कि जांच के जरिए यह पता लगाया जाना चाहिए कि निवेश के नाम पर कोई ‘गड़बड़’ तो नहीं की जा रही है। कैट के महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने सीतारमण को लिखे पत्र में कहा, ‘हम चीन की कंपनियों द्वारा भारतीय स्टार्टअप्स में निवेश की जांच का आग्रह करते हैं, जिससे यह पता लगाया जा सके कि कहीं कोई डाटा चीन के निवेशकों को तो मूव नहीं किया जा रहा और कहीं इससे देश की सुरक्षा को तो खतरा नहीं है।’ 

स्टार्टअप्स में चीनी कंपनियों का अच्छा-खासा निवेश है

व्यापारियों के संगठन ने कहा कि चीन की जिन कंपनियों के भारत में मैन्यूफैक्चरिंग कारखाने हैं उनकी भी जांच होनी चाहिए कि कहीं उनके पास मौजूद डाटा का दुरुपयोग तो नहीं हो रहा या उसे चीन तो नहीं भेजा जा रहा। कैट ने कहा कि भारत कई स्टार्टअप्स में चीनी कंपनियों का अच्छा-खासा निवेश है। इनमें प्रमुख रूप से फ्लिपकार्ट, पेटीएम मॉल, पेटीएम .कॉम, स्विगी, ओला, ओयो, जोमैटो, पोलिसीबाजार, बिगबास्केट, डेल्हीवरी, मेकमायट्रिप, ड्रीम 11, हाईक, स्नैपडील, उड़ान, लेंसकार्ट.कॉम, बायजू क्लासेज, साइट्रस टेक शामिल हैं। चीनी कंपनियां खासतौर पर अलीबाबा, टेन्सेंट एवं अन्य इनमें से कई स्टार्टअप्स में प्रमुख निवेशक हैं।