बढ़ते कोरोना संकट के बीच आर्थिक मोर्चे पर राहत की खबर, एनबीएफसी की हालत में हो रहा है सुधार

मुंबई5 मिनट पहले

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तीन अन्य मापदंडों पर भी अगस्त में एनबीएफसी का प्रदर्शन जुलाई के मुकाबले स्थिर रहा। इसमें आउटस्टैंडिंग डेट, बॉन्ड स्प्रेड, बाजार में शेयर का प्रदर्शन शामिल है। बॉन्ड स्प्रेड और शेयर परफॉर्मेंस के पैमानों पर भी इसमें मजबूती के संकेत मिले हैं।

  • एनबीएफसी के बॉन्ड का प्रीमियम अगस्त में घटकर दो साल के निचले स्तर पर आ गया है
  • सितंबर 2018 में आईएलएंडएफएस ग्रुप की कंपनियों द्वारा कई डिफॉल्ट करने से एनबीएफसी सेक्टर की हालत बिगड़ी।

कोरोना संकट के बीच सरकार द्वारा आर्थिक सुधारों के लिए जो कदम उठाए जा रहे हैं, उनका सकारात्मक परिणाम भी अब नजर आने लगा है। अगस्त महीने में नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों (एनबीएफसी) की हालत पिछले महीने की तुलना में बेहतर रही। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक यह सेक्टर महामारी की मार से उबर रहा है।

अगस्त में एनबीएफसी की हालत स्थिर

पांच साल वाले एएए (AAA) रेटेड बॉन्ड के एक इंडेक्स मुताबिक एनबीएफसी के बॉन्ड का प्रीमियम अगस्त में घटकर दो साल के निचले स्तर पर आ गया है। इसके अलावा तीन अन्य पैमानों पर भी अगस्त में एनबीएफसी का प्रदर्शन जुलाई के मुकाबले स्थिर रहा। इसमें आउटस्टैंडिंग डेट, बॉन्ड स्प्रेड, बाजार में शेयर का प्रदर्शन शामिल है। बॉन्ड स्प्रेड और शेयर परफॉर्मेंस के पैमाने पर भी इसमें मजबूती के संकेत मिले हैं।

डिफॉल्ट से बढ़ीं मुश्किलें

साल 2018 में आईएलएंडएफएस (IL&FS) ग्रुप की कंपनियों द्वारा कई डिफॉल्ट करने से एनबीएफसी सेक्टर की हालत बहुत बुरी गई थी। ऐसे में जब देश की जीडीपी में रिकॉर्ड गिरावट आई हो तो एनबीएफसी सेक्टर का मजबूत होना बेहद आवश्यक है। दरअसल जून तिमाही में भारत की जीडीपी रिकॉर्ड 23.9 फीसदी नीचे गिरी है।

केयर रेटिंग के सीनियर डायरेक्टर संजय अग्रवाल का कहना है कि, कोरोना के बढ़ते प्रकोप के कारण एनबीएफसी के लिए अभी भी फंड की चिंता बनी हुई है। खासकर छोटे एनबीएफसी के लिए। दरअसल मोरोटोरियम के कारण पिछले 6 महीनों में लोन वसूली में भारी गिरावट आई है। इससे एनबीएफसी के लिए मुश्किलें बढ़ी हैं।

शैडो बैंक

नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों (NBFC) को शैडो बैंकों कहा जाता है। ये कंपनियां सड़क किनारे लगने वाले दुकानदारों से लेकर अलग-अलग क्षेत्र के बड़े बिजनेसमैन तक को कर्ज मुहैया कराती है।

कोरोना संकट में मोरोटोरियम से मिली छूट को अगस्त में खत्म कर दिया गया है। लेकिन आरबीआई द्वारा बैंकों को हिदायत है कि बैंक कर्जदारों पर लोन वसूली के लिए सख्ती न करें। बुधवार को आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि इससे शैडो बैंकिंग के लिए मुश्किलें बढ़ी है। आरबीआई देश में लगभग 100 नॉन-बैंक कर्जदाताओं को मॉनिटर करती है।

आत्मनिर्भर राहत पैकेज

मार्च में लगे देशव्यापी लॉकडाउन के बाद केंद्र सरकार और आरबीआई आर्थिक गति को रफ्तार देने के लिए अबतक कई घोषणाएं कर चुकी हैं। इसमें आरबीआई द्वारा एनबीएफसी और हाउसिंग फाइनेंस (HFC) को लिक्विडिटी देने वाले बैंकों को अगस्त में करीब 10 हजार करोड़ की स्पेशल लिक्विडिटी मुहैया कराने का ऐलान किया था।

इसके अलावा कामथ कमिटी का गठन कर एनबीएफसी सहित अन्य क्षेत्रों के लोन रिस्ट्रक्चरिंग की भी अनुमति दी थी। जिसे सितंबर तक पूरा करने के लिए कहा गया है। इससे पहले आरबीआई ने मई में आत्मनिर्भर राहत पैकेज का ऐलान किया था। इसमें भी एनबीएफसी को 75 हजार करोड़ रुपए का लोन मुहैया कराने का ऐलान भी किया गया था।

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