ब्लॉक को अनलॉक करने का पुरस्कार घटा, जानिए इससे डिजिटल करेंसी और इसके निवेशकों पर क्या असर पड़ेगा?

  • प्रत्येक चार साल बाद होती है बिटकॉइन हॉल्विंग की घटना, अब 2024 में होगी घटना
  • हॉल्विंग की प्रत्येक घटना के बाद माइनर्स की पुरस्कार राशि आधी हो जाती है
  • वर्ष 2009 में हुई थी हॉल्विंग की पहली घटना, तब 50 बिटकॉइन थी पुरस्कार राशि

दैनिक भास्कर

May 14, 2020, 10:35 AM IST

नई दिल्ली. डिजिटल करेंसी बिटकॉइन की बहुप्रतीक्षित घटना ‘हॉल्विंग’ बीते सोमवार को घटित हो चुकी है। इसको ‘बिटकॉइन हॉल्विंग’ भी कहा जाता है। यह घटना प्रत्येक चार साल पर होती है। इस घटना के बाद बिटकॉइन के एक ब्लॉक को अनलॉक करने का पुरस्कार तय होता है। हालांकि, इस घटना का बिटकॉइन के मौजूदा निवेशकों पर कोई असर नहीं पड़ता है।

6.25 बिटकॉइन हुआ ब्लॉक अनलॉक करने का पुरस्कार
बिटकॉइन हॉल्विंग के बाद ब्लॉक को अनलॉक करने का पुरस्कार घटकर आधा रह जाता है। इस बार हॉल्विंग के बाद बिटकॉइन ब्लॉक को अनलॉक करने का पुरस्कार घटकर 6.25 बिटकॉइन पर आ गया है। 2009 में बिटकॉइन के क्रिएशन के बाद से हॉल्विंग की यह तीसरी घटना है। पहली हॉल्विंग नवंबर 2012 में और दूसरी जुलाई 2016 में हुई और अगली हाविंग मई 2024 में होनी है। जो लोग बिटकॉइन माइनिंग का कार्य करते हैं, उन्हें यह राशि मिलती है। प्रत्येक हॉल्विंग के बाद पुरस्कार की राशि घटकर आधी रह जाती है।

ऐसे घटी पुरस्कार राशि

हॉल्विंग

वर्ष पुरस्कार राशि
1 2009 50 बिटकॉइन
2 2012 25 बिटकॉइन
3 2016 12.5 बिटकॉइन
4 2020 6.25 बिटकॉइन

2.1 लाख ब्लॉक अनलॉक होने के बाद होती है हॉल्विंग

बिटकॉइन स्टार्टअप बिटबडी के संस्थापक आशीष अग्रवाल के मुताबिक, सामान्य तौर पर प्रत्येक 2.1 लाख ब्लॉक के अनलॉक होने के बाद हॉल्विंग की घटना होती है। यह घटना तब तक होती रहेगी जब तक ब्लॉक को अनलॉक करने का पुरस्कार जीरो नहीं हो जाएगा। इसमें करीब दो दशक का समय लग सकता है। ब्लॉकगीक्स डॉट कॉम के मुताबिक बिटकॉइन की दुनिया में हॉल्विंग की कुल 64 घटनाएं होनी हैं, जिसमें से अभी तक चार ही संपन्न हुई हैं। पूरी दुनिया में केवल 21 मिलियन यानी 2.1 करोड़ बिटकॉइन बाजार में आ सकते हैं। एक आंकड़े के मुताबिक, अभी तक केवल 17 मिलियन बिटकॉइन बाजार में हैं। 21 मिलियन बिटकॉइन को बाजार में आने में वर्ष 2140 तक का समय लग सकता है।

हॉल्विंग के बाद बढ़ जाती है कीमत

आशीष अग्रवाल का कहना है कि हॉल्विंग की घटना नजदीक आने के साथ बिटकॉइन की ट्रेडिंग में तेजी आ जाती है। इस बार भी इसकी कीमतों में करीब 20 फीसदी का उछाल आया है। यह बिल्कुल 4 साल पहले हुई हॉल्विंग की घटना जैसा है। हॉल्विंग की घटना के तुरंत बाद बिटकॉइन की कीमतों में कोई बड़ा बदलाव नहीं आता। यदि हम 2012 की हॉल्विंग को देखें तो इसकी कीमतों ने 11 डॉलर से 1200 डॉलर तक पहुंचने में लगभग एक वर्ष का समय लिया और 2016 में इसने 600 डॉलर से 20,000 डॉलर तक पहुंचने में 9 महीने का समय लिया। ऐसे में इस बार भी हॉल्विंग के बाद अगले एक वर्ष तक बिटकॉइन की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हो सकती है। इस समय 1 बिटकॉइन की कीमत 9323 डॉलर है जो भारतीय रुपए में 7.04 लाख के करीब है।

उत्पादन घटने की वजह से बढ़ती है कीमत

बाजार में बिटकॉइन की नई आपूर्ति का बड़ा हिस्‍सा केवल माइनर्स (बिटकॉइन के प्रोड्यूसर्स) से आता है। हॉल्विंग के बाद पुरस्कार राशि घटने से बिटकॉइन माइनिंग प्रभावित होती है। इससे बाजार में नए बिटकॉइन की आपूर्ति का अभाव हो जाता है। नए बिटकॉइन नहीं आने की वजह से कीमतें बढ़ जाती हैं। यही कारण था कि हॉल्विंग की घटना से पहले बिटकॉइन की कीमतों में तेज उछाल था और आखिरी के दो दिनों में गिरावट देखने को मिली। वहीं एएक्सआई कॉर्प के स्टीफन इनीज ने बीबीसी से बातचीत में पुरस्कार राशि घटने की वजह से बिटकॉइन के उत्पादकों की संख्या घट जाएगी। वे ज्यादा मुनाफे वाली दूसरी क्रिप्टोकरेंसी की तरफ आकर्षित होंगे। इससे बिटकॉइन की कीमत बढ़ेगी।

क्या होता है बिटकॉइन ब्लॉक?

रुपया या डॉलर की तरह बिटकॉइन की छपाई नहीं होती है बल्कि यह कंप्यूटर के जरिए बनाया जाता है। बिटकॉइन का निर्माण गणित की जटिल पहेली के माध्यम से किया जाता है। बिटकॉइन के निर्माण को कठिन बनाए रखने के लिए हल होने के बाद नई पहेली को काफी जटिल बनाया जाता है। इससे बिटकॉइन निर्माण की प्रक्रिया काफी कठिन हो जाती है। इस पहेली को ही ब्लॉक कहा जाता है और पहले की हल करने की पूरी प्रक्रिया को ब्लॉक अनलॉक करना कहा जाता है। माइनर्स इस कार्य को करते हैं और इसके बदले में उन्हें पुरस्कार मिलता है।