फूड डिलीवरी कारोबार बुरी तरह प्रभावित, जोमैटो करेगी 13 फीसदी कर्मचारियों की छंटनी; अन्य कर्मचारियों की सैलरी में होगी 50 फीसदी तक की कटौती

  • कंपनी अपने बेरोजगार कर्मचारी को अगले 6 महीने तक हेल्थ इंश्योरेंस की सुविधा देगी
  • दूसरी बार है जब पिछले एक साल में जोमैटो ने कर्मचारियों की छंटनी का ऐलान किया है

दैनिक भास्कर

May 15, 2020, 05:00 PM IST

नई दिल्ली. ऑनलाइन फूड डिस्ट्रिब्यूटर कंपनी जोमैटो उन भारतीय स्टार्टअप्स में से एक हैं जो बड़े पैमाने पर चल रहे कोरोनावायरस संकट से प्रभावित हैं। जोमैटो ने कोरोना संकट की घड़ी में अपने 13 फीसदी कर्मचारियों को निकालने का फैसला किया है। साथ ही, कंपनी ने जून से सभी कर्मचारियों की सैलरी में 50 फीसदी तक की कटौती का फैसला भी किया गया है। शुक्रवार को कंपनी के संस्थापक व चीफ एग्जिक्यूटिव दीपिंदर गोयल ने कर्मचारियों को ई-मेल के जरिए नोट भेजा है। इसमें कहा गया है कि कोरोनावायरस की वजह से रेस्तरां और होटल्स बंद हैं। ऐसे में फूड डिलीवरी बिजनेस पर बुरा असर पड़ा है। बता दें कि कोविड-19 महामारी के चलते देशभर में लॉकडाउन का तीसरा चरण जारी है।

अगले छह माह तक कर्मचारियों को दी जाएगी आधी सैलरी
कंपनी के नोट के मुताबिक, अलग से डायरेक्ट पैकेज की बजाय बेरोजगारी से प्रभावित लोग अपनी सैलरी का आधा हिस्सा पाएंगे। साथ ही अगले 6 महीने तक हेल्थ इंश्योरेंस भी मिलेगा या फिर जब तक वे अगला जॉब न तलाश लें। जो भी जल्दी होगा, उस पर फैसला होगा। कंपनी आउट प्लेसमेंट के साथ मदद करेगी। बता दें कि यह दूसरी बार है जब जोमैटो ने कर्मचारियों को नौकरी से निकाला है। सितंबर 2019 में 540 कर्मचारियों को निकाला था जो कस्टमर सपोर्ट टीम में थे। यह संख्या कुल कर्मचारियों का दस फीसदी थी।

प्रतिद्वंद्वी ऐप स्विगी भी कर चुकी हैं छंटनी का ऐलान
फूड डिलीवरी ऐप प्लेटफार्म स्विगी ने हाल ही में अपने वर्कफोर्स के एक हिस्से का को कम करने का ऐलान किया था। कंपनी ने कहा था कि वे अपने क्लाउड किचन कारोबार से लगभग 800-900 कर्मचारियों की छंटनी करेगी। बता दें कि स्विगी अपने स्विगी एक्सेस प्रोग्राम के तहत लगभग 15 शहरों में 1,000 क्लाउड किचन चलाता है। हालांकि, इनमें से अधिकांश रेस्तरां के साथ साझेदारी द्वारा चलाए जाते हैं।

वित्त वर्ष 2021 में रेस्तरां इंडस्ट्री रेवेन्यू आधे से कम होने की संभावना
महामारी के कारण रेस्तरां इंडस्ट्री काफी प्रभावित हुई है। लाॅकडाउन के चलते हजारों रेस्तरां बंद हैं। इसके चलते डाइन-इन रेस्तरां के रेवेन्यू में लगभग 50 फीसदी तक गिरावट होने की संभावना है। क्रिसिल की रिपोर्ट में कहा गया है कि कोरोनोवायरस महामारी के चलते फूड एंड बेवरेज सेक्टर बुरी तरह प्रभावित है। वित्त वर्ष 2020-21 में संगठित डाइन-इन रेस्तरां का राजस्व 40-50 प्रतिशत घटने की संभावना है। रिपोर्ट में जून से धीमी रिकवरी शुरू होने की बात कही गई है।