पीएसआईटी इंफ्रा के शेयर्स में खेल करने पर सेबी ने 26 लोगों को बाजार में कारोबार करने पर प्रतिबंध लगाया

  • सेबी ने इन आरोपियों की सभी होल्डिंग को सीज कर दिया है
  • 26 कंपनियों को 2017 में जारी की गई थी शोकॉज नोटिस

दैनिक भास्कर

Jun 08, 2020, 07:56 PM IST

मुंबई. पूंजी बाजार नियामक सेबी ने पीएसआईटी इंफ्रा के शेयरों में मेनिपुलेशन के मामले में 26 लोगों को बाजार में कारोबार करने पर 6 महीने का प्रतिबंध लगाया है। सोमवार को 61 पेज के ऑर्डर में सेबी ने यह आदेश दिया है। सेबी ने इसके साथ ही इन आरोपियों की सिक्योरिटीज और म्यूचुअल फंड में सभी होल्डिंग सीज कर दी है। सेबी की होल टाइम मेंबर माधबी पुरी बुच ने यह आदेश जारी किया है।  

ये लोग हैं इस मामले के आरोपी

जिन लोगों पर प्रतिबंध लगाया गया है उसमें प्रमुख रूप से पुष्पल चंद्रा, दिलीप मंडल, संजोय चंद्रा, मिना चंद्रा, प्रकाश वोरा, शिल्पा माहेश्वरी, अमित शाह, अमित व्यास, योगेश शर्मा, हेमंत लिंबाचिया, रामजी कर्सन हिरानी, सारदा, संजय कुमार महर्षि, राजेश, अमोल सारदा, पारुल सोमानी, दिलीप खत्री, वंदना मगर, निलेश तुकाराम, राज कुमार शर्मा, राजेंद्र कोठारी, सरोज कोठारी, निशांत कोठारी और भरत ठक्कर का समावेश है।

एक मई 2012 से 31 जुलाई 2015 तक शेयरों में किया गया खेल

सेबी ने ऑर्डर में कहा कि बीएसई में एक मई 2012 से 31 जुलाई 2015 के बीच इसके शेयरों में अजीब तरह का उतार-चढ़ाव देखा गया। सेबी की जांच में पता चला कि कंपनी ने 1,10,00,000 इक्विटी शेयरों का प्रफरेंशियल अलॉटमेंट किया था। यह 10 रुपए की कीमत पर 23 जुलाई 2012 को 49 गैर प्रमोटर कंपनियों को किया गया था। दो कंपनियां क्रेसेंट डिजिटल टेक्नोलॉजी और स्विफ्ट आईटी इंफ्रा को बाद में पीएसआईटी इंफ्रा में विलय कर दिया गया। यह विलय 5 जून 2013 को किया गया। इसमें पीएसआईटी ने 4,25,20,000 इक्विटी शेयरों को जारी किया। पीएसआईटी की नई सिक्योरिटीज इसके बाद बीएसई पर 13 अगस्त 2013 को लिस्ट हुई।

शेयर की कीमत 50 रुपए से बढ़कर 466 रुपए हुई

सेबी की जांच में यह खुलासा हुआ कि पीएसआईटी की कीमत 1 मई 2012 से 11 फरवरी 2014 के दौरान 50 रुपए से बढ़कर 466.95 रुपए पर पहुंच गई। हालांकि 21 मई 2012 को यह शेयर 4.95 रुपए पर भी चला गया था। पीएसआईटी इंफ्रा का शेयर 19 मई 2004 से 9 फरवरी 2012 तक सस्पेंड था। हालांकि सस्पेंशन से निकलने के बाद भी इस शेयर में 20 मई 2012 तक कोई कारोबार नहीं हुआ। जांच में खुलासा हुआ कि 21 मई 2012 को केवल इसमें कारोबार हुआ। फिर 8 महीने के अंतराल के बाद इसमें जनवरी 2013 से कारोबार शुरु हुआ और यह 2014 तक चला।

45 कंपनियों ने शेयर खरीदा, 35 ने बेचा

सेबी की जांच के अनुसार कुल 184 ट्रेड्स 17,431 शेयरों में 162 ट्रेडिंग दिनों में किए गए थे। इसमें 45 कंपनियों ने शेयर खरीदे जबकि 35 कंपनियों ने शेयरों की बिक्री की। जांच में पता चला कि शेयरों की बिक्री करनेवाले 35 में से 22 लोग एक दूसरे से इस दौरान जुड़े हुए थे। इनका पता भी एक ही था। यह पाया गया कि ये 22 विक्रेता 4 कंपनियों से ऑफ मार्केट में शेयर हासिल किए। इसमें राजेंद्र कोठारी, सरोज देवी, निशांत कोठारी और राज कुमार शर्मा का समावेश था।

4 महीने में ज्यादातर लोगों ने बेचा शेयर

सेबी की जांच में पता चला कि जो 22 विक्रेता 4 लोगों से शेयर पाए थे उन्होंने 4 महीने में अपने ज्यादातर शेयर बेच दिए। यह सभी ऑफ मार्केट में शेयर बेचे। जो लोग शेयर बेच रहे थे वे 10 से कम शेयर बेच रहे थे। जबकि शेयरों को खरीदने की डिमांड काफी थी। सेबी ने ऑर्डर में कहा है कि उसने इस संबंध में 13 सितंबर 2017 को 26 कंपनियों को शोकॉज नोटिस जारी किया। सेबी ने जांच में पाया कि इन लोगों ने सेबी के नियमों का जमकर उल्लंघन किया। इसी के बाद सेबी ने सोमवार को ऑर्डर जारी कर इन लोगों पर प्रतिबंध लगा दिया।