पिरामिड साइमिरा मामले में सेबी ने फाइनल ऑर्डर जारी किया, 12 साल बाद दो आरोपियों को लगी पेनाल्टी, बाजार में कारोबार करने पर प्रतिबंध लगाया

  • साल 2008 में पिरामिड साइमिरा के एक प्रमोटर निर्मल कोटेचा ने सेबी के लेटरहेड पर गलत जानकारी देकर शेयरों की कीमतें बढ़वाई
  • 22 दिसंबर 2008 को शेयरों की कीमतें बढ़ने पर कोटेचा के साथ कई लोगों ने शेयरों को बेचकर भारी मुनाफा कमाया

दैनिक भास्कर

Jun 23, 2020, 08:11 PM IST

मुंबई. साल 2008 में पिरामिड साइमिरा के ओपन ऑफर के मामले में सेबी ने मंगलवार को फाइनल ऑर्डर जारी किया। इसमें सेबी ने दीपक ठक्कर पर 20.75 लाख रुपए की पेनाल्टी के साथ 2008 से लेकर अब तक सालाना 12 प्रतिशत का ब्याज भी लगाया है। इसी तरह महेश शाह पर 1.84 लाख रुपए की पेनाल्टी और 12 प्रतिशत ब्याज इसी अवधि में लगाया है। जबकि शारदा पुजारा, मीट शेयर्स, मुकेश जैन और संजय गुप्ता पर बाजार में कारोबार करने पर प्रतिबंध लगा दिया है।  

पिरामिड साइमिरा के 250 रुपए के ओपन ऑफर की झूठी खबर चली

सेबी के आदेश के मुताबिक साल 2008 में कुछ मीडिया रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई कि पिरामिड साइमिरा को ओपन ऑफर लाने का आदेश सेबी ने दिया है। जबकि सेबी की ओर से ऐसा कोई आदेश जारी नहीं किया गया था। इस ऑफर को पिरामिड साइमिरा को 250 रुपए प्रति शेयर के भाव पर लाना था। इस खबर के बाद 22 दिसंबर 2008 को कंपनी का शेयर अचानक बढ़ गया था। हालांकि पिरामिड साइमिरा ने उसी दिन सुबह एक्सचेंज को यह बताया कि उसने इस तरह का कोई ऑफर लाने का आदेश सेबी से प्राप्त नहीं किया है।

सेबी ने पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई शिकायत

सेबी ने इसके बाद पुलिस स्टेशन में इसकी शिकायत दर्ज कराई और खुद भी जांच की। जांच में पता चला कि पिरामिड साइमिरा के प्रमोटर निर्मल कोटेचा ने इसमें मेनिपुलेट किया। इस पूरे मामले से उनको लाभ हुआ। यह भी पता चला कि कोटेचा ने 15 दिसंबर से 19 दिसंबर के बीच कंपनी के शेयर खरीदे थे। 22 दिसंबर को जब ओपन ऑफर की खबर आई तो उन्होंने शेयरों को बेच दिया और इससे मुनाफा कमाया।

कोटेचा के साथ 44 कंपनियां भी थीं शामिल

सेबी ने जांच में पाया कि इस पूरे मामले में निर्मल कोटेचा के साथ 44 कंपनियां शामिल थीं। इसमें से करीबन 11 कंपनियां शाह ग्रुप की थीं। सेबी ने इनके खिलाफ 22 मार्च 2018 को ऑर्डर पास किया था। इस कंपनी में प्रमुख रूप से राजेश शाह, शैलेष शाह, देवांग शाह, जयंती शाह, बीनाबेन शाह, मनिषा बेन शाह आदि हैं। इनके अलावा एडफैक्टर्स पीआर में उस समय काम कर रहे राकेश शर्मा, राजेश उन्नीकृष्णन, धर्मेश शाह, अमोल कोंकाने, फाल्गुनी शाह, हार्दिक, प्रयिंका आदि का समावेश था। कंपनियों में इनवेंचर ग्रोथ एंड सिक्योरिटीज, एसपीजे स्टॉक, डीकेजी सिक्योरिटीज, एपीएल इंफ्रा, निखिल सिक्योरिटीज, डायनॉमिक स्टॉक ब्रोकिंग, निमेश चितलिया आदि थे।

सेबी ने पाया कि यह सभी लोग मिली भगत करके शेयरों की खरीदारी और बिक्री कर रहे थे। 22 दिसंबर को पिरामिड साइमिरा का शेयर 82.90 रुपए था जबकि 19 दिसंबर को यह 75.40 रुपए पर था। इसी दौरान 22 दिसंबर को सुबह बाजार खुलते ही 15,000 शेयरों को कोटेचा ने बेच दिया। उनके अलावा 11 और लोगों ने शेयरों की बिक्री की। जांच में पाया गया कि शाह ग्रुप और निर्मल कोटेचा के बीच लेन देन भी था। यह लेन देन बिना किसी ब्याज के दोस्ताना लेन देन था। यही नहीं, दोनों के मोबाइल नंबर से जांच की गई तो पता चला कि दोनों एक दूसरे के टच में भी थे।

सेबी ने पाया कि इस दौरान महेश शाह ने शेयरों की बि्क्री कर एक लाख 84 हजार 200 रुपए का फायदा कमाया। जबकि दीपक ठक्कर ने इसी अवधि में 20.75 लाख रुपए का मुनाफा कमाया।