नौकरी और लागत में कटौती के बावजूद कारोबार बंद करना चाहते हैं स्टार्टअप और एसएमई

  • सामुदायिक सोशल मीडिया नेटवर्क लोकलसर्कल्स के ऑनलाइन सर्वे में खुलासा
  • 80 फीसदी स्टार्टअप्स और एसएमई ने फिक्स लागत में कटौती की

दैनिक भास्कर

Jun 15, 2020, 03:01 PM IST

नई दिल्ली. कोरोनावायरस के कारण स्टार्टअप्स और स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज (एसएमई) ने पिछले तीन महीनों में मार्केटिंग खर्च, मैनपावर और ऑपरेटिंग लागत में कटौती की है। इसके बावजूद 14 फीसदी स्टार्टअप्स और एसएमई अपना कारोबार पूरी तरह से बंद करने पर विचार कर रहे हैं। सामुदायिक सोशल मीडिया नेटवर्क लोकलसर्कल्स के एक ऑनलाइन सर्वे में यह खुलासा हुआ है।

35 फीसदी को कारोबार में ग्रोथ की उम्मीद

लोकलसर्कल्स ने देश के 28 हजार स्टार्टअप्स, एसएमई और एंटरप्रेन्योर पर यह ऑनलाइन सर्वे किया है। 16 फीसदी स्टार्टअप्स और एसएमई भविष्य को लेकर सुनिश्चित नहीं हैं। उनके पास तीन से 6 महीने तक कारोबार चलाने के लिए ही नकदी बची है। हालांकि, सर्वे में शामिल 35 फीसदी स्टार्टअप्स और एससएमई अपने कारोबार में ग्रोथ की उम्मीद लगाए बैठे हैं। 

80 फीसदी ने फिक्स लागत में कटौती की

लोकलसर्कल्स के सर्वे में कहा गया है कि 80 फीसदी स्टार्टअप्स और एसएमई ने अपनी फिक्स लागत में कटौती की है। स्टार्टअप्स ने कारोबार चालू रखने और कम बजट में कारोबार करने के लिए यह कटौती की है। सर्वे के मुताबिक, देशव्यापी लॉकडाउन और एक से दूसरे राज्य में आवाजाही पर रोक के कारण ट्रैवल और मोबिलिटी से जुड़े स्टार्टअप्स ज्यादा प्रभावित हुए हैं। बीते दो महीनों में मेकमाईट्रिप, उड़ान, स्विगी, जोमैटो, लैंडिंगकार्ट, ओला, क्योरफिट, वीवर्क इंडिया, शेयरचैट और ऊबर इंडिया समेत कई स्टार्टअप्स ने कर्मचारियों को नौकरी से निकाला है।

38 फीसदी का फंड खत्म हुआ

सर्वे में शामिल 12 फीसदी फर्मों ने कहा है कि उनके पास अब 1 महीने तक कारोबार चलाने के लिए ही पैसा बचा है। वहीं, 38 फीसदी का कहना है कि उनका फंड पहले ही खत्म हो चुका है। चार फीसदी फर्मों ने कहा कि लॉकडाउन में राजस्व घटने के कारण वह पहले ही अपना कारोबार बंद कर चुके हैं। कई एसएमई और स्टार्टअप्स के राजस्व में पिछले दो महीनों में 80-90 फीसदी की गिरावट आई है। ऐसे में उनके लिए कारोबार को चलाना काफी कठिन हो रहा है।

फंड जुटाने में नहीं मिल रही कामयाबी

सर्व के मुताबिक, कई स्टार्टअप्स और एसएमई ने पिछले कुछ महीनों में फंड जुटाने के लिए काफी प्रयास किए हैं, लेकिन उन्हें कामयाबी नहीं मिल पाई है। इसका कारण यह है कि निवेशक अब स्टार्टअप और एसएमई में निवेश करने में ज्यादा रुचि नहीं ले रहे हैं। इसके अलावा कई निवेशकों के पास लिक्विडिटी की समस्या पैदा हो गई है।