निवेश और बचत हैं बहुत जरूरी, इसलिए नई की बजाय चुनें पुरानी टैक्स व्यवस्था

  • नई व्यवस्था सरल है, लेकिन इसमें आपके निवेश/खर्च के लिए लगभग जीरो छूट मिलती है
  • नई कर व्यवस्था पुराने की तुलना में कम दर की पेशकश करती है

दैनिक भास्कर

May 18, 2020, 12:46 PM IST

नई दिल्ली. वित्त वर्ष 2020-21 से आयकरदाता दो व्यवस्थाओं में से किसी एक चुनाव कर सकते हैं। एक है पुरानी व्यवस्था और दूसरी नई कर व्यवस्था। नई व्यवस्था सरल है, लेकिन इसमें आपके निवेश/खर्च के लिए लगभग जीरो छूट मिलती है। अर्चित गुप्ता सीईओ, क्लियर टैक्स के अनुसार नई कर व्यवस्था पुराने की तुलना में कम दर की पेशकश करती है।

कर की दर पर शुद्ध गणना के आधार पर नई कर व्यवस्था विभिन्न स्तरों पर हजारों रुपए का कर बचाती है। हालांकि, दोनों व्यवस्थाओं में कर का वास्तविक अंतर तभी सामने आता है, जब हम दोनों व्यवस्थाओं में कर की दर के अलावा मिलने वाली कटौती और छूट का साथ आकलन करें। यहां यह जानना जरूरी है कि नीचे दी गई छूट या कटौतियां नई कर व्यवस्था में नहीं मिलेंगी।

  • वेतन पर मानक कटौती, प्रोफेशनल टैक्स और मनोरंजन भत्ता।
  • एलटीए, एचआरए, माइनर चाइल्ड इनकम अलाउंस और अन्य।
  • खाली पड़ी संपत्ति पर होम लोन का ब्याज।
  • चैप्टर VI-A कटौती के तहत कर बचाने वाले निवेश-भुगतान।
  • किसी दूसरे अनुलाभ या भत्ते के लिए छूट या कटौती।
  • पारिवारिक पेंशन आय से होनी आमदनी में छूट।
  • हाउस प्रॉपर्टी पर होने वाले नुकसान पर छूट।

हालांकि, नई कर व्यवस्था में टैक्स छूट के लिए कुछ निश्चित भत्तों का आप दावा कर सकते है, जैसे दिव्यांग व्यक्ति को यातायात भत्ते में छूट आदि। नई कर व्यवस्था कर कटौती/छूट गणना की परेशानी से बचते हुए आसानी से कर भरने का विकल्प है। हालांकि, यदि आप भविष्य के लिए निवेश करना, बचत करना या घर खरीद कर छूट का दावा करना चाहते हैं तो ये विकल्प आपके लिए नहीं है। पुरानी कर व्यवस्था में आप निवेश से कर की बचत कर सकते हैं। घर खरीदने पर टैक्स छूट मिलती है। स्वास्थ्य बीमा और दूसरे मेडिकल खर्च पर छूट का दावा कर सकते हैं। दूसरी ओर, नई कर व्यवस्था भविष्य में बिना किसी सुरक्षित बचत के आपको अतिरिक्त धन के साथ छोड़ देती है।