देश में अमेजन और फ्लिपकार्ट समेत ई- कॉमर्स कंपनियों की वेबसाइट पर मिलेगी प्रोडक्ट्स की लेबलिंग, किस देश में बना है ग्राहक को मिलेगी जानकारी

  • कॉमर्स मंत्रालय के डिपार्टमेंट फॉर प्रमोशन ऑफ इंडस्ट्री एंड इंटरनल ट्रेड की ऑनलाइन रिटेलर्स के साथ हुई बैठक
  • बैठक में रिलायंस रिटेल, स्नैपडील, स्विगी, जोमैटो, बिगबास्केट और ग्रोफर्स जैसी ई-कॉमर्स कंपनियों के अधिकारी मौजूद थे

दैनिक भास्कर

Jun 25, 2020, 05:31 PM IST

नई दिल्ली. भारत में दिग्गज फ्लिपकार्ट और अमेजन समेत अन्य ई-कॉमर्स कंपनियों को अब अपनी वेबसाइट पर बेचे जाने वाले प्रोडक्ट्स पर मेड इन इंडिया का लेबल डिस्प्ले करना अनिवार्य होगा। हाल ही में ऑनलाइन रिटेलर्स की एक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की बैठक में इस पर चर्चा की गई है।

यह बैठक कॉमर्स मंत्रालय के डिपार्टमेंट फॉर प्रमोशन ऑफ इंडस्ट्री एंड इंटरनल ट्रेड (DPIIT) की अध्यक्षता में हुई थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस बैठक में रिलायंस रिटेल, जियो प्लेटफॉर्म और टाटा क्लिक के साथ-साथ स्नैपडील, उड़ान, स्विगी, जोमैटो, बिगबास्केट और ग्रोफर्स जैसी ई-कॉमर्स कंपनियों के अधिकारी भी मौजूद थे।

2 सप्ताह में हो जाएगा शुरू

अमेजन और फ्लिपकार्ट समेत ई-कॉमर्स कंपनियों के एक समूह ने अपने नए प्रोडक्ट्स पर ‘मैन्यूफैक्चरिंग वाले देश को’ (प्रोडक्ट किस देश का बना है) दिखाने का फैसला किया है और वे 2 हफ्ते के अंदर ऐसा करना शुरू कर देंगे। यह कदम राज्य सरकार द्वारा संचालित ई-मार्केट प्लेस पोर्टल पर मौजूद रिटेलर्स के लिए लागू किए जा रहे नियम का पालन करता है।

हालांकि, ‘मैन्यूफैक्चरिंग देश’ की परिभाषा को लेकर कंपनियों ने सरकार से अपना रुख स्पष्ट करने के लिए कहा है, क्योंकि कुछ प्रोडक्ट्स भारत में असेंबल तो होते हैं, लेकिन उनके कंपोनेंट चीन या किसी अन्य देशों से आयात होते हैं। वहीं ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेजन इंडिया और फ्लिपकार्ट अपने रिटेलर्स को सभी प्रोडक्ट्स के लिए मैन्यूफैक्चरिंग देश प्रदर्शित करने लिए कहने के लिए सहमत हैं।

आत्मनिर्भर भारत को मिलेगी मदद

बता दें कि वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा ई-कॉमर्स पॉलिसी में बदलाव लाने को लेकर खाका तैयार किया जा रहा है। नई पॉलिसी के तहत ई-कॉमर्स कंपनियों को प्रोडक्ट्स की मेकिंग के बारे में जानकारी देनी होगी। उन्हें ग्राहक को प्रोडक्ट के बारे में बताना होगा कि उनका प्रोडक्ट मेड इन इंडिया है या नहीं।

जानकारों का मानना है कि अगर ई-कॉमर्स के लिए इस प्रकार की पॉलिसी आती है तो यह सकारात्मक कदम होगा। इससे जहां एक तरफ चीनी सामान का चलन कम होगा वहीं दूसरी तरफ आत्मनिर्भर भारत मिशन को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही ग्राहकों के पास स्थानीय सामान खरीदने का विकल्प रहेगा।

चीन का भारत के साथ ट्रेड सरप्लस 47 अरब डॉलर

बता दें कि 31 मार्च 2020 को समाप्त वित्त वर्ष के पहले 11 महीनों के दौरान चीन का भारत के साथ ट्रेड सरप्लस करीब 47 अरब डॉलर रहा है। एक भारतीय कारोबारी संगठन के मुताबिक चीन से होने वाले कुल इंपोर्ट में रिटेल ट्रेडर्स की हिस्सेदारी करीब 17 अरब डॉलर है। इन इंपोर्टेड वस्तुओं में खिलौनों, घरेलू सामानों, मोबाइल फोन, इलेक्ट्रिक और इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं और सौंदर्य प्रसाधनों की सबसे ज्यादा हिस्सेदारी है। इनकी भरपाई इंडियन प्रोडक्ट्स से की जा सकती है।