देश भर में 6 हवाई अड्‌डों की होगी नीलामी; ज्यादा एयरस्पेस ओपेन किया जाएगा, इससे उड़ान का समय और पैसा बचेगा

  • उड़ानों का समय और ईंधन बचाने में मिलेगी मदद
  • सालाना 800 से 2,300 करोड़ रुपए की बचत होगी

दैनिक भास्कर

May 16, 2020, 09:32 PM IST

मुंबई. वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने आज अपने चौथे दिन की प्रेस कांफ्रेंस में सिविल एविएशन के लिए तीन सुधारों की घोषणा की। इसमें एक पीपीपी मॉडल पर हवाई अ्डडों को डेवलप करना, दूसरा एमआरओ को देश में शुरू करना और तीसरा एयर स्पेस को ज्यादा खोलने की शुरुआत होगी। इससे उड़ानों के समय में बचत होगी। साथ ही ईंधन पर होनेवाले खर्चों में बचत होगी।

क्या घोषित किया- भारत को विमानों की रिपेयरिंग का हब बनाने की योजना

वित्तमंत्री ने बताया कि मेंटीनेंस, रिपेयर और ओवरहॉलिंग (एमआरओ) के जरिए भारत को विमानों की मरम्मत का हब बनाने की योजना पर काम हो रहा है। एयरक्राफ्ट का मेंटीनेंस अगर भारत में होगा तो इससे सालाना 800 से 2,300 करोड़ रुपए की बचत होगी। अभी तक विदेशों में विमानों के मरम्मत से सालाना इतना खर्च होता था। उन्होंने कहा कि भारत में शुरू होने से यहां के नागरिक विमान और मिलिट्री के विमानों की मरम्मत की जाएगी। इससे भारत में रोजगार बढ़ेगा और बाहर के विमानों की भी भारत में रिपेयरिंग हो सकेगी। एयरलाइंस मैनेजमेंट की लागत भी कम होगी। 

किसे और कितना मिलेगा – 13 हजार करोड़ का निवेश और प्राइवेट प्लेयर आएंगे 

वित्तमंत्री ने कहा कि आनेवाले समय में 6 हवाई अड्‌डों का ऑक्शन यानी नीलामी की जाएगी। यह नीलामी एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एएआई) की ओर से की जाएगी। इस योजना से एएआई को 2,300 करोड़ रुपए का डाउन पेमेंट मिल सकता है। हालांकि इसके अलावा 6 और एयरपोर्ट की पहचान कर उन्हें पीपीपी मॉडल के तहत डेवलप किया जाएगा, जिससे वैश्विक स्तर की सुविधा लोगों को मिलेगी। इन 12 हवाई अड्‌डों पर 13,000 करोड़ रुपए का निवेश होगा।

कब मिलेगा- अगले 6 महीने में एयर स्पेस को ज्यादा खोला जाएगा

उन्होंने कहा कि देश में एयरस्पेस को ज्यादा खोलने की योजना पर काम हो रहा है। एयर स्पेस खोलने से उड़ानों का समय होगा, इससे लोगों का समय बचेगा। साथ ही उड़ानों पर खर्च होनेवाले ईंधन की भी बचत होगी। इसके लिए सरकार मिलिट्री के साथ बात करके इसे सुलझाएगी। बता दें कि देश के कई इलाकों में मिलिट्री एरिया होने से उन इलाकों में विमानों की आवाजाही पर पाबंदी रहती है। इस वजह से विमानों को घूम कर जाना होता है। इससे 1,000 करोड़ रुपए का फायदा हो सकता है। पर्यावरण के बचाव में भी सहयोग मिलेगा।