देश के रेस्टोरेंट और होटलों के पास जमा हो गया 3 हजार करोड़ की शराब का स्टॉक, सरकार से होम डिलीवरी की इजाजत मांगी

  • बियर एसोसिएशन और रेस्टोरेंट संघ की मांग, तबाह हो चुके कारोबार के लिए मिले मदद 
  • ई-कॉमर्स कंपनियों और जोमैटो व स्विगी जैसी कंपनियों को विशेष लाइसेंस देने का सुझाव

दैनिक भास्कर

May 12, 2020, 06:15 AM IST

नई दिल्ली. शराब निर्माताओं के साथ-साथ अब रेस्टोरेंट्स, बार और खान-पान संबंधी ऑनलाइन सुविधा देने वाली कंपनियों ने भी सरकार से शराब की होम डिलिवरी करने की छूट मांगी है। इन कंपनियों का कहना है कि इससे कोरोना संक्रमण के खतरे वाले इस दौर में लोगों के बीच सुरक्षित दूरी सुनिश्चित होगी बल्कि यह पाबंदी में तबाह हो चुके उनके कामकाज को भी उबारने में मददगार साबित होगा।

बियर बनाने वाली कंपनियों के संगठन ऑल इंडिया ब्रेवर्स एसोसिएशन (एआईबीए) ने इसके लिए फ्लिपकार्ट, अमेजन और ग्रोफर्स जैसी ई-कॉमर्स कंपनियों और जोमैटो व स्विगी जैसी फूड डिलीवरी कंपनियों को विशेष लाइसेंस देने का सुझाव दिया है। संगठन ने कहा कि ये कंपनियां ऑनलाइन ऑर्डर ले सकती हैं और लाइसेंस प्राप्त खुदरा और थोक शराब विक्रेताओं के जरिए मांग को पूरा कर सकती हैं।

संगठन ने शराब के लिए राज्य के आबकारी विभागों के तहत ऑनलाइन ऑर्डर करने के लिए पोर्टल बनाने का भी सुझाव दिया। भारतीय राष्ट्रीय रेस्टोरेंट संघ (एनआरएआई) के अध्यक्ष अनुराग कटरियार ने कहा, ‘इस समय हम काफी संकट से जूझ रहे हैं। एक तरफ हमारे पास महंगी शराब का स्टॉक जमा हो गया है, वहीं दूसरी तरह हमारे सामने नकदी का संकट है।’

कटरियार ने कहा, ‘हम सभी राज्य सरकारों से अपील करते हैं कि हमें शराब के स्टॉक की बिक्री की अनुमति दी जाए। ‘होम डिलीवरी’ मॉडल से हम यह शराब बेच सकते हैं। ’खान-पान संबंधी ऑनलाइन सुविधा देने वाली कई कंपनियां सरकार से मंजूरी मिलने पर शराब की होम डिलिवरी करने के लिए तैयार हैं।’ सूत्रों की मानें तो शराब की ऑनलाइन बिक्री व होम डिलीवरी के लिए स्विगी जैसी कंपनियों के साथ अथॉरिटी की बातचीत चल रही है। 

कई देशों ने ऑनलाइन डिलीवरी की इजाजत दी

बियर कैफे के संस्थापक और सीईओ राहुल सिंह ने कहा कि भारत में शराब तीन तरीकों खुदरा, होरेका (होटल, रेस्तरां और कैटरिंग) और कैंटीन स्टोरों के जरिए बेची जाती है। देशभर में (होटल, रेस्तरां और कैटरिंग) लाइसेंस वाले स्थानों की संख्या 30 हजार के करीब है। लॉकडाउन की वजह से देशभर में विभिन्न आउटलेट्स पर कम से कम 3 हजार करोड़ रुपए का स्टॉक पड़ा है। राज्य सरकारों से हमारी अपील है कि हमें अस्थाई रूप से स्टॉक बेचने की अनुमति दी जाए। कई देशों ने ऐसा किया है, भारत में भी यह संभव है।