तेल आयात में एक दशक से ज्यादा समय की सबसे बड़ी गिरावट, मई में 9.5 अरब डॉलर से घटकर 2.3 अरब डॉलर पर आया

  • तेल आयात वॉल्यूम मई में 22.6 फीसदी गिरकर 1.46 करोड़ टन पर आया
  • 2005 के बाद तेल आयात में किसी भी एक महीने की सबसे बड़ी गिरावट

दैनिक भास्कर

Jun 27, 2020, 09:31 PM IST

नई दिल्ली. मई में देश का तेल आयात खर्च घटकर महज 2.3 अरब डॉलर का रहा, जो पिछले साल मई में 9.5 अरब डॉलर था। आयात का वॉल्यूम भी मई में 22.6 फीसदी गिरकर 1.46 करोड़ टन पर आ गया। यह 2005 के बाद किसी भी एक महीने की सबसे बड़ी गिरावट है। कोरोनावायरस महामारी के कारण ईंधन की मांग और रिफाइनरी उत्पादन प्रभावित होने की वजह से देश के तेल आयात खर्च और वॉल्यूम में यह गिरावट आई।

अप्रैल-मई में तेल आयात खर्च 19.3 अरब डॉलर से गिरकर 5.4 अरब डॉलर पर आया

इसी तरह से चालू कारोबारी साल के पहले दो महीने (अप्रैल-मई) में देश का तेल आयात खर्च गिरकर 5.4 अरब डॉलर पर आ गया, जो एक साल पहले की समान अवधि में 19.3 अरब डॉलर था। इस दो महीने में आयात का वॉल्यूम गिरकर 3.1 करोड़ टन पर आ गया, जो पिछले साल की समान अवधि में 3.9 करोड़ टन था।

क्रूड का भाव एक साल पहले के मुकाबले करीब आधा

अप्रैल और मई में क्रूड की वैश्विक कीमत में 50 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई। अप्रैल में क्रूड की औसत कीमत करीब 20 डॉलर प्रति बैरल थी। मई में यह 30 डॉलर प्रति बैरल से कुछ ऊपर पहुंच गई। हालांकि पिछले साल मई में क्रूड का भाव 70 डॉलर प्रति बैरल से कुछ ऊपर था। और वर्तमान भाव अब भी इसका करीब आधा है।

40 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचा क्रूड का भाव

तेल क्षेत्र के एक जानकार ने कहा कि मौजूदा हालात को देखते हुए चालू कारोबारी साल में तेल आयात खर्च को पिछले कारोबारी साल के मुकाबले घटाकर करीब आधा किया जा सकता है। हालांकि यह इस पर निर्भर करता है कि कोरोनावायरस महामारी का संकट कब तक बना रहता है और मांग को यह किस प्रकार से प्रभावित करता है। इस महीने तेल की कीमत बढ़कर 40 डॉलर के पार पहुचं चुकी है। यदि संकट खत्म होने के संकेत मिले तो कीमत और बढ़ सकती है।

85 फीसदी तेल जरूरत को आयात से पूरा करता है भारत

पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (पीपीएसी) के अनुमान के मुताबिक कारोबारी साल 2019-20 में देश का तेल आयात खर्च 100 अरब डॉलर से कुछ ज्यादा रहा है। यदि चालू कारोबारी साल में यह घटकर करीब 50 अरब डॉलर रह जाता है, तो सरकार को तेल आयात खर्च में काफी राहत मिल जाएगी। 2019-20 में तेल आयात खर्च 112 अरब डॉलर का था। कारोबारी साल 2015-16 में जब तेल कीमत में भारी गिरावट आई थी, तब देश का तेल आयात खर्च घटकर महज 64 अरब डॉलर पर आ गया था। गौरतलब है कि भारत अपनी तेल 85 फीसदी तेल जरूरतों को पूरा करने के लिए आयात पर निर्भर है।