डेट सिक्योरिटीज पर बांड धारकों को डिफॉल्ट से बचाने के लिए सेबी ने ऑपरेशनल फ्रेमवर्क को नोटिफाई किया, एक जुलाई से होगा लागू

  • यह नया फ्रेमवर्क संकटग्रस्त असेट्स वाले फंड की मदद कर सकता है
  • स्टॉक एक्सचेंज को मास्टर फाइल के साथ अपडेट करना होगा

दैनिक भास्कर

Jun 24, 2020, 08:28 AM IST

मुंबई. कोरोना संबंधित आर्थिक तनाव के कारण कई इश्यूअर्स का डेट सिक्योरिटीज पर डिफ़ॉल्ट होने की आशंका बढ़ गई है। बांड धारकों को इन डिफॉल्ट से बचाने के लिए सेबी ने डेट के लिए ऑपरेशनल फ्रेमवर्क को नोटिफाई किया है। नोटिफाई से संबंधित यह सर्कुलर 1 जुलाई से लागू होगा। यह ऑपरेशनल फ्रेमवर्क बांड के लिए भारत में एक संकटग्रस्त फंड बाजार को जन्म दे सकता है।

अभी तक मैच्योरिटी से पहले डेट सिक्योरिटीज पर व्यापार को सस्पेंड किया जाता है

अभी तक एक्सचेंज रिडेम्पशन या मैच्योरिटी से पहले डेट सिक्योरिटीज पर ट्रेड को सस्पेंड करते हैं। डिफॉल्ट के मामले में म्यूचुअल फंड जैसे बॉन्ड होल्डर को इन बॉन्ड्स को बेचने में प्रतिबंधों का सामना करना पड़ता है। सेबी ने इन प्रतिबंधों को दूर करने का फैसला किया लेकिन कुछ प्रतिबंध के साथ। सर्कुलर में सेबी ने कहा कि इश्यूअर या डिबेंचर ट्रस्टी से सूचना की तारीख से 2 कार्य दिवसों के भीतर इश्यूअर्स ने अपने पेमेंट में डिफॉल्ट किया तो स्टॉक एक्सचेंज में मास्टर फाइल को अपडेट करेंगे। ऐसे डेट सिक्योरिटीज में लेनदेन पर प्रतिबंध हटा देंगे।

म्यूचुअल फंड ने 4,000 करोड़ रुपए के असेट्स को साइड पॉकेट किया है

कोविड-19 के बाद सेबी बाजार सहभागियों के लिए राहत उपाय शुरू कर रहा है। केएस लीगल एंड एसोसिएट्स में मैनेजिंग पार्टनर सोनम चांदवानी ने कहा कि मैच्योरिटी से जुड़े पेमेंट में डिफॉल्ट करने वाली डेट सिक्योरिटीज में लेनदेन की अनुमति देने के लिए यह नया फ्रेमवर्क संकटग्रस्त असेट्स वाले म्यूचुअल फंड की मदद कर सकता है। म्यूचुअल फंडों ने 4,000 करोड़ रुपए की संकट वाली  परिसंपत्तियों (troubled assets) को साइड पॉकेट किया है। पोस्ट लॉकडाउन अवधि में इन खातों से पैसा वसूलने में काफी मुश्किल हो रही है।

साइड पॉकेट म्यूचुअल फंड डेट स्कीम में निवेश किए गए पैसे को सुनिश्चित करता है जो संकट वाली असेट्स से तब तक जुड़ा रहता है जब तक कि फंड कंपनी से नकदी नहीं मिलती है।