टाटा मोटर्स को मार्च तिमाही में 9,864 करोड़ रुपए का कंसॉलिडेटेड घाटा, एक साल पहले हुआ था 1,108.66 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ

  • कुल कंसॉलिडेटेड आय 86,422.33 करोड़ रुपए से घटकर 62,492.96 करोड़ रुपए पर आई
  • जेएलआर ने मार्च तिमाही में 50.1 करोड़ पाउंड का घाटा और 5.4 अरब पाउंड की आय दर्ज की

दैनिक भास्कर

Jun 15, 2020, 08:37 PM IST

नई दिल्ली. टाटा मोटर्स ने सोमवार को कहा कि जनवरी-मार्च तिमाही में उसे 9,863.73 करोड़ रुपए का कंसॉलिडेटेड घाटा हुआ है। एक साल पहले की समान तिमाही में कंपनी ने 1,108.66 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ दर्ज किया था। कंपनी की कुल कंसॉलिडेटेड आय 62,492.96 करोड़ रुपए रही, जो एक साल पहले की समान अवधि में 86,422.33 करोड़ रुपए थी।

स्टैंडअलोन घाटा 4,871.05 करोड़ रुपए रहा

मार्च तिमाही में कंपनी का स्टैंडअलोन घाटा 4,871.05 करोड़ रुपए था। एक साल पहले की समान तिमाही में कंपनी ने 106.19 करोड़ रुपए का स्टैंडअलोन शुद्ध लाभ दर्ज किया था। कंपनी की ब्रिटिश इकाई जैगुआर लैंड रोवर (जेएलआर) ने मार्च तिमाही में 50.1 करोड़ पाउंड का घाटा और 5.4 अरब पाउंड की आय दर्ज की।

संपूर्ण कारोबारी साल में 11,975.23 करोड़ रुपए का कंसॉलिडेटेड घाटा

संपूर्ण कारोबारी साल 2019-20 में टाटा मोटर्स ने 11,975.23 करोड़ रुपए का कंसॉलिडेटेड घाटा दर्ज किया। इससे पिछले कारोबारी साल 2018-19 में यह आंकड़ा 28,724.20 करोड़ रुपए था। पिछले कारोबारी साल में कंपनी की कंसॉलिडेटेड आय 2,61,067.97 करोड़ रुपए रही। इससे पिछले कारोबारी साल में कंपनी ने 3,01,938.40 करोड़ रुपए की कुल आय दर्ज की थी। जेएलआर ने पिछले कारोबारी साल में 42.2 करोड़ पाउंड का घाटा और 23 अरब पाउंड की आय दर्ज की।

पहले से जारी आर्थिक सुस्ती के अलावा लॉकडाउन का भी असर

कंपनी ने कहा कि आर्थिक सुस्ती, नकदी की समस्या और बीएस-6 संबंधी निर्देश के कारण बाजार में पहले से ही मांग कम थी। इसके बाद लॉकडाउन ने भी कारोबार का प्रभावित किया। वाहनों और खासकर मीडियम और हैवी कमर्शियल वाहनों की बिक्री में भारी गिरावट आई। जेएलआर पिछले कारोबारी साल की दूसरी और तीसरी तिमाही में लाभ में आ गई थी। लेकिन चौथी तिमाही में कोरोनावायरस महामारी ने उसके नतीजे को बुरी तरह प्रभावित किया।

पिछला कारोबारी साल वाहन उद्योग के लिए बेहद बुरा : गुएंटर बशेक

टाटा मोटर्स के सीईओ और एमडी गुएंटर बशेक ने कहा कि पिछला कारोबारी साल वाहन उद्योग के लिए काफी बुरा रहा। नकदी संकट, तेल की ऊंची कीमत, एक्सल लोड नियमों में बदलाव और बीएस-6 ट्र्रांजीशन के कारण कारोबार में भारी सुस्ती रही। इसके बाद मध्य मार्च में महामारी और देशव्यापी लॉकडाउन के कारण आपूर्ति बाधित होने से समस्या और बढ़ गई।