जून तिमाही के परिणामों को टालने या फिर सितंबर के साथ मर्ज करने के लिए सेबी से संपर्क कर रही हैं कंपनियां

  • जून तिमाही में कंपनियों के रिजल्ट खराब आने की आशंका है
  • इससे शेयरों की बिकवाली होगी और बुरा असर दिख सकता है

दैनिक भास्कर

May 20, 2020, 06:19 PM IST

मुंबई. शेयर बाजार में लिस्टेड फर्म जून तिमाही के वित्तीय परिणाम को आगे टालने या सितंबर तिमाही के साथ पेश करने के लिए भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) से संपर्क कर रहे हैं। कारण यह है कि इन कंपनियों को यह चिंता सता रही है कि अप्रैल और जून के बीच हुआ नुकसान और शेयरों में गिरावट निवेशकों को अस्थिर कर सकती हैं।

शेयरों में गिरावट से कंपनियां चिंतित हैं

लॉकडाउन के बाद स्टॉक की कीमतों में गिरावट से कंपनियां चिंतित हैं। कुछ प्रमुख संस्थानों ने भी सेबी से आग्रह किया है कि वह preferential equity offer और ओपन ऑफर के मूल्य निर्धारण पर नियमों में ढील देने पर विचार करे। इससे कैपिटल इंफ्यूजन के साथ-साथ रिवर्स बुक बिल्डिंग के माध्यम से एक कंपनी को डीलिस्ट करने की प्रक्रिया को सरल बनाया जा सके। जबकि शेयर विश्लेषकों और निवेशकों ने जून तिमाही के लिए एक संभावित गिरावट देखते हुए मूल्य निर्धारण शुरू कर दिया है।

तिमाही समाप्त होने के 45 दिनों के अंदर रिजल्ट जारी करना होता है

एक चार्टर्ड अकाउंटेंट ने कहा कि यह अभूतपूर्व स्थिति है। लेकिन नियामक को पारदर्शिता और कॉर्पोरेट गवर्नेंस मानकों के खिलाफ प्रस्ताव की जांच करनी होगी। सूचीबद्ध कंपनियों को तिमाही के समाप्त होने के 45 दिनों के भीतर अपने परिणाम घोषित करने होते हैं। प्रफरेंशियल आवंटन के लिए मूल्य निर्धारण दिशानिर्देश में इश्यू प्राइस को दो सप्ताह या पिछले 26 सप्ताह का औसत, जो भी अधिक हो, होना चाहिए।

सीआईआई और फिक्की ने भी इस मुद्दे को उठाया

हालांकि, 500 कंपनियों का विश्लेषण मौजूदा स्टॉक प्राइस और सेबी फॉर्मूले के आधार पर कीमत के बीच 50 प्रतिशत के अंतर को दर्शाता है। इससे कंपनियों के लिए प्रफरेंशियल रुट के जरिए फंड जुटाना मुमकिन हो जाता है। इसकी जरूरत को पूंजी की तत्काल जरूरत को देखते हुए कंपनियों के लिए सबसे अच्छा विकल्प समझा जाता है। यह एक ऐसा मुद्दा है जिसे उद्योग संघों के फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) और भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने नियामक को अपने आवेदनों में बताया है।

सेबी लेगा इस पर अंतिम फैसला

इस मामले की जानकारी रखनेवाले एक व्यक्ति ने बताया कि अभी इस सिफारिश पर अंतिम विचार करना बाकी है। फिक्की की अध्यक्ष संगीता रेड्डी और निवेश बैंकर सुनील सांघई ने सेबी के अध्यक्ष अजय त्यागी और अन्य वरिष्ठ नियामक अधिकारियों के साथ उद्योग निकाय के प्रतिनिधि के रूप में भाग लिया। त्यागी के साथ सीआईआई के कांफ्रेंस कॉल में एसोसिएशन के कई सदस्य और पदाधिकारियों ने भाग लिया।

यह भी कहा गया है कि कंपनियों को वित्तीय जानकारी के साथ प्रपोजल डाक्युमेंट की अनुमति दी जानी चाहिए। एक व्यक्ति ने कहा कि वे सेबी से अनुरोध कर रहे हैं कि वह सेबी से नई मंजूरी लिए बिना इस मुद्दे को टालने की अनुमति दे।