छोटे कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों से मिल रहे रिकवरी के संकेत, एफएमसीजी कंपनियों ने शुरू की हायरिंग

  • सेल्स और डिस्ट्रीब्यूशन से जुड़े लोगों की मांग कर रही हैं एफएमसीजी कंपनियां
  • रिवर्स माइग्रेशन और मनरेगा फंड बढ़ने से कंपनियों को खपत बढ़ने की उम्मीद

दैनिक भास्कर

Jun 29, 2020, 09:29 AM IST

नई दिल्ली. फास्ट मूविंग कंज्यूमर गुड्स (एफएमसीजी) कंपनियों और उनके भागीदारों ने छोटे कस्बों और ग्रामीण क्षेत्र में हायरिंग शुरू कर दी है। इसका कारण यह है कि इन क्षेत्रों में रिकवरी के संकेत दिख रहे हैं। हायरिंग प्रक्रिया देखने वाली कंपनियों रैंडस्टैड इंडिया और टीमलीज के अधिकारियों का कहना है कि एफएमसीजी कंपनियों ने ग्रामीण क्षेत्रों पर फोकस बढ़ा दिया है। 

ऑटो कंपनियों को हायरिंग की जल्दी नहीं

इसके विपरीत, ऑटो कंपनियों और उनके डीलर्स को हायरिंग की कोई जल्दी नहीं है। ऑटो सेक्टर में मई महीने में ट्रैक्टर को छोड़कर सभी वाहन सेगमेंट में बिक्री में गिरावट दर्ज की गई है। ऑटो सेकटर में स्किल्ड मैनपावर की आवश्यकता होती है, जबकि एफएमसीजी मार्केट में सेमी स्किल्ड मैनपावर की हायरिंग होती है। ऑटोमोटिव स्किल्स डवलपमेंट काउंसिल के प्रेसीडेंट निकुंज सांघी ने कहा कि एफएमसीजी कंपनियों को स्किल्ड लोगों की जरूरत नहीं होती है, जबकि ऑटो डीलरशिप्स के लिए ये जरूरी हैं। निकुंज के मुताबिक, ऑटो सेक्टर दो से तीन सप्ताह में लोगों को नौकरी देने के लायक हो जाएगा। 

सेल्स और डिस्ट्रीब्यूशन से जुड़े लोगों की आ रही मांग

रैंडस्टैड इंडिया के यशाब गिरी का कहना है कि पिछले एक महीने में देश के कुछ हिस्सों में लॉकडाउन खत्म होने के बाद एफएमसीजी कंपनियां लोगों की हायरिंग कर रही हैं। एफएमसीजी कंपनियों की ओर से ग्रामीण क्षेत्रों के लिए सेल्स और डिस्ट्रीब्यूशन से जुड़े लोगों की मांग की जा रही है। टीमलीज के सुदीप सेन का कहना है कि कंपनियां हायरिंग के समय छोटे कस्बों की जरूरतों को समझना चाहती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि रिवर्स माइग्रेशन और मनरेगा योजना के तहत फंड आवंटन में बढ़ोतरी के कारण एफएमसीजी कंपनियों ने हायरिंग तेज की है।

ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार बढ़ने से खपत बढ़ने की उम्मीद

सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई) का डाटा बताता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार बढ़ने के कारण 21 जून को खत्म हुए सप्ताह में बेरोजगारी दर गिरकर 7.3 फीसदी पर आ गई है। हालांकि, इस अवधि में शहरी बेरोजगारी दर 11.2 फीसदी पर रही है। इन संकेतों से कंपनियों को ग्रामीण क्षेत्रों में खपत बढ़ने की उम्मीद है। इससे कंपनियों को कुछ क्षेत्रों में बिक्री बढ़ने की उम्मीद है। एफएमसीजी कंपनियों की एक तिहाई सेल्स और ऑटोमोबाइल कंपनियों की 20 फीसदी सेल्स ग्रामीण क्षेत्रों में होती है।