चौथी तिमाही में 5237 करोड़ के नुकसान के बाद भी भारती एयरटेल के शेयरों में 10% तक का उछाल, 52 सप्ताह के उच्चतम स्तर का नया रिकॉर्ड बनाया

  • जनवरी-मार्च तिमाही में राजस्व में 15% से ज्यादा की तेजी से निवेशकों का भरोसा बढ़ा
  • कंपनी का एवरेज रेवेन्यू प्रति यूजर भी 123 रुपए से बढ़कर 154 रुपए पर पहुंचा

दैनिक भास्कर

May 19, 2020, 11:18 AM IST

नई दिल्ली. वित्त वर्ष 2019-20 की चौथी तिमाही में 5237 करोड़ के नुकसान के बावजूद भारती एयरटेल के शेयरों में मंगलवार को तेजी 10 फीसदी तक की तेजी देखी गई। कारोबार के दौरान बीएसई में कंपनी के शेयर 591.95 रुपए प्रति शेयर पर पहुंच गए। यह इसका 52 सप्ताह का उच्चतम स्तर का नया रिकॉर्ड है।

9.10 फीसदी की तेजी के साथ कर रहा कारोबार

मंगलवार को भारती एयरटेल के शेयर 559 रुपए प्रति पर हुई। शुरुआत से ही शेयरों में तेजी दिखी और यह 9.56 बजे 591 रुपए प्रति शेयर के स्तर के स्तर को पार कर गया। हालांकि, इसके बाद थोड़ी नरमी देखी गई। करीब 10 मिनट के कारोबार के बाद से यह लगातार 585 रुपए प्रति शेयर के उपर कारोबार कर रहा है। 10.42 बजे यह 9.10 फीसदी की तेजी के साथ 587.10 रुपए प्रति शेयर पर कारोबार कर रहा था। इस तेजी के साथ ही बीएसई में भारती एयरटेल का मार्केट कैपिटलाइजेशन बढ़कर 3.20 लाख करोड़ रुपए के पार पहुंच गया है।

जनवरी-मार्च तिमाही में 5237 करोड़ रुपए का नुकसान

भारती एयरटेल ने सोमवार देर शाम वित्त वर्ष 2019-20 (जनवरी-मार्च) तिमाही के वित्तीय नतीजे घोषित किए। कंपनी के अनुसार, उसे इस तिमाही में 5237 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। इस अवधि में कंपनी का कुल राजस्व 23,723 करोड़ रुपए रहा है जिसमें वार्षिक आधार पर 15.1 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। कंपनी का एवरेज रेवेन्यू प्रति यूजर (एआरपीयू) बढ़कर 154 रुपए पर पहुंच गया है जो एक साल पहले समान अवधि में 123 रुपए था।

इसलिए आई शेयरों में तेजी

जानकारों का मानना है कि एआरपीयू में ग्रोथ और 4जी नेटवर्क में सब्सक्राइबर्स की संख्या बढ़ने से एयरटेल का भारतीय कारोबार मजबूत होता दिख रहा है। इसके अलावा कंपनी के अफ्रीकी कारोबार ने भी अनुमान से बेहतर प्रदर्शन किया है। इससे निवेशकों का भरोसा बढ़ा है और अधिकांश ब्रोकरेज ने एयरटेल में खरीदारी की सलाह दी है। इससे एयरटेल के शेयरों में तेजी आई है। भारती एयरटेल के एमडी और सीईओ गोपाल विट्ठल इंडिया एंड साउथ एशिया ने भी ग्रोथ के लिए टैरिफ में बढ़ोतरी और 4जी ग्राहकों की संख्या बढ़ने को अहम कारण माना है।