चीन से कंपनियां दूसरे देशों में जाती हैं तो उससे भारत को फायदा नहीं होगा, गरीबों के हाथ में देनी होगी रकम- अभिजीत बनर्जी

  • भारत को जीडीपी के अनुपात में ज्यादा खर्च करना चाहिए
  • देश में गरीब लोगों के पास अब बिलकुल पैसा नहीं बचा है

दैनिक भास्कर

May 12, 2020, 06:56 PM IST

मुंबई. नोबेल पुरस्कार विजेता अभिजीत बनर्जी ने कहा है कि ऐसा जरूरी नहीं है कि कोविड-19 महामारी के चलते भारत को चीन से कारोबार स्थानांतरित करने से फायदा होगा। बनर्जी ने कहा कि हर कोई कोविड-19 प्रकोप के लिए चीन को दोषी ठहरा रहा है क्योंकि यह वहीं से निकला है। यहां तक कि लोग कह रहे हैं कि भारत को फायदा होगा क्योंकि कारोबार चीन से शिफ्ट होकर भारत आएगा। भारत को चाहिए कि वह गरीबों के हाथ में रकम दे।

चीन के उत्पादन सस्ते हो जाएंगे

नोबल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री ने कहा कि यह सच नहीं हो सकता है कि भारत को फायदा होगा। अगर चीन अपनी मुद्रा का अवमूल्यन करता है तो क्या होगा। उस स्थिति में, चीनी उत्पाद सस्ते होंगे और लोग उसके उत्पादों को ही खरीदते रहेंगे। केंद्र द्वारा राहत पैकेज के लिए खर्च किए जाने वाले सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के अनुपात के बारे में बात करते हुए बनर्जी ने कहा कि अमेरिका, ब्रिटेन और जापान जैसे देश अपने-अपने जीडीपी का एक बड़ा हिस्सा इस पर खर्च कर रहे हैं। भारत ने जीडीपी का एक प्रतिशत से भी कम 1.70 लाख करोड़ रुपए खर्च किया है। उन्होंने कहा, हमें जीडीपी के ज्यादे अनुपात में खर्च करना चाहिए।

देश के लोगों के पास हाई पर्चेजिंग पावर नहीं है

बनर्जी ने कहा कि केंद्र ने कोविड-19 फैलने के कारण आर्थिक अड़चन से प्रभावित गरीबों की मुश्किलों को कम करने के लिए 1.70 लाख करोड़ रुपए से अधिक के पैकेज की घोषणा की है। अर्थशास्त्र नोबेल पुरस्कार विजेता ने कहा कि मुख्य समस्या यह है कि देश के लोगों के पास हाई पर्चेजिंग पावर नहीं है। गरीब लोगों के पास अब पैसा नहीं है और उनके पास शायद ही कोई पर्चेजिंग पावर बची हो। इसकी कोई डिमांड भी नहीं है। उन्होंने कहा, सरकार को आम लोगों के हाथों में पैसा देना चाहिए क्योंकि वे अर्थव्यवस्था को चलाते हैं, अमीर नहीं।

गरीबों के हाथों में पैसा दिया जाना चाहिए

अर्थशास्त्री ने कहा कि तीन से छह महीने की अवधि में गरीब लोगों के हाथों में पैसा दिया जाना चाहिए। अगर वे उसे खर्च नहीं करते हैं तो कोई समस्या नहीं है। बनर्जी ने बताया कि प्रवासी कामगारों की देखभाल करना केंद्र की जिम्मेदारी है। हमने उनकी समस्याओं के बारे में नहीं सोचा है कि वे कैसे इसका सामना करेंगे। उन्होंने कहा कि प्रवासी मजदूरों की जेब में कोई पैसा नहीं है और उन्हें रहने का ठिकाना भी नहीं है।

सभी को इमर्जेंसी राशन कार्ड देना चाहिए

अभिजीत बनर्जी ने कहा कि तीन-छह महीने की अवधि के लिए सभी को इमरजेंसी राशन कार्ड जारी करने की जरूरत है। यह केंद्र की जिम्मेदारी है। क्योंकि प्रवासी कामगार विभिन्न राज्यों से गुजरते हुए अपने घरों तक पहुंचते हैं। केंद्र सरकार ने लोगों को राहत देने के लिए कुछ कदम उठाए हैं। जिनमें से एक लोन चुकाने पर लगी रोक है। अन्य कदम उठाने की भी जरूरत है। लेकिन समस्या यह है कि मांग कहां है। एमआईटी प्रोफेसर ने कहा कि भारत में काम की कोई कमी नहीं है।

अभी सोशल डिस्टेंसिंग से अर्थव्यवस्था नहीं चल पाएगी

उन्होंने कहा कि दिल्ली और बंगलुरू में कामगारों से कहा जा रहा है कि वे राज्यों को न छोड़ें क्योंकि वहां काम हो रहे हैं। लॉकडाउन के बारे में उन्होंने कहा कि अभी हम इस चरण में नहीं पहुंचे है कि सोशल डिस्टेंसिंग को बनाए रखकर अर्थव्यवस्था को चला सकें। यह कहना आसान है, मगर करना कठिन है। टेस्टिंग सैम्पल्स के बारे में उन्होंने कहा कि भारत एक बड़ा देश है। टेस्टिंग शुरू से ही अधिक होनी चाहिए थी। उन्होंने कहा, हम कोरोनावायरस प्रकोप की सीमा को नहीं जानते क्योंकि कोई जनसंख्या परीक्षण नहीं किया गया था।

लॉकडाउन उठाने से पहले अधिक से अधिक टेस्टिंग किया जाना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि जब ज्यादा टेस्ट होंगे तो मौतें कम होंगी। पश्चिम बंगाल में अब टेस्ट की संख्या बढ़ गई है। इसलिए, इंक्रीमेंटल डेथ धीरे-धीरे कम हो रही है।