चालू वित्त वर्ष में कॉर्पोरेट के मुनाफे में आ सकती है भारी गिरावट, पहली तिमाही के एडवांस टैक्स में 79 प्रतिशत की कमी

  • जून तिमाही में एडवांस टैक्स 8,500 करोड़ रुपए रहा है
  • पिछले साल इसी तिमाही में यह आंकड़ा 50 हजार करोड़ था

दैनिक भास्कर

Jun 25, 2020, 04:29 PM IST

मुंबई. चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही के लिए इंडिया इंक का एडवांस टैक्स भुगतान 79 प्रतिशत घटकर 8,500 करोड़ रुपए हो गया। इससे आने वाले महीनों में गंभीर आर्थिक मंदी और कॉर्पोरेट के मुनाफे में कमी की आशंका बनी हुई है। पिछले साल पहली तिमाही में (15 जून तक) करीब 50,000 करोड़ रुपए के एडवांस टैक्स का भुगतान कंपनियों ने किया था। 

ग्रॉस डायरेक्ट टैक्स में भी आई गिरावट

आंकड़े बताते हैं कि कॉर्पोरेट एडवांस टैक्स और पर्सनल इनकम एडवांस टैक्स, दोनों का क्लेक्शन जमकर गिरा है। इसी तरह वित्त वर्ष 21 की पहली तिमाही में सकल प्रत्यक्ष कर (Gross direct tax) क्लेक्शन लगभग 31 प्रतिशत गिरकर 1 लाख 37 हजार 825 करोड़ रुपए हो गया, जो जून 2019 तिमाही में 1 लाख 99 हजार 755 करोड़ रुपए था।

पूरे वित्त वर्ष के दौरान एडवांस टैक्स में रह सकती है कमी

एक्सपर्ट्स का कहना है कि कमजोर कारोबारी माहौल के चलते आरआईएल, एचडीएफसी, टीसीएस, विप्रो जैसी बड़ी आईटी कंपनियों ने वित्त वर्ष 2021 के पहले दो महीनों में कम एडवांस टैक्स फाइल किया है। जैसी कि उम्मीद थी, कर की दर में कमी के साथ-साथ एक जटिल कारोबारी मंदी के कारण एडवांस टैक्स के आंकड़े प्रभावित हुए हैं। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि एडवांस टैक्स में कमी से पता चलता है कि कंपनियां पूरे वर्ष को लेकर चिंतित हैं, न कि इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही के लिए।

सरकार का 13.91 लाख करोड़ रुपए का लक्ष्य

सरकार ने डायरेक्ट टैक्स (कॉरपोरेट टैक्स और पर्सनल इनकम टैक्स) के जरिए 13.91 लाख करोड़ रुपए का लक्ष्य रखा है। हालांकि सूत्रों की मानें तो आज की तारीख में ग्रॉस कलेक्शन में करीब 30 फीसदी की गिरावट आई है। यहां तक कि लोअर रिफंड के चलते नेट कलेक्शन 32 फीसदी नीचे है। हालांकि आर्थिक गतिविधियों में सुधार हुआ है, लेकिन बहुत कम डिमांड और कम औद्योगिक गतिविधियों को देखते हुए डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन का लक्ष्य बहुत मुश्किल होता जा रहा है।

एडवांस टैक्स पेमेंट में मुंबई टॉप पर 

एडवांस टैक्स कलेक्शन में जो शहर सबसे आगे हैं उसमें मुंबई ने इस साल की पहली तिमाही में 3,751 करोड़ रुपए का टैक्स दिया है। एक साल पहले समान अवधि में यह 17,174 करोड़ रुपए था। यानी इसमें 78 प्रतिशत की गिरावट आई है। दिल्ली ने 7,117 करोड़ के बजाय 1,682 करोड़ रुपए का टैक्स दिया है। इसमें 76.4 प्रतिशत की गिरावट आई है। बंगलुरू के एडवांस टैक्स में 66.8 प्रतिशत की गिरावट आई है। यह 4,534 करोड़ रुपए से घटकर 1,504 करोड़ रुपए पर आ गया है।

चेन्नई में टैक्स कलेक्शन में 81.9 प्रतिशत की गिरावट आई है और यह 3,439 करोड़ से घटकर 622 करोड़ रुपए पर आ गया है। हैदराबाद से टैक्स कलेक्शन में 73.8 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 2,262 करोड़ रुपए से घटकर 502 करोड़ रुपए पर आ गया है।