चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में आर्थिक मंदी से घिर सकता है भारत, आय और नौकरी में कमी बनेगा बड़ा कारण

  • प्रोत्साहन पैकेज के लागू होने की अवधि पर निर्भर करेगी आर्थिक रिकवरी
  • आरबीआई के कदमों से भी आर्थिक रिकवरी के उपायों को मदद मिलेगी

दैनिक भास्कर

May 24, 2020, 06:11 PM IST

नई दिल्ली. आय और नौकरियों में कमी, ग्राहकों की सतर्कता बढ़ने से कोरोना महामारी के बाद उपभोक्ता मांग में रिकवरी में देरी के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में आर्थिक मंदी में घिर सकती है। डन एंड ब्रैडस्ट्रीट के ताजा आर्थिक रिपोर्ट में यह बात कही गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि देश की आर्थिक रिकवरी सरकार के प्रोत्साहन पैकेज के प्रभाव और इसके लागू होने की अवधि पर निर्भर करेगी।

तीन मुख्य पहलुओं पर निर्भर करेगी अर्थव्यवस्था: अरुण सिंह
डन एंड ब्रैडस्ट्रीट इंडिया के मुख्य अर्थशास्त्री अरुण सिंह ने कहा कि अर्थव्यवस्था पर प्रोत्साहन पैकेज का प्रभाव तीन मुख्य पहलुओं पर निर्भर करेगा। इसमें लॉकडाउन को हटाने लगने वाले समय का असर, घोषित किए गए उपायों का प्रभाव और लागू करने की अवधि प्रमुख हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार की ओर से घोषित किया गया उम्मीद से अधिक का प्रोत्साहन पैकेज आर्थिक गतिविधियों को दोबारा शुरू करने में मददगार होगा।

आरबीआई के कदमों से प्रोत्साहन मिलेगा
रिपोर्ट में कहा गया है कि आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाने में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) के कदमों से भी प्रोत्साहन मिलेगा। आरबीआई ने रेपो रेट को 40 आधार अंक घटाकर 4 फीसदी कर दिया है। इसके अलावा लोन मोराटोरियम अवधि में तीन महीने की बढ़ोतरी और वर्किंग कैपिटल फाइनेंस की सुविधा देने का ऐलान किया है। सिंह ने कहा कि सरकार की ओर से घोषित किए गए उपाय सकारात्मक हैं। इनमें से अधिकांश अर्थव्यवस्था में आपूर्ति की मजबूती देने वाले दिखते हैं। यहां यह गौर करने वाली बात है कि मांग के अनुसार आपूर्ति आवश्यक है।

मांग में रहेगी कमी
अरुण सिंह ने कहा कि सरकार के प्रोत्साहन पैकेज में कैश इन हैंड का अभाव है। इससे सामान और सेवाओं की मांग लगातार कम रहेगी। उन्होंने कहा कि कोरोना आपदा के बाद आय और रोजगार के अवसरों की कमी, उपभोक्ताओं के सतर्क रहने से मांग में रिकवरी धीरे-धीरे रहेगी। इसके अलावा भविष्य में बैंकिंग सेक्टर को कर्ज और बैड लोन बढ़ने की चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।

चौथी तिमाही में आ सकती है मंदी
सिंह ने कहा कि लॉकडाउन-4.0 में देश में कुछ आर्थिक गतिविधियों की छूट के बाद भी चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में आर्थिक मंदी का सामना करना पड़ सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि आर्थिक प्रोत्साहन और लिक्विडिटी बढ़ने से अर्थव्यवस्था के बड़े हिस्से में मांग प्रोत्साहित होगी। आपको बता दें कि देश में 25 मार्च से लॉकडाउन लगा हुआ है। इसमें 3 बार बढ़ोतरी की गई है और फिलहाल यह 31 मई तक लागू है।