ग्राहकों की सुविधा व सुरक्षा के लिए डिजिटल लेंडिंग प्लेटफॉर्म्स ग्राहकों को बताएंगे कि वे किस बैंक व एनबीएफसी की तरफ से काम कर रहे हैं

  • आरबीआई ने एक नोटिफिकेशन में बैंक, एनबीएफसी और डिजिटल लेडिंग प्लेटफॉर्म को दिया निर्देश
  • फिनटेक कंपनियां ग्राहकों को लोन मंजूरी पत्र संबंधित बैंक या एनबीएफसी के लेटरहेड पर जारी करेंगी

दैनिक भास्कर

Jun 24, 2020, 09:09 PM IST

नई दिल्ली. भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने इंटरनेट के माध्यम से कर्ज लेने वालों की सुरक्षा व सुविधा के लिए बैंकों, एनबीएफसी और डिजिटल लेंडिंग प्लेटफॉर्म्स को कुछ नए निर्देश दिए हैं। इसके तहत बैंकों व एनबीएफसी को अपने वेबसाइट पर बताना होगा कि उन्होंने किस डिजिटल लेंडिंग प्लेटफॉर्म को ऑनलाइन कर्ज देने का काम दिया है। आरबीआई ने डिजिटल लेंडिंग प्लेटफॉर्म्स से भी कहा है कि वे लोन देते वक्त ग्राहकों को बताएं कि वे किस बैंक या एनबीएफसी की तरफ से काम कर रहे हैं।

आरबीआई के दिशा निर्देश

1. बैंक व एनबीएफसी अपने वेबसाइट पर उन डिजिटल लेडिंग प्लेटफॉर्म्स के नाम दर्शाएंगे, जिन्हें उन्होंने अपना एजेंट बनाया है।
2. बैंक व एनबीएफसी एजेंट के रूप में काम करने वाले डिजिटल लेंडिंग प्लेटफॉर्म्स को निर्देश देंगे कि वे ग्राहकों को अग्रिम तौर पर बताएं कि वे किस बैंक या एनबीएफसी की तरफ से उनसे बात कर रहे हैं।
3. लोन मंजूर किए जाने के तुरंत बाद और लोन जारी किए जाने से पहले ग्राहकों को संबंधित बैंक या एनबीएफसी के लेटरहेड पर सेंक्शन लेटर जाारी किया जाएगा।
4. लोन मंजूर किए जाने और जारी किए जाने के समय सभी कर्जधारकों को लोन एग्रीमेंट की एक कॉपी और एग्रीमेंट में उल्लिखित सभी इंक्लोजर्स की कॉपी दी जाएंगी।
5. बैंक या एनबीएफसी द्वारा सेवा में लगाए गए डिजिटल लेंडिंग प्लेटफॉर्म्स पर प्रभावी पर्यवेक्षण व निगरानी सुनिश्चित की जाएगी।
6. शिकायत निपटारा प्रक्रिया के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए समुचित प्रयास किए जाएंगे।

लेंडिंग प्लेटफॉर्म्स के बारे में आरबीआई को मिली ढेरों शिकायतें

आरबीआई ने कहा कि ऐसा देखा गया है कि लेंडिंग प्लेटफॉर्म खुद का कर्जदाता कंपनी के रूप में पेश करते हैं और उन बैंकों व एनबीएफसी का नाम नहीं बताते, जिनके लिए वे काम करते हैं। इसके कारण ग्राहक उस शिकायत समाधान प्रक्रिया का उपयोग नहीं कर पाते, जिनकी व्यवस्था नियामकीय ढांचे में की गई है। लेंडिंग प्लेटफॉर्म्स के बारे में ढेरों शिकायतें आती हैं। मोटे तौर पर उनमें अत्यधिक ऊंची ब्याज दर, ब्याज तय करने के अपारदर्शी तरीके, सख्त उगाही प्रक्रिया, पर्सनल डाटा का अनधिकृत उपयोग और खराब व्यवहार की बात की जाती है।

बैंकों व एनबीएफसी को फिनटेक कंपनियों के जरिये लोन देने की अनुमति है

फिनटेक कंपनियों द्वारा दिए जाने वाले ऑनलाइन कर्ज से ग्राहकों को काफी सुविधा होती है। आरबीआई ने बैंकों और एनबीएफसी को यह अनुमति दी है कि वे खुद ऑनलाइन तरीके से लोन दे सकते हैं या वे आउटसोर्सिंग अरेंजमेंट के तहत किसी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिये भी लोन दे सकते हैं। कई बैंक और एनबीएफ ने ऑनलाइन लोन देने के लिए डिजिटल लेंडिंग प्लेटफॉर्म्स का उपयोग किया है।