गैरी कर्स्टन ने कहा- सिर्फ 7 मिनट में भारतीय टीम का मुख्य कोच बना, अनुभव नहीं था और आवेदन भी नहीं किया

  • दक्षिण अफ्रीकी गैरी कर्स्टन का इंटरव्यू 2008 में हुआ था, वर्तमान कोच रवि शास्त्री भी चयन समिति में थे
  • कर्स्टन की कोचिंग में ही भारत ने 2011 में वनडे वर्ल्ड कप जीता था, 2009 में टीम टेस्ट में नंबर-1 बनी थी

दैनिक भास्कर

Jun 15, 2020, 03:28 PM IST

दक्षिण अफ्रीका के पूर्व बल्लेबाज गैरी कर्स्टन ने कहा कि भारतीय टीम के मुख्य कोच के लिए उनका सेलेक्शन सिर्फ 7 मिनट में हो गया था। जबकि उन्हें कोई अनुभव भी नहीं था और उन्होंने आवेदन भी नहीं किया था। कर्स्टन को पूर्व भारतीय कप्तान और सेलेक्शन कमेटी के सदस्य सुनील गावस्कर ने ईमेल करके इंटरव्यू के लिए बुलाया था।

कर्स्टन की कोचिंग में ही भारत ने 2011 में वनडे वर्ल्ड कप जीता था। महेंद्र सिंह धोनी तब टीम के कप्तान थे। साथ ही 2009 में टीम इंडिया टेस्ट में नंबर-1 बनी थी। कर्स्टन को भारत के सबसे सफल कोचों में गिना जाता है। वे 2008 में दो साल के लिए कोच बने थे। बाद में कार्यकाल एक साल बढ़ गया था।

गावस्कर ने ई-मेल करके बुलाया था
उन्होंने कहा, ‘‘मुझे सुनील गावस्कर का एक ई-मेल मिला था। उन्होंने पूछा कि क्या मैं भारतीय टीम का कोच बनना चाहता हूं। मैंने उसे फर्जी समझा। उन्होंने दूसरा मेल भेजकर इंटरव्यू के लिए बुलाया। मैंने वह मेल पत्नी को दिखाया। उन्होंने भी कहा कि यह गलती से आया होगा। हमने इसे मजाक समझा, क्योंकि मेरे पास कोई कोचिंग का अनुभव नहीं था।’’

इंटरव्यू के लिए कर्स्टन ने कोई तैयारी नहीं की थी
कर्स्टन ने कहा, ‘‘मैं इंटरव्यू के लिए आया तो सबसे पहले अनिल कुंबले से मिला। तब वे भारतीय टीम के कप्तान थे। उन्होंने मुझे आने का कारण पूछा। मैंने कहा कि आपका कोच बनने के लिए इंटरव्यू देने आया हूं। इतना कहकर हम दोनों ही हंसने लगे। 10 मिनट बाद मैं इंटरव्यू के लिए अंदर गया। गंभीर माहौल में मुझसे पूछा गया कि भारतीय टीम के भविष्य के लिए मेरा प्लान क्या है? मैंने कहा कि अभी कुछ भी प्लान नहीं है, क्योंकि मैं जल्दी में आया हूं और कुछ भी तैयारी नहीं की।’’

‘चैपल का नाम काटकर कॉन्ट्रेक्ट पेपर पर मेरा नाम लिखा’
पूर्व कोच ने कहा, ‘‘सेलेक्शन कमेटी के सदस्य रवि शास्त्री ने मुझसे पूछा कि भारतीय टीम के हराने के लिए तुम्हारी दक्षिण अफ्रीका टीम में क्या रणनीति बनाई जाती थी। तब मैंने उनकी बात का जवाब दो-तीन मिनट में दे दिया, लेकिन तब मैंने रणनीति नहीं बताई थी। सेलेक्शन कमेटी मुझसे इम्प्रेस थी। इंटरव्यू को 7 मिनट ही हुए थे और अधिकारियों ने कॉन्ट्रेक्ट पेपर मुझे दे दिए थे। मैंने पहला पेज देखा, लेकिन मुझे उसमें मेरा नाम नहीं मिला। उस पर पूर्व कोच ग्रेग चैपल का नाम था। मैंने कॉन्ट्रेक्ट पेपर वापस कर दिया। तब उन्होंने जेब से पेन निकाला और चैपल का नाम काटकर मेरा नाम लिख दिया।’’

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