कोविड-19 से महाराष्ट्र को 4.72, तमिलनाडु को 2.86 और गुजरात को 2.61 लाख करोड़ रुपए का होगा नुकसान

  • अगस्त से कोविड-19 के नए मरीजों की संख्या में कमी दिख सकती है
  • अम्फान तूफान और प्रवासी मजदूरों के गांव जाने से स्थिति बिगड़ सकती है

दैनिक भास्कर

May 26, 2020, 03:04 PM IST

मुंबई. अब जबकि भारत में कोविड-19 धीरे-धीरे अपने टॉप की ओर बढ़ रहा है, ऐसे में राज्यों की धड़कनें तेज हो गई हैं। इस महामारी से अगर किसी राज्य को सबसे ज्यादा नुकसान होगा तो उसमें महाराष्ट्र को 4.72 लाख करोड़, तमिनलाडु को 2.86 लाख करोड़ और गुजरात को 2.61 लाख करोड़ रुपए का नुकसान होगा।

उत्तर प्रदेश को 2.53 और कर्नाटक को 2.02 लाख करोड़ का नुकसान

देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई की ओर से मंगलवार को रिपोर्ट जारी की गई है। इस रिपोर्ट के अनुसार देश में जीडीपी के नुकसान के आधार पर अकेले महाराष्ट्र को 15.6 प्रतिशत का घाटा होगा। तमिलनाडु को 9.4 प्रतिशत और गुजरात को 8.6 प्रतिशत का नुकसान होगा। रिपोर्ट कहती है कि उत्तर प्रदेश को 2.53 लाख करोड़ रुपए (जीडीपी के रूप में 8.3 प्रतिशत) का नुकसान होगा तो कर्नाटक को 2.02 लाख करोड़ रुपए का घाटा होगा। जो देश की जीडीपी के नुकसान का 6.7 प्रतिशत होगा।

पश्चिम बंगाल को 1.99 और दिल्ली को 1.69 लाख करोड़ का नुकसान

पश्चिम बंगाल को 1,99,069 लाख करोड़ रुपए का घाटा होगा। दिल्ली को 1,69,234 लाख करोड़ रुपए का घाटा होगा। राजस्थान को 1,53,733 लाख करोड़ रुपए का घाटा होगा। आंध्र प्रदेश को 149,289 लाख करोड़ रुपए का घाटा होगा। मध्य प्रदेश को 1,08,012 लाख करोड़ रुपए का नुकसान होगा। सबसे कम अंडमान एंड निकोबार द्वीप समूह को होगा जो 1,475 करोड़ रुपए होगा।

टॉप 10 शहरों के पास कुल जीडीपी का 75 प्रतिशत हिस्सा

देश के टॉप 10 शहरों की बात करें तो देश के कुल जीडीपी का 75 प्रतिशत हिस्सा इन राज्यों का है। इन्हीं तीन राज्यों में सबसे ज्यादा कोविड-19 के मामले हैं। रिपोर्ट के अनुसार भारत लॉकडाउन के चौथे चरण में प्रवेश कर गया है। आउटपुट के असर को समझना अब महत्वपूर्ण हो गया है। पहली बार जब देश में लॉकडाउन लागू किया गया था, तब हमारी जीडीपी का अनुमान 2.6 प्रतिशत था। उसके बाद से यह लगातार घटता गया और अब 4.7 प्रतिशत निगेटिव में आ गया है।

50 प्रतिशत घाटा रेड जोन वाले इलाकों में होगा

हालांकि रिपोर्ट कहती है कि अगर बॉटम अप अप्रोच किया जाए तो अनुमानित जीडीपी वृद्धि पहले की तुलना में थोड़ी अच्छी हो सकती है। हमारा अनुमान है कि कुल जीएसडीपी का नुकसान 30.3 लाख करोड़ रुपए हो सकता है। यह कुल जीएसडीपी का 13.5 प्रतिशत होगा। इसमें से 50 प्रतिशत नुकसान रेड जोन में होगा, जहां भारत के सबसे ज्यादा बड़े शहर हैं।

ग्रीन जोन की 80 प्रतिशत आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में

ऑरेंज और रेड जोन दोनों का नुकसान कुल घाटे का 90 प्रतिशत होगा। ग्रीन जोन की करीबन 80 प्रतिशत आबादी ग्रामीण भारत में रहती है जो पूरी तरह से गतिविधियों के लिए खुला है। रिपोर्ट के अनुसार वित्तीय वर्ष 2020 में चौथी तिमाही में जीडीपी 1.5 प्रतिशत से नीचे रह सकती है। हमारा अनुमान है कि यह 1.2 प्रतिशत रह सकती है। वित्तीय वर्ष 2020 में जीडीपी 4.2 प्रतिशत रह सकती है।

जीवीए और जीडीपी में इस बार ज्यादा अंतर होगा

रिपोर्ट कहती है कि इस समय दिलचस्प बात यह है कि जीडीपी और जीवीए (ग्रॉस वैल्यू एडेड) की वृद्धि में अंतर है। आमतौर पर इन दोनों की वृद्धि में बहुत ज्यादा अंतर नहीं होता है। पर इस समय शुद्ध इंडाइरेक्ट टैक्स में भारी नुकसान से दोनों में बड़ा अंतर पैदा हुआ है। रिपोर्ट का अनुमान है कि रीयल जीवीए की वृद्धि दर वित्तीय वर्ष 2021 में -3.1 प्रतिशत के करीब रह सकती है। रीयल जीडीपी वृद्धि दर इसी दौरान -6.8 प्रतिशत रह सकती है।

नेट इंडाइरेक्ट टैक्स में 10.5 लाख करोड़ रुपए की होगी कमी

वित्तीय वर्ष 2021 में नेट इंडाइरेक्ट टैक्स में 10.4 लाख करोड़ रुपए की कमी होगी। रिपोर्ट कहती है कि सरकार तीसरी और चौथी तिमाही में काफी बारीक से इस तरह के नुकसान पर नजर रख सकती है। हो सकता है कि इस साल के अंत तक एक और पैकेज घोषित हो जाए।

जून के अंतिम हफ्ते में शीर्ष पर होगा कोरोना 

हालांकि देश में हाल के 7 दिनों के मूविंग एवरेज के नए कोविड मामलों को देखें तो रिपोर्ट कहती है कि जून के अंतिम हफ्ते में कोरोना के नए मामले टॉप पर होंगे। इसकी शुरुआत 20 जून से होगी। कोरोना के नए मामलों में कमी अगस्त की शुरुआत से दिखेगी जो सितंबर मध्य तक कम होता रहेगा। हालांकि यह अभी के रुझान पर आधारित है। पर बंगाल में अम्फान तूफान और प्रवासी मजदूरों का पलायन इसे बिगाड़ सकता है।

100 से एक लाख मरीज तक पहुंचने में 65 दिन लगे

रिपोर्ट कहती है कि भारत में 100 से एक लाख मरीज होने में 65 दिन लगे थे। इरान में इतने ही आंकड़ों के लिए 70 दिन लगे। अमेरिका, स्पेन और जर्मनी में इन आंकड़ों के लिए 25 से 35 दिन लगे। रूस में जहां 100 से एक लाख मामले तक जाने में 60 दिन लगे, वहीं ब्राजील को 51 दिन लगे। जबकि यूके के 42 दिन लगे तो फ्रांस को 39 दिन लगे। इटली में यह आंकड़ा 36 दिनों में पहुंचा तो जर्मनी में 35 दिन में पहुंचा अमेरिका में 25 दिन में पहुंचा।