कोल सेक्टर में सरकार का एकाधिकार खत्म होगा; कमर्शियल माइनिंग शुरू होगी, इंफ्रास्ट्र्क्चर विकास पर 50,000 करोड़ रुपए खर्च करेगी सरकार

  • कोल इंडिया के खदानों से कोल बेड मीथेन निकालने के अधिकार की नीलामी होगी
  • ब्लॉक की नीलामी के लिए कोई योग्यता शर्त नहीं होगी। सिर्फ अग्रिम भुगतान मांगा जाएगा

दैनिक भास्कर

May 16, 2020, 11:19 PM IST

नई दिल्ली. कोविड-19 महामारी से अर्थव्यवस्था को बचाने की मुहिम के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित किए गए आत्मनिर्भर भारत पैकेज के विवरण की चौथी खेप जारी करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को कोयला और खनिज सेक्टर में साहसिक सुधारों की घोषणा की। उन्होंने कोयला सेक्टर को कमर्शियल माइनिंग के लिए खोल दिया। इसके साथ ही सरकार ने कोयला सेक्टर के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास पर 50,000 करोड़ रुपए खर्च करने का ऐलान किया।

वित्तमंत्री की इस घोषणा से कोयला सेक्टर में सरकार की मोनोपॉली खत्म होगी। इसका मतलब यह है कि अब कोयले का उपयोग सिर्फ सरकार ही तय नहीं करेगी, बल्कि कोयला उत्पादन करने वाली कंपनियां अब अपने लाभ के लिए भी कोयले का उत्पादन कर सकेंगी। कोयला उत्पादन कंपनियों को सरकार के साथ राजस्व साझा करना होगा। यहां हम जानेंगे कि कोयला और खनिज सेक्टर में क्या-क्या सुधार किए गए, इसके क्या लाभ मिलेंगे और इस पर सरकार कितना खर्च करेगी।

कोयला सेक्टर में आत्मनिर्भर बनेगा भारत

वित्त मंत्री ने कहा कि भारत के पास कोयले का तीसरा सबसे बड़ा भंडार है। इसके बावजूद भारत कोयले का आयात करता है। वित्त मंत्री ने कहा कि कोयला सेक्टर में भारत आत्मनिर्भर बनेगा और उतने ही कोयले का आयात किया जाएगा, जितने का देश में उत्पादन नहीं हो सकेगा।

क्या करेगी सरकार : प्रतियोगिता, पारदर्शिता बढ़ाने के साथ निजी सेक्टर की भागीदारी सुनिश्चित करेगी सरकार।

कितना होगा खर्च : 50,000 करोड़ रुपए। इसके तहत कोयले को खदान से रेलवे साइडिंग तक लाने के इंफ्रास्ट्र्रक्चर को बेहतर बनाने पर 18,000 करोड़ रुपए खर्च होंगे।

क्या हुए सुधार : कमर्शियल माइनिंग। सरकार की मोनोपॉली खत्म। सेक्टर में प्रवेश करने के लिए शर्तें होंगी आसान। कंपनियां सरकार के साथ राजस्व करेंगी साझा। पर्यावरण की रक्षा के लिए कोल गैसीफिकेशन और लिक्विफिकेशन को प्रोत्साहित किया जाएगा। कोयला उत्पादन में हर साल 40 फीसदी बढ़ोतरी करने की अनुमति मिलेगी।

क्या हुए बदलाव : पहले कैप्टिव उपभोक्ता या अंतिम उपयोग वाले उपभोक्ता ही कोयला ब्लॉक के लिए बोली लगा सकते थे। अब कोई भी पार्टी कोयला ब्लॉक के लिए बोली लगा सकता है और कोयले को खुले बाजार में बेच सकता है।

क्या-क्या किया जाएगा : कोल इंडिया के खदानों से कोल बेड मीथेन निकालने के अधिकार की नीलामी होगी।

कोयला कारोबार में प्रवेश की शर्तें हुईं आसान : 50 ब्लॉक तुरंत ऑफर किए जाएंगे। ब्लॉक की नीलामी करने के लिए कोई योग्यता शर्त नहीं होगी। सिर्फ अग्रिम भुगतान मांगा जाएगा। उसकी भी एक सीमा होगी।

पार्शियली एक्सप्लोर्ड ब्लॉक के लिए एक्सप्लोरेशन कम प्रोडक्शन प्रणाली : पहले पूरी तरह से एक्सप्लोर्ड ब्लॉक की ही नीलामी होती थी। अब आंशिक रूप से एक्सप्लोर्ड ब्लॉक की भी नीलामी हो सकेगी। एक्सप्लोरेशन में निजी क्षेत्र को भी भाग लेने की अनुमति मिलेगी।

तेज उत्पादन के लिए प्रोत्साहन : नियत समय से पहले उत्पादन करने वालों को मिलेगा प्रोत्साहन। इसके लिए रिवेन्यू शेयर में मिलेगी छूट।

कब तक होगा : वित्त मंत्री ने यह नहीं बताया कि ये सुधार कब तक किए जाएंगे।

खनिज क्षेत्र में सीमलेस कंपोजिट एक्सप्लोरेशन कम माइनिंग कम प्रोडक्शन का आएगा युग

वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार खनिज क्षेत्र में निजी निवेश को बढ़ावा देगी। सेक्टर का विकास करने और रोजगार को बढ़ावा देने के लिए संरचनात्मक सुधार किए जाएंगे। अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाएगा। खास तौर से एक्सप्लोरेशन गतिविधियों में नई तकनीक आजमाई जाएगी।

क्या किया जाएगा : सीमलेस कंपोजिट एक्सप्लोरेशन कम माइनिंग कम प्रोडक्शन की व्यवस्था। इसका मतलब है कि मिनरल उत्पादन के लिए जरूरी अन्य सेक्टरों (बिजली बनाने के लिए कैप्टिव कोयला खदान) की भी साथ-साथ नीलामी होगी। उदारहण के तौर पर बॉक्साइट और कोयला ब्लॉक की साथ-साथ नीलामी होगी। इससे अल्यूमीनियम उद्योग कम दर पर बिजली हासिल कर पाएगा और प्रतिस्पर्धी बनेगा।

500 नए ब्लॉक ऑफर किए जाएंगे : इन ब्लॉक की खुली और पारदर्शी तरीके से नीलामी होगी।

कैप्टिव और गैर कैप्टिव खदान का अंतर होगा खत्म : इससे माइनिंग लीज को ट्र्रांसफर हो सकेगा और बचे हुए सरप्लस मिनरल को बेचा जा सकेगा।

अलग-अलग खनिजों का बनेगा इंडेक्स : खनन मंत्रालय अलग-अलग खनिजों के लिए इंडेक्स बना रहा है।

स्टांप ड्यूटी को किया जाएगा तर्कसंगत : माइनिंग लीज आवंटित किए जाते समय भुगतान किए जाने वाले स्टांप ड्यटी को तर्क संगत बनाया जाएगा।

कब तक होंगे : मंत्री ने कोई समय सीमा नहीं दी।