कोरोनावायरस महामारी के कारण संगठित अपैरल रिटेलर्स की आय चालू कारोबारी साल में 30-35 फीसदी घट जाएगी

  • क्रिसिल ने कहा- अपैलरल रिटेलर्स की ऑपरेटिंग प्रोफिटेबिलिटी 2 फीसदी अंक घट सकती है
  • डिपार्टमेंटल स्टोर्स की आय 40 फीसदी और वैल्यू फैशन रिटेल की आय 30 फीसदी गिर सकती है

दैनिक भास्कर

Jun 26, 2020, 05:25 PM IST

नई दिल्ली. कोरोनावायरस महामारी की रोकथाम के लिए लगाए गए लॉकडाउन के कारण देश के संगठित अपैरल रिटेल सेक्टर्स की आय में चालू कारोबारी साल में 30-35 फीसदी की गिरावट दर्ज की जाएगी। यह बात घरेलू रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने कही। रेटिंग एजेंसी द्वारा शुक्रवार को जारी किए गए एक बयान के मुताबिक देश के संगठित अपैरल रिटेल सेक्टर्स का बाजार 1.7 लाख करोड़ रुपए का है।

ऑपरेटिंग प्रोफिटेबिलिटी 2 फीसदी अंक घटेगी

एजेंसी ने कहा कि इस सेक्टर की ऑपरेटिंग प्रोफिटेबिलिटी में दो फीसदी अंक की गिरावट आएगी। संचालन लाभ में हालांकि भारी गिरावट दर्ज की जाएगी। इसके कारण कारोबारी इकाइयों को अतिरिक्त फंड जुटाने होंगे। इसमें एक बड़ा हिस्सा कर्ज का होगा।

अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में मांग लॉकडाउन के पहले वाले स्तर तक पहुंच सकती है

रेटिंग एजेंसी ने अपने विश्लेषण में कहा कि लॉकडाउन को धीरे-धीरे खोला जा सकता है और अधिकतर स्टोर जून में खूल सकते हैं। फिर भी अक्टूबर-दिसंबर के त्योहारी सत्र तक ही मांग बढ़कर वापस लॉकडाउन के पहले वाले स्तर तक जा सकती है। हालांकि यह इस बात पर निर्भर करेगा कि मांग किस प्रकार से खुलती है और लॉकडाउन के बाद उपभोक्ताओं के व्यवहार में क्या बदलाव आता है।

डिपार्टमेंटल स्टोरों की आय 40 फीसदी तक घट सकती है

क्रिसिल ने कहा कि अपैरल सेगमेंट में डिपार्टमेंटल स्टोर फॉर्मेट की आय 40 फीसदी तक घट सकती है। इसका कारण यह है कि इस प्रकार के करीब आधे स्टोर मॉल में या टीयर-1 शहरों में स्थित हैं।

वैल्यू फैशन रिटेलर्स की आय 30 फीसदी गिरने का अनुमान

वैल्यू फैशन रिटेलर्स की आय 30 फीसदी तक गिरने का अनुमान है। इनकी 50 फीसदी से ज्यादा मौजूदगी टीयर-2 और टीयर-3 शहरों में है। उपभोक्ताओं के व्यवहार में बदलाव के कारण चालू कारोबारी साल में अपैरल रिटेलर्स की आय में ज्यादा योगदान ऑनलाइन माध्यम का होगा।

उपभाक्ताओं को आकर्षित करने के लिए देनी पड़ सकती है छूट

क्रिसिल रेटिंग के निदेशक गौतम शाही ने कहा कि ज्यादा उपभोक्ताओं को आकर्षित करने के लिए रिटेलर्स को छूट देनी पड़ सकती है। इसके साथ ही उन्हें सोशल डिस्टेंसिंग संबंधी नियमों का पालन करने पर खर्च भी बढ़ाना पड़ सकता है। वे किराए को फिक्स्ड से वैरिएबल मोड में ला सकते हैं और कर्मचारियों की संख्या भी घटा सकते हैं। साथ ही वे अन्य खर्चों में भी कटौती कर सकते हैं। इनके कारण इस सेगमेंट की ऑपरेटिंग प्रोफिटेबिलिटी में 2 फीसदी अंक की गिरावट आ सकती है, जो कारोबारी साल 2020 में 7-8 फीसदी थी।