कोयला खदानों में कमर्शियल माइनिंग शुरू होगी, डिफेंस में एफडीआई 49% से बढ़ाकर 74% होगा; स्पेस सेक्टर में निजी कंपनियां काम कर सकेंगी

  • 50 कोल ब्लॉक और 500 माइनिंग ब्लॉक निजी सेक्टर के लिए खोले जाएंगे; 12 एयरपोर्ट्स में भी निजी निवेश होगा
  • कुछ हथियारों की लिस्ट बनाई जाएगी, जिन्हें सिर्फ देश में ही खरीदा जाएगा, इन्हें विदेशों से खरीदने पर बैन लगेगा

दैनिक भास्कर

May 17, 2020, 12:01 AM IST

नई दिल्ली. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को लगातार चौथे दिन प्रेस कॉन्फ्रेंस की और 8 सेक्टरों में होने वाले ढांचागत सुधारों के बारे में बताया। ये 8 सेक्टर हैं- कोयला, मिनरल्स, डिफेंस मैन्यूफैक्चरिंग, एयर स्पेस मैनेजमेंट-एयरपोर्ट्स और मेनटेनेंस एंड ओवरहॉल, पावर डिस्ट्रिब्यूशन कंपनियां, सोशल इन्फ्रास्ट्रक्चर, अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा। इनमें से 3 सेक्टर कोयला, मिनरल्स और स्पेस को सरकार ने निजी क्षेत्र के लिए खोल दिया है। 

वित्त मंत्री ने एयरपोर्ट्स और पावर डिस्ट्रिब्यूशन कंपनियों में प्राइवेट इन्वेस्टमेंट और निजीकरण की बात कही, लेकिन यह पहले से चल रहा है। कई एयरपोर्ट्स का ऑपरेशन निजी कंपनियों के हाथों में है। महानगरों में पावर डिस्ट्रिब्यूशन का काम भी निजी कंपनियों के पास है। वित्त मंत्री 20 लाख करोड़ रुपए के राहत पैकेज के तहत रविवार सुबह 11 बजे पांचवीं और आखिरी प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगी।

एक घंटा 18 मिनट की प्रेस कॉन्फ्रेंस में 8 घोषणाएं
1. 50 कोल ब्लॉक निजी क्षेत्र को मिलेंगे, रेवेन्यू सरकार से साझा करना होगा
क्या मिलेगा
: कोयला सेक्टर में अब सरकार कमर्शियल माइनिंग की इजाजत देगी। इससे कॉम्पीटिशन बढ़ेगी। पारदर्शिता आएगी। कोई भी कोल ब्लॉक के लिए बोली लगा सकेगा और बाद में काेयला ओपन मार्केट में बेच सकेगा।
किसे मिलेगा: निजी कंपनियों को फायदा मिलेगा। सरकार की मोनोपॉली खत्म होगी। 50 कोल ब्लॉक निजी सेक्टर के लिए खोले जाएंगे। कोयले की खदानों से मीथेन निकालने की भी नीलामी होगी। 
कैसे मिलेगा: 50 हजार करोड़ रुपए इसके इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट पर खर्च होंगे। इस सेक्टर में निजी कंपनियों की एंट्री के लिए नियम आसान किए जाएंगे। कंपनियों को प्रति टन एक फिक्स रेट पर पैसा देने की बजाय सिर्फ रेवेन्यू सरकार से साझा करना होगा। अगर कोयले को गैस में बदलने की सुविधा भी होती है तो इंसेंटिव मिलेगा। 
कब मिलेगा: सरकार को उम्मीद है कि इससे 2023-24 तक कमर्शियल माइनिंग के जरिए 1 अरब टन कोयला उत्पादन हो सकेगा।

2. मिनरल सेक्टर में निजी निवेश बढ़ाया जाएगा
क्या मिलेगा
: 500 माइनिंग ब्लॉक्स को नीलामी के जरिए निजी कंपनियों के लिए खोला जाएगा। कैप्टिव और नॉन कैप्टिव खदानों के बीच फर्क खत्म हो जाएगा। कैप्टिव खदानें यानी जहां कंपनियां कोयला खनन करती हैं और उसका अपने ही लिए इस्तेमाल करती हैं। नॉन कैप्टिव खदानों में कोयला दूसरी कंपनियों को भी बेचा जा सकता है। 
किसे मिलेगा: निजी कंपनियों को फायदा मिलेगा, जो माइनिंग ब्लॉक्स में निवेश करना चाहती हैं। 
कैसे मिलेगा: बॉक्साइट और कोल मिनरल के ब्लॉक्स की जॉइंट ऑक्शनिंग होगी। इससे एल्युमिनियम इंडस्ट्री को फायदा मिलेगा। उनकी इलेक्ट्रिसिटी की लागत कम होगी। कैप्टिव-नॉन कैप्टिव का फर्क खत्म होने पर कंपनियां सरप्लस मिनरल्स की बिक्री कर सकेंगी।
कब मिलेगा: सरकार ने यह साफ नहीं किया है।

3. डिफेंस प्रोडक्शन में मेक इन इंडिया, एफडीआई 49% से बढ़ाकर 74% होगा
क्या मिलेगा
: कुछ हथियारों की लिस्ट बनाई जाएगी, जिन्हें सिर्फ देश में ही खरीदा जाएगा। ये इम्पोर्ट नहीं किए जाएंगे। इसी के साथ डिफेंस मैन्यूफैक्चरिंग के ऑटोमैटिक रूट में एफडीआई यानी फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट 49% से बढ़ाकर 74% होगा। यानी डिफेंस मैन्यूफैक्चरिंग कंपनी में अगर विदेशी निवेश आ रहा है तो 74% निवेश तक के लिए सरकार की मंजूरी की जरूरत नहीं होगी। इससे ज्यादा निवेश पर ही सरकार की मंजूरी लेनी होगी।
किसे मिलेगा: देश में काम करने वाली डिफेंस प्रोडक्शन कंपनियों को फायदा मिलेगा, जो हथियार बना सकती हैं और जो अब तक इम्पोर्ट होते रहे स्पेयर पार्ट्स को देश में ही बना सकती हैं। 
कैसे मिलेगा: इम्पोर्ट पर साल दर साल बैन लगाया जाएगा ताकि मेक इन इंडिया के तहत देश में हथियारों का उत्पादन बढ़े। डिफेंस सेक्टर का इम्पोर्ट बिल कम होगा। ऑर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड जो हथियार बनाता है, उसकी सप्लाई के लिए कॉर्पोरेटाइजेशन होगा। 
कब मिलेगा: सरकार ने यह साफ नहीं किया है।

4. एयर स्पेस का बेहतर इस्तेमाल हो सकेगा, 12 एयरपाेर्ट्स के जरिए 13 हजार करोड़ का निवेश आएगा
क्या मिलेगा
: वित्त मंत्री ने इससे जुड़ी तीन घोषणाएं कीं। पहली– एयरस्पेस के इस्तेमाल से पाबंदियां हटाई जाएंगी। दूसरी– 6 एयरपोर्ट का पीपीपी आधार पर ऑक्शन होगा। कुल 12 एयरपोर्ट्स में निजी कंपनियों के जरिए 13 हजार करोड़ रुपए का निवेश आएगा। तीसरी– एयरक्राफ्ट के मेनटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल के लिए टैक्स व्यवस्था को आसान बनाया जाएगा।
किसे मिलेगा: पहला– अगर ज्यादा एयर स्पेस उपलब्ध होता है तो एयरलाइन कंपनियों और यात्रियों, दोनों को फायदा मिलेगा। उनके लिए ज्यादा रूट उपलब्ध होंगे। एयरलाइन कंपनियों का समय और ईंधन खर्च बचेगा। उन्हें सालाना 1000 करोड़ रुपए का फायदा होगा। दूसरा– 12 एयरपोर्ट के ऑपरेशन की नीलामी होती है तो यहां भी निजी कंपनियों को मौके मिलेंगे। तीसरा– एयरक्राफ्ट के मेनटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल की सेवाएं देने वाली कंपनियों को मौके मिलेंगे, क्योंकि सरकार इस पर 2000 करोड़ रुपए खर्च करेगी। एयरलाइन कंपनियों की भी एयरक्राफ्ट मेनटेनेंस कॉस्ट घटेगी। 
कैसे मिलेगा: अभी 60% एयर स्पेस ही उपलब्ध होता है। यह सिविल और डिफेंस एविएशन के लिए होता है। अभी ज्यादातर उड़ानें लंबे रूट के लिए होती हैं। अब सरकार एयर स्पेस का पूरा इस्तेमाल करना चाहती है। 
कब मिलेगा: सरकार ने कहा है कि एयर स्पेस मैनेजमेंट का मसला कुछ ही महीनों में सुलझा लिया जाएगा। मेनटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल के लिए तीन साल में सरकार 2000 करोड़ रुपए खर्च करेगी। 

5. केंद्र शासित प्रदेशों में पावर डिस्ट्रिब्यूशन का काम निजी कंपनियों के हाथों में होगा
क्या मिलेगा
: बिजली के क्षेत्र में बदलाव होंगे। स्मार्ट प्री-पेड मीटर लगाए जाएंगे। केंद्र शासित प्रदेशों में पावर डिस्ट्रिब्यूशन प्राइवेटाइज हाेगा। 
किसे मिलेगा: उपभोक्ताओं को उनके हक की बिजली मिलेगी। अगर पावर डिस्ट्रिब्यूशन कंपनियां संकट में हैं तो इसका असर उपभोक्ताओं पर नहीं होने दिया जाएगा। अगर कंपनियां लोड शेडिंग करती हैं तो उन पर जुर्माना लगाया जाएगा। 
कैसे मिलेगा: कंपनियों की मदद इस तरह की जाएगी कि उन्हें समय पर पेमेंट दिलाने की व्यवस्था दी जाएगी। उपभोक्ताओं के लिए स्मार्ट प्री-पेड मीटर लगाए जाएंगे। सब्सिडी का डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर होगा। बिजली उत्पादन को बढ़ावा दिया जाएगा। 
कब मिलेगा: सरकार ने यह अभी साफ नहीं किया है।

6. सोशल इन्फ्रास्ट्रक्चर में निजी सेक्टर के लिए 8100 करोड़ रुपए
क्या मिलेगा
: सामाजिक बुनियादी ढांचे में भी निजी निवेश पर जोर दिया जाएगा, क्योंकि कोरोना के समय में भी स्कूल-अस्पतालों में सुधार की जरूरत महसूस हुई है। अगर पैसा कम पड़ रहा है तो उसकी फंडिंग यानी वायबिलिटी गैप फंडिंग के लिए 30% केंद्र या राज्य सरकारें पैसा देंगी। इस पर 8100 करोड़ रुपए खर्च होंगे।

7. स्पेस सेक्टर में भी निजी कंपनियों को मौके मिलेंगे
क्या मिलेगा
: देश के स्पेस सेक्टर के आगे के सफर में अब निजी क्षेत्र की भी भागीदारी होगी। 
किसे मिलेगा: जो कंपनियां सैटेलाइट बना सकती हैं या उसकी लॉन्चिंग की काबिलियत रखती हैं या स्पेस से जुड़ी सेवाएं दे सकती हैं, उन्हें माैके मिलेंगे।
कैसे मिलेगा: निजी कंपनियों को इसरो की सुविधाओं या उसके केंद्रों का इस्तेमाल करने की इजाजत मिलेगी ताकि वे अपनी क्षमताएं बढ़ा सकें। आगे अगर स्पेस ट्रेवल या दूसरे ग्रहों की खोज का प्रोजेक्ट आता है तो उसमें निजी कंपनियों को भी काम करने का मौका मिलेगा। रिमोट सेंसिंग के क्षेत्र में भी निजी कंपनियां काम कर सकेंगी।
कब मिलेगा: सरकार ने यह अभी साफ नहीं किया है।

8. पीपीपी के जरिए रिएक्टर शुरू होंगे, किफायती इलाज पर रिसर्च शुरू हो सकेगी
क्या मिलेगा
: पीपीपी के जरिए रिसर्च रिएक्टर शुरू किया जाएगा। ये मेडिकल आइसोटोप्स के लिए होंगे। टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट और इन्क्यूबेशन सेंटर बनाए जाएंगे ताकि प्याज, फल और सब्जी को लंबे समय तक सहेजकर रखने के तरीकों पर रिसर्च हो सके।
किसे मिलेगा: हेल्थ सेक्टर और एग्रीकल्चर सेक्टर में काम करने वाली कंपनियों या संस्थानों को इसका फायदा मिलेगा।
कैसे मिलेगा: कैंसर और अन्य बीमारियों के किफायती इलाज ढूंढने में इस रिसर्च रिएक्टर की मदद मिलेगी। 
कब मिलेगा: सरकार ने यह अभी साफ नहीं किया है।